अब मेरी घर-वापसी हुई है
सेवानिवृत्ति के तीन महीने बाद पूर्व सीजेआई गवई का कथन

नागपुर/दि.17 – भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच से कहा कि बार में लौटना ही उनके लिए सच्ची घर-वापसी है. वे नागपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.
बता दें कि, न्या. गवई ने 24 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के 52 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 23 नवंबर 2025 को आयु-सीमा के कारण सेवानिवृत्त हुए. लगभग छह महीने के कार्यकाल में वे अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले दूसरे सीजेआई बने तथा बौद्ध पृष्ठभूमि वाले पहले मुख्य न्यायाधीश रहे. उन्होंने जहां एक ओर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर नियुक्तियों, लंबित मामलों और न्यायालयीन प्रशासन में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया. सीजेआई गवई की सेवानिवृत्ति के बाद यह बहस तेज हुई कि क्या रिटायर्ड जजों को सरकारी या संवैधानिक पद स्वीकार करना चाहिए. गवई ने किसी प्रत्यक्ष सरकारी पद को लेकर सावधानीपूर्ण रुख के संकेत दिए, लेकिन संवैधानिक और विधिक मुद्दों पर उनके संभावित योगदान को लेकर कानूनी हलकों में चर्चा जारी है.
वहीं इस बीच आज नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में सीजेआई गवई ने कहा कि, मैं हमेशा बार का सदस्य रहा हूं. 22 वर्ष पहले न्यायाधीश बनने के बाद दूरी आ गई थी. अब फिर लौट आया हूं, यही मेरी असली घर-वापसी है. उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में उन्हें कई बार बॉम्बे हाई कोर्ट का जज कहा जाता था, लेकिन वे स्वयं को हमेशा नागपुर का न्यायाधीश बताते थे. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सीजेआई गवई का कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन सामाजिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक विमर्श के कारण वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा.





