आयात शुल्क घटने से स्थानीय वाइन उद्योग पर संकट

नासिक के उत्पादकों की चिंता, महासंघ की सरकार से बड़ी मांग

मुंबई/दि.17 – विदेशी वाइन, शैम्पेन और वोडका सस्ती होने की संभावना के बीच महाराष्ट्र के वाइन उद्योग में चिंता बढ़ गई है. अखिल भारतीय वाइन उद्योग महासंघ ने चेतावनी दी है कि आयात शुल्क कम होने से विदेशी कंपनियां बाजार पर कब्जा कर सकती हैं और स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
सूत्रों के अनुसार भारत विभिन्न देशों के साथ वाइन आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रहा है. अभी लगभग 150% तक रहने वाला शुल्क यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन के लिए घटाकर करीब 20% तक लाया जा सकता है. यही नीति अमेरिका पर भी लागू होने की संभावना जताई जा रही है. इससे प्रीमियम और महंगी विदेशी वाइन काफी सस्ती हो जाएगी. लेकिन उत्पादकों का कहना है कि इससे बाजार में विदेशी वाइन की बाढ़ आ जाएगी और ग्राहक स्थानीय ब्रांड से दूर हो सकते हैं.
महासंघ के अध्यक्ष जगदीश होळकर ने कहा कि भारत में बनने वाली वाइन से द्राक्ष किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है. यदि सस्ती विदेशी वाइन बड़े पैमाने पर आई, तो स्थानीय उद्योग प्रभावित होगा. 5 से 20 डॉलर की श्रेणी की वाइन पर शुल्क कम करने से दिक्कत नहीं, लेकिन सस्ती वाइन पर 150% शुल्क बरकरार रहना चाहिए. नासिक क्षेत्र के द्राक्ष उत्पादकों को विशेष चिंता है, क्योंकि यहां की खेती सीधे वाइन उद्योग पर निर्भर है.
* केंद्र सरकार से मुलाकात
उद्योग प्रतिनिधियों ने सुप्रिया सुले के साथ प्रतिनिधिमंडल बनाकर अमित शाह और पीयूष गोयल के समक्ष किसानों के हितों का मुद्दा उठाया है. महासंघ ने मांग की है कि ऐसा संतुलित निर्णय लिया जाए जिससे वाइन उद्योग का विकास भी हो और स्थानीय खेती भी सुरक्षित रहे. सस्ती वाइन पर उच्च आयात शुल्क बरकरार रखा जाए. प्रीमियम विदेशी वाइन पर सीमित रियायत दी जा सकती है. नीति बनाते समय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को प्राथमिकता दी जाए. उद्योग का कहना है कि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय महाराष्ट्र के वाइन सेक्टर और हजारों द्राक्ष किसानों के भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है.

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