छात्रावासों को भी पूर्वलक्षी प्रभाव से संपत्ति कर लागू करने की हलचलें शुरु
शासन न र्णिय 2016 की तर्ज पर होगा अमल

* विधायक राजेश वानखडे के प्रयास सफल
तिवसा/दि.18 – आदिवासी विभाग के माध्यम से संपूर्ण राज्य में निजी इमारतें आदिवासी छात्र-छात्राओं के निवास के लिए छात्रावास के रूप में किराए पर ली जाती है. खासतौर पर राज्य में महानगरपालिका व नगर पालिका क्षेत्र में इन इमारतों को पहले निवासी स्वरूप से टैक्स लागू किया जा रहा था, परंतु इन सभी क्षेत्र में नए पुनर्करनिर्धारण की प्रक्रिया शुरु होने से इन छात्रावासों को व्यवसायिक दर से प्रत्यक्ष किराए की रकम पर आधारित संपत्ति कर वसुली स्थानीय स्वशासन संस्थाओं द्वारा की जा रही थी. भारीभरकम संपत्ति कर से किसी भी निजी इमारतधारक आदिवासी विभाग को छात्रावास के लिए इमारत किराए पर देने इच्छुक नहीं रहते थे. इसी कारण से पर्याप्त छात्रावास के अभाव में अनेक आदिवासी विद्यार्थी शहरों में शिक्षा लेने से वंचित रहते थे. यह बात विधायक राजेश वानखडे के निदर्शन में आते ही उन्होंने जिस प्रकार सामाजिक न्याय विभाग के छात्रावासों को क्षेत्रफल पर आधारित संपत्ति कर लागू करने संबंधी शासन निर्णय वर्ष 2016 में निर्गमित किया गया था. इसी तर्ज पर आदिवासी विभाग के छात्रावासों को भी पूर्वलक्ष्मी प्रभाव से यह शासन निर्णय लागू करने संबंधी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे से एक पत्र द्वारा सितंबर महीने में मांग की थी. इस पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रधान सचिव नगर विकास-2 को कार्यवाही करने संबंध में निर्देशित किया गया था. विधायक राजेश वानखडे द्वारा उक्त मांग निरंतर की जा रही थी. उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे. जिसके बाद शासन स्तर पर नीतिगत के तौर पर अब आदिवासी विभाग के छात्रावासों को भी सामाजिक न्याय विभाग का यह शासन निर्णय पूर्वलक्षी प्रभाव से लागू करने की हलचलें शुरु हुई है. आने वाले समय में इस संबंध में शुद्धिपत्रक या आदिवासी विभाग के छात्रावासों के लिए नए से शासन निर्णय निर्गमित होगा, यह जानकारी विधायक राजेश वानखडे के कार्यालय द्वारा दी गई.





