अवैध पैथोलॉजी लैबों पर राज्य सरकार गंभीर नहीं
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, 5 मार्च तक जवाब दाखिल करने का आदेश

नागपुर /दि.19 – राज्य में चल रही अवैध पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं पर कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार गंभीर नहीं दिखाई दे रही है. इस पर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कड़ी नाराज़गी जताई है और सरकार को 5 मार्च तक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. सामाजिक कार्यकर्ता दिगंबर पजगाडे द्वारा जनहित याचिका दायर की गई है. इस पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और राजा वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई.
सरकारी वकील ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर जवाब देने के लिए दो महीने का समय मांगा, जिस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया और मामले को अत्यंत गंभीर बताया. अदालत ने कहा कि यदि अवैध पैथोलॉजी लैब इसी तरह चलती रहीं तो मरीजों को भारी नुकसान हो सकता है, लेकिन सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं दिख रही.
* केवल एमडी डॉक्टर ही चला सकते हैं लैब
नियमों के अनुसार पैथोलॉजी लैब का संचालन केवल एम. डी. (पैथोलॉजी), माइक्रोबायोलॉजिस्ट या बायोकेमिस्ट की डिग्रीधारक डॉक्टर ही कर सकते हैं. लेकिन राज्य में डीएमएलटी (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) और सीएमएलटी (सर्टिफिकेट इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) कोर्स किए हुए तकनीशियन हजारों पैथोलॉजी लैब चला रहे हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सरकार तत्काल जांच कर अनधिकृत पैथोलॉजी लैबों पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई करे.





