शिवराय के चरण कमलों से पावन हुई विदर्भ की वीर धरा
छह बार विदर्भ आकर महाराजा ने रचा था शौर्य का इतिहास

* सिंदखेड राजा से मैलगढ़ तक छत्रपति का रोमांचक सफर
अमरावती /दि.19 – स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज और विदर्भ का रिश्ता बहुत पुराना और गहरा है. इतिहासकार प्रा. डॉ. किशोर वानखेड़े द्वारा खोजे गए प्रमाणों के अनुसार, शिवराय हमारे विदर्भ में एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे छह बार आए थे. राजमाता जीजाऊ माँ साहेब के जन्मस्थान सिंदखेड राजा से लेकर आगरा की कैद से छूटने के बाद विदर्भ के किलों में लिया गया आश्रय, महाराज का यह रोमांचक सफर विदर्भ की मिट्टी से जुड़ा है. विदर्भ के कारंजा, मैलगढ़, बालापुर और सिंदखेड राजा जैसे क्षेत्रों में महाराज के प्रवास के ठोस सबूत अब सामने आए हैं, जो विदर्भ के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है.
नागपुर के इतिहास शोधकर्ता प्रा. डॉ. किशोर वानखेड़े ने विदर्भ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए महाराज की यात्राओं के कई महत्वपूर्ण संदर्भ दिए हैं. महाराज की माता राष्ट्रमाता जीजाऊ माँ साहेब का जन्म बुलढाणा जिले के सिंदखेड राजा में 12 जनवरी 1598 को हुआ था, जिसके कारण शिवराय का बचपन भी कुछ समय इसी क्षेत्र में बीता. जब स्वराज्य पर शाहिस्ते खान का संकट आया और जनता बेहाल हुई, तब शिवराय ने उसे सबक सिखाया और स्वराज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सूरत पर विजय प्राप्त की. इस अभियान से लौटते समय शिवराय की सेना मलकापुर, रोहिणखेड़ और भोकरदन के रास्ते पुणे पहुँची थी.
इसका उल्लेख प्रा. वानखेड़े की पुस्तक में मिलता है. सबसे रोमांचक प्रसंग आगरा की कैद से छूटने के बाद का है. मिर्झाराजे जयसिंह और दिलेर खान के साथ हुई पुरंदर की संधि के बाद महाराज आगरा गए थे. वहां से सुरक्षित निकलने के बाद साधु के वेश में यात्रा करते समय महाराज बुलढाणा जिले के मैलगढ़ किले पर रुके थे. इस किले के किलेदार ने लालच में आकर महाराज को औरंगजेब के हवाले करने की साजिश रची थी. लेकिन उस किलेदार की पत्नी को यह बात पता चल गई और उसने बड़ी निडरता से शिवराय को सतर्क कर दिया. इसी कारण महाराज वहां से सुरक्षित आगे निकल सके. इन घटनाओं का विस्तृत वर्णन प्रा. वानखेड़े की ‘वर्हाड के किले’ (भाग-2) पुस्तक में मिलता है. कारंजा और बालापुर क्षेत्र में भी महाराज की गतिविधियों के संदर्भ मिलते हैं. आरती दलात धारकर ने भी इन प्रमाणों की पुष्टि की है, जिससे यह सिद्ध होता है कि विदर्भ की भूमि शिवराय के स्पर्श से धन्य हुई है.
* मैलगढ़ की उस वीरांगना का साहस
आगरा से लौटते समय मैलगढ़ किले पर महाराज को बंदी बनाने की साजिश रची गई थी. लेकिन किलेदार की पत्नी ने अपने पति के विरुद्ध जाकर शिवराय को समय रहते सचेत कर दिया. इस माता की सतर्कता के कारण ही स्वराज्य का सूर्य सुरक्षित रहा और विदर्भ के इतिहास में यह घटना अमर हो गई.





