केवल नाम के लिए है आरटीओ का ऑनलाइन कामकाज
अब भी नागरिकों को काटने पड रहे आरटीओ के चक्कर

* दलालो के बिना आरटीओ में नहीं होता कोई भी काम
अमरावती /दि.20 – राज्य में परिवहन विभाग ने आरटीओ सेवाओं को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन प्रणाली लागू की है, लेकिन जमीनी हकीकत में लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती दिखाई दे रही है. लर्निंग लाइसेंस से लेकर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन फिटनेस तक, अधिकांश कामों के लिए नागरिकों को अब भी आरटीओ कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है.
बता दें कि, सरकार ने लाइसेंस आवेदन, नवीनीकरण, पता परिवर्तन और वाहन संबंधी कई सेवाएं सारथी 4.0 तथा परिवहन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध कराने का दावा किया है, लेकिन तकनीकी खामियों और अनिवार्य भौतिक सत्यापन के कारण फेसलेस सेवा का उद्देश्य अधूरा रह गया है. लेकिन इसके बावजूद नागरिकों का कहना है कि ऑनलाइन पोर्टल अक्सर धीमा चलता है, फॉर्म भरते समय सर्वर एरर आता है और दस्तावेज अपलोड होने के बाद भी स्वीकार नहीं होते. कई बार आवेदन पूरा होने के बाद भी प्रक्रिया अटक जाती है और दोबारा फॉर्म भरना पड़ता है. ऐसे में तकनीकी समस्याओं से परेशानी बढ़ रही है.
* ऑनलाइन प्रक्रिया, लेकिन ऑफलाइन हाजिरी अनिवार्य
लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन स्लॉट लेने के बाद भी परीक्षा के लिए कार्यालय उपस्थित होना जरूरी होता है. साथ ही स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस हेतु बायोमेट्रिक व फोटो के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होती है. इसके अलावा वाहन फिटनेस जांच के लिए वाहन सहित आरटीओ पहुंचना अनिवार्य किया गया है. ऑनलाइन अपलोड दस्तावेजों की ‘इनवर्ड’ जांच काउंटर पर ही होती है.
* स्लॉट प्रणाली से महीनों की प्रतीक्षा
नई कोटा आधारित अपॉइंटमेंट व्यवस्था के कारण ड्राइविंग टेस्ट की तारीख 2-3 महीने बाद मिल रही है. इससे काम जल्दी कराने के लिए कई लोग एजेंटों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं.
* एजेंट संस्कृति खत्म नहीं
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बावजूद दलालों के माध्यम से काम जल्दी हो जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. आम नागरिकों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि एजेंटों के जरिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज हो जाती है.
* अभी दूर है ‘फेसलेस आरटीओ’ का लक्ष्य
परिवहन विभाग की डिजिटल पहल के बावजूद पूर्ण रूप से घर बैठे आरटीओ सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य अभी अधूरा है. नागरिकों ने पोर्टल की तकनीकी क्षमता बढ़ाने, सत्यापन प्रक्रिया सरल करने और वास्तविक ऑनलाइन सेवा लागू करने की मांग की है.
* पीयूसी जांच केंद्र भी संदेह के घेरे में
आरटीओ के सामने स्थित पीयूसी जांच केंद्र में मशीन की मर्यादा और कालावधि खत्म हो जाने के बावजूद वह जांच केंद्र नियमबाह्य पद्धती से चल रहा है. जिस जगह पर पीयूसी जांच वाहन लगाया जाता है, वह जगह सार्वजनिक जमीन रहने के बावजूद वहां पर किसी आम व्यक्ति को अपना वाहन लगाने नहीं दिया जाता. बल्कि डांट-डपट कर भगा दिया जाता है. मानों वह जगह पीयूसी केंद्र संचालक की अपनी जमीन हो. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि, पीयूसी जांच केंद्र को आरटीओ अधिकारियों का पूरा आशीर्वाद प्राप्त है.
* ऑनलाइन वैद्यकीय प्रमाणपत्र
वैद्यकीय प्रमाणपत्र के लिए पैनल पर कुछ डॉक्टर है. जिनकी आईडी दलालों के पास है. वह आईडी सिस्टीम पर दर्ज करते ही संबंधित वाहन चालकों को ऑनलाइन मेडिकल सर्टीफिकेट मिल जाता है. कुछ इस तरह से आरटीओ का कामकाज चल रहा है.





