स्पर्धा व तनावपूर्ण जीवन में भावनिक बुद्धिमत्ता ही असली ताकत

ब्राह्मण सभा में व्याख्यानमाला का शुभारंभ

* डॉ. सना पंडित का कथन
अमरावती/दि.20 – आज हम आधुनिक युग में जी रहे है, इसका कई लोगों को गर्व होता है. तकनीक ने की प्रगति, मोबाइल, टीवी के माध्यम से आसानी से जानकारी व संवाद की सुविधा तथा आधुनिक शिक्षा पद्धति की जानकारी मिलती है. हालांकि, आधुनिक युग का एक पक्ष चिंता का विषय है. मोबाइल के कारण बच्चों में आत्महत्या का प्रमाण, युवाओं में बढती निराशा, परिवार व्यवस्था का विभाजन, और इससे भी अधिक मानसिक अवस्था बडे पैमाने पर बढ रही है. इस पर उपाय यानी अपेक्षापूर्ति की ओर बढना, ऐसा सर्वत्र दिखाई देता है. वास्तविक, देखा जाए तो जीवन पूरी तरह अलग है. आनंददायी व समाधानी जीवन जीने के लिए सही मायने में जीवन जीने की कला आत्मसात करना पडता है. जिसने इस कला को आत्मसात किया वह वीरान, जंगल में भी अकेले रहकर समाधानी जीवन जी सकते है. इसी कला को वर्तमान में समाज ने आत्मसात करने की जरूरत है. इसके लिए आदर्श लोकतंत्र का निर्माण करने वाले रामायण और लोकशाही का स्वरूप रहने वाले महाभारत को समझना जरूरी है. जिसके द्वारा भावनिक बुद्धीमत्ता सक्षम होती है और असली ताकत की आज के आधुनिक व स्पर्धात्मक समाज को जरूरत है, ऐसा डॉ. सना पंडित ने कहा.
ब्राह्मण सभा, चित्पावन ब्राह्मण संघ, जिला सेवानिवृत्त कर्मचारी मंडल के संयुक्त तत्वावधान में राजापेठ स्थित दरोगा प्लॉट के चित्पावन ब्राह्मण सभा सभागृह में शिव जयंती के पर्व पर दो व्याख्यानमाला का गुरूवार 19 फरवरी को शुभारंभ हुआ. इस अवसर पर व्याख्यान के प्रथम पुष्प में नागपुर के सुप्रसिद्ध वक्ता डॉ. सना पंडीत ने विषय के अनुरूप अभ्यासपुर्ण व प्रेरणादायी मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम में बतौर अध्यक्ष ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष कोटो, चित्पावन ब्राह्मण संघ के अध्यक्ष श्रीरंग फाटक और सेवानिवृत्त कर्मचारी मंडल के सचिव जगदीश सायसिकमल उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन अश्विनी कुलकर्णी ने किया. आभार खोलकुटे ने माना.

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