समय रहते पहचानें यह बीमारी, नहीं तो आँख में लग सकता है इंजेक्शन!
डायबिटीज रैटीनोपैथी के लक्षण ध्यान में नहीं आते, नजर धुंधली होती चली जाती है

अमरावती /दि.21 – तेज़ रफ्तार जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण मधुमेह के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. लेकिन यह बीमारी केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहती, यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है. सबसे ज्यादा असर पड़ता है आँखों की रेटिना (पर्दा) पर. ब्लड शुगर लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर मरीज को डायबेटिक रेटिनोपैथी हो सकती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी अंधत्व तक पहुंचा सकती है.
* महंगे इंजेक्शन और ऑपरेशन तक पहुंच सकती है नौबत
यदि बीमारी का समय पर पता नहीं चलता, तो रेटिना में सूजन (मैक्युलर एडिमा) हो जाती है. इस स्थिति में आँख के अंदर सीधे एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं. कई बार लेज़र ट्रीटमेंट करना पड़ता है. गंभीर मामलों में विट्रेक्टॉमी सर्जरी की जरूरत पड़ती है. ये उपचार महंगे और बार-बार करने पड़ सकते हैं. इसलिए बचाव ही सबसे अच्छा उपाय है.
* कैसे खराब होती है आँख?
लगातार बढ़ी हुई शुगर से रेटिना की महीन रक्तवाहिनियां कमजोर हो जाती हैं. उनमें से रक्त व द्रव का रिसाव शुरू होता है. रेटिना सूज जाती है. नई लेकिन कमजोर नसें बनती हैं. उनके फटने से आँख में रक्तस्राव होकर दृष्टि जा सकती है.
* इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अचानक धुंधला दिखाई देना, आँखों के सामने काले धब्बे या जाले जैसे तैरते दिखना, रंग पहचानने में परेशानी, रात में कम दिखना, पढ़ते समय फोकस करने में दिक्कत.
* किन लोगों को ज्यादा खतरा?
10 वर्ष से अधिक समय से मधुमेह के मरीज, एचबीए-1 सी लगातार ज्यादा रहने वाले, हाई ब्लडप्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल वाले, अनियमित दवा लेने वाले मरीजों को यह बीमारी होने का खतरा सर्वाधिक होता है.
* ध्यान रखें – शुरू में कोई लक्षण नहीं होते
डायबेटिक रेटिनोपैथी की शुरुआती अवस्था में मरीज को बिल्कुल सामान्य दिखाई देता है. जब नजर कम होने लगती है तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है. इसलिए मधुमेह होने के बाद हर 6 महीने या साल में एक बार रेटिना की जांच जरूर कराएं. शुगर नियंत्रण सबसे जरूरी इलाज है. मधुमेह में आँखें चुपचाप खराब होती हैं. जब तक दिखाई देना कम हो, तब तक देर हो चुकी होती है. नियमित जांच से ही अंधत्व और महंगे इंजेक्शन से बचाव संभव है.
मधुमेह से पीडित मरीजों द्वारा नियमित रुप से अपनी आंखों की जांच कराई जानी चाहिए. डायबिटीज पर नियंत्रण, ब्लड प्रेशर का व्यवस्थापन व समय पर उपचार करने से अंधत्व को टाला जा सकता है.
– डॉ. दीप्ती उमरे, नेत्ररोग विशेषज्ञ,
जिला सामान्य अस्पताल.





