तीसरा ‘निप्पल’ अयोग्यता का आधार नहीं
हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

नागपुर/दि.24 – बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने केंद्रीय पुलिस भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि किसी पुरुष उम्मीदवार की छाती पर तीसरा निप्पल होना उसे अयोग्य ठहराने का आधार नहीं बन सकता.
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) पद की भर्ती से संबंधित याचिका पर यह निर्णय सुनाया. मामले के अनुसार, गोंदिया जिले के एक अभ्यर्थी ‘सावन’ (काल्पनिक नाम) को चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान छाती पर तीसरा छोटा निप्पल पाए जाने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था. इसके खिलाफ अभ्यर्थी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनीश कथने ने दलील दी कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल एवं असम राइफल्स के चिकित्सा परीक्षण दिशा-निर्देशों में छाती से संबंधित अयोग्यता के कारणों का उल्लेख है, लेकिन तीसरे निप्पल को अयोग्यता की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है.
साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नागपुर (एम्स नागपुर) की 17 नवंबर 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि तीसरे निप्पल के लिए किसी सर्जरी की आवश्यकता नहीं है और इससे उम्मीदवार की कार्यक्षमता या पात्रता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने पुनर्विचार चिकित्सा परीक्षा बोर्ड द्वारा पारित अयोग्यता आदेश को निरस्त कर दिया.
* दोबारा मेडिकल जांच के निर्देश
अदालत ने सीआरपीएफ को निर्देश दिया कि अभ्यर्थी की पुनः चिकित्सा जांच कराई जाए और 20 मार्च तक कानून के अनुसार उसकी पात्रता पर निर्णय लिया जाए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि समीक्षा चिकित्सा बोर्ड एम्स नागपुर की राय से असहमत होता है, तो उसे अपने निर्णय में ठोस और स्पष्ट कारण दर्ज करने होंगे. हाईकोर्ट के इस फैसले को केंद्रीय पुलिस भर्ती से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक निर्णय माना जा रहा है.





