मराठी भाषा हमारी संस्कृति और अस्मिता की पहचान

मराठी भाषा गौरव दिवस पर विवेक देशमुख ने किया मातृभाषा संरक्षण का आह्वान

वर्धा /दि.28 मराठी भाषा का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रहा है तथा यह एक अभिजात भाषा के रूप में विकसित हुई है. मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की पहचान है. इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी प्रत्येक मराठी भाषी की है. यह विचार सेवा विधि प्राधिकरण समिति वर्धा के सचिव विवेक देशमुख ने व्यक्त किए. इंद्रप्रस्थ न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, वर्धा के मराठी विभाग तथा जिला विधि सेवा प्राधिकरण, वर्धा के संयुक्त तत्वावधान में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार वि. वा. शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) की जयंती के अवसर पर आयोजित मराठी भाषा गौरव दिवस कार्यक्रम में वे प्रमुख वक्ता के रूप में बोल रहे थे.
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आशिष ससनकर ने की. उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मराठी भाषा ममता, संस्कार और आत्मीयता की भाषा है. इसे अधिक सशक्त बनाने के लिए मराठी भाषा संवर्धन पखवाड़ा, मातृभाषा दिवस और मराठी भाषा गौरव दिवस जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में भाषा के प्रति सम्मान और लगाव बढ़े. इस अवसर पर जैवतंत्रज्ञान विभाग प्रमुख डॉ. वैभवी उघडे, आईक्यूएसी विभाग प्रमुख प्रा. संदीप पेटारे तथा मराठी विभाग प्रमुख डॉ. ज्ञानेश्वर बोहरूपी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे. कार्यक्रम का आयोजन मराठी विभाग द्वारा किया गया. प्रास्ताविक, संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. ज्ञानेश्वर बोहरूपी ने किया. कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.

 

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