फर्जी दस्तावेज देकर पैरोल पर छूटना चाह रहे थे कैदी, 15 कैदियों पर मामला दर्ज
अभिवचन रजा लेने के लिए जमा किए गए थे बनावटी दस्तावेज, जांच में बड़ा खुलासा

अमरावती/दि.2 – शहर के मध्यवर्ती कारागृह में अभिवचन रजा प्राप्त करने के लिए फर्जी वैद्यकीय प्रमाणपत्रों का उपयोग किए जाने का गंभीर मामला उजागर हुआ है. जेल प्रशासन की सतर्कता से सामने आए इस प्रकरण में कुल 15 शिक्षाधीन कैदियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है. घटना के बाद कारागृह प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यवर्ती कारागृह में बंद कुछ शिक्षाधीन कैदियों ने अपने परिजनों की बीमारी या अन्य चिकित्सकीय कारणों का हवाला देते हुए अभिवचन रजा के लिए आवेदन किया था. इन आवेदनों के साथ मेडिकल प्रमाणपत्र भी संलग्न किए गए थे, जिनके आधार पर रजा स्वीकृत कराने का प्रयास किया गया. हालांकि दस्तावेजों की जांच के दौरान जेल प्रशासन को प्रमाणपत्रों की सत्यता पर संदेह हुआ. इसके बाद संबंधित सभी प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच कराई गई. प्रशासन ने जिला शल्यचिकित्सक कार्यालय से प्रमाणपत्रों की पुष्टि कराई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि प्रस्तुत किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट पूरी तरह से फर्जी और बनावटी थे.
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ कारागृह अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कैदियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए. इसके बाद जेल प्रशासन की ओर से फ्रेजरपुरा पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस ने शिकायत के आधार पर 15 कैदियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और प्रशासन को गुमराह करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने में बाहरी व्यक्तियों, दलालों या किसी चिकित्सा संस्थान की भूमिका तो नहीं रही.
नामजद किए गए कैदियों में दिनेश अशोक आठवले (महाजनपुरा, अमरावती), राजू उर्फ पिंटू बैजू कवडे (बेलोरा नालवाडा, तह. दर्यापुर), अजीत नायर (वाघोली, लोहगांव, पुणे), जम्या उर्फ शेख जमद शेख जब्बार (नेहरु नगर, बाभुलगांव, यवतमाल), आदेश उर्फ अद्या अनिल खैरकार (डोरली रोड, अशोक नगर, यवतमाल) सहित 10 अन्य कैदियों का समावेश है. इन सभी कैदियों ने अपने माता-पिता, भाई-बहन सहित बेटे अथवा बेटी में से किसी के बीमार रहने का मेडिकल सर्टीफिकेट लगाते हुए उनके इलाज हेतु खुद को अभिवचन अवकाश यानि पैरोल पर छोडे जाने के लिए आवेदन किया था. परंतु मध्यवर्ती कारागार के वैद्यकीय अधिकारियों सहित जिला शल्य चिकित्सक द्वारा की गई जांच-पडताल में इन कैदियों द्वारा प्रस्तुत किए गए वैद्यकीय प्रमाणपत्र पूरी तरह से फर्जी पाए गए. जिसका सीधा मतलब है कि, फर्जी वैद्यकीय प्रमाणपत्रों का प्रयोग करते हुए पैरोल पर जेल से छूटने हेतु इन कैदियों ने पुलिस प्रशासन व सरकार के साथ धोखाधडी करने का प्रयास किया. यह बात समझ में आते ही जेल प्रशासन ने इन कैदियों के खिलाफ फ्रेजरपुरा पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. जिसके आधार पर फ्रेजरपुरा पुलिस ने बीएनएस की धारा 336 (3) व 340 (2) के तहत अपराधिक मामला दर्ज करते हुए जांच करनी शुरु की.
सूत्रों के अनुसार जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है और इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है. वहीं जेल प्रशासन ने भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने का निर्णय लिया है. इस घटना के सामने आने के बाद कारागृह व्यवस्था और अभिवचन रजा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं. पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.





