अमरावती में बूटी बोरी और धनज से आती है खेप
जिले में एलपीजी सिलेंडर के 5.95 लाख कनेक्शन

* व्यावसायिक सिलेंडर के 22 हजार पंजीयन
अमरावती/दि.7 – गैस सिलेंडर सहित पेट्रोलियम उत्पादों की खाडी देशों में चल रही जंग के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच आज तेल कंपनियों ने अचानक एलपीजी घरेलू सिलेंडर के रेट सीधे 60 रुपए बढा दिये. जिसका असर जिले के 5.95 लाख गैस सिलेंडर धारकों पर पडेगा. शहरी क्षेत्र में ही 1 लाख 75 हजार गैस उपभोक्ता रहने की जानकारी डीलर्स एसो. ने दी है. यह भी बता दें कि, अमरावती में बूटी बोरी और धनज स्थित कंपनियों के डिपो से एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई आती है.
* तीन कंपनियां 36 एजेंसी
अमरावती गैस डीलर्स एसो. ने बताया कि, यहां तीन कंपनियां इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम, हिंदूस्थान पेट्रोलियम के 36 डीलर्स है. 14 तहसीलों में 4 लाख 20 हजार से अधिक एवं अमरावती मनपा क्षेत्र में 1 लाख 75 हजार घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ता पंजीकृत होने की जानकारी है. व्यावसायिक सिलेंडर धारकों की संख्या 22 हजार के करीब होने की जानकारी दी गई.
* 29 लाख की आबादी
जिले की करीब 29 लाख 50 हजार की जनसंख्या है. ऐसे में लगभग 6 लाख गैस कनेक्शन एलपीजी के है. स्पष्ट है कि, अधिकांश लोग गैस सिलेंडर पर रसोई बनाते हैं. सरकार का लक्ष्य भी पारंपारिक इंधन की बजाय एलपीजी और अन्य नये इंधन के उपयोग पर है. बिजली के उपकरणों का सहारा लेकर भी कई लोग रसोई बनाते हैं. किंतु अधिकांश मात्रा गैस सिलेंडर से रसोई बनाने वालों की है. आज विश्व के हालात को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत के आसार बताये जा रहे हैं.
* पाइप लाइन से गैस सप्लाई की कोशिश
देश के कुछ महानगरों की तरह अमरावती में भी पाइप लाइन से एलपीजी गैस सप्लाई के लिए प्रयास हो रहे हैं. कंपनियों ने ठेका लेकर काम शुरु कर दिया है. अगले कुछ माह से शहर के कुछ भागों में पाइप लाइन के जरिए गैस उपलब्ध करवाने की तैयारी है. उसमें पानी और बिजली समान मीटर होते है. जिसके माध्यम से उपयोग में लायी गई एलपीजी का मूल्य निर्धारण कर बिलिंग होता है. उसके लिए भी गैस उपलब्ध होना जरुरी है.
* गैस का संकट आ सकता है
अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण कई देशों से भारत में आने वाली एलपीजी गैस और अन्य पेट्रो पदार्थों की सप्लाई प्रभावित होने की पूरी आशंका है. ऐसे में घरेलू एलपीजी की किल्लत होने की आशंका बढ रही है. जिससे सिलेंडर उपभोक्ताओं को कदाचित दूसरा विचार करना पड सकता है. इलेक्ट्रीक उपकरणों का पर्याय उपलब्ध रहने की जानकारी मार्केट के विशेषज्ञ देते हैं. वहीं कुछ लोगों का दावा है कि, युद्ध विराम की स्थिति में हालात तेजी से सुधर भी सकते है.





