जिले में भरपूर जलसंग्रह
किंतु आसमान से बरस रही आग

* बाष्पीकरण तेज होने की आशंका
* जल प्रबंधन की चुनौती
अमरावती/दि.9 – मार्च के प्रथम सप्ताह में रिकॉर्डतोड गर्मी के साथ जिले के जलसंवर्धन का मुद्दा चुनौतीपूर्ण हो गया है. हालांकि जिले के बडे बांधों में पर्याप्त मात्रा में जलसंग्रह रहने की जानकारी प्रशासनिक सूत्रों ने दी है. 60 प्रतिशत के आसपास औसत जलसंग्रह रहने के बावजूद तेजी से बाष्पीकरण की आशंका भी जतायी जा रही है. फिर भी मोटे तौर पर जिले में भरपूर पेयजल उपलब्ध रहने की स्थिति है.
* पिछले साल से अधिक
जिले के सबसे बढे अप्पर वर्धा बांध में 61 प्रतिशत उपयुक्त जलसंग्रह है. फलस्वरुप पेयजल की कोई चिंता नहीं है. पिछले साल यह आंकडा 57 प्रतिशत था. विशेषज्ञों से चर्चा करने पर बताया गया कि, बढती धूप की वजह से बाष्पीकरण तेज हो सकता है. फलस्वरुप जलसंग्रह कायम रखने की चुनौती प्रबंधन करने वालों के सामने है. अमरावती में जून में मानसून की बारिश शुरु होती है, तब तक पेयजल की स्थिति कायम रखनी होती है.
* आगे पडेगी भीषण गर्मी
गर्मी का आगामी सीजन और तेज व भीषण रहने की आशंका मौसम के जानकार व्यक्त कर रहे हैं. प्रशासन ने पानी का उपयोग देखभाल कर करने का आवाहन किया है. गर्मी के दो पूरे माह अभी शेष है. जिससे जलसंग्रह टिकाए रखना भी जरुरी और चुनौतिपूर्ण है.
* क्या है बांधों की स्थिति?
जिले के 7 मध्यम प्रकल्पों में औसतन 54 प्रतिशत जलसंग्रह है. चंद्रभागा में सर्वाधिक 89.91, पूर्णा में 78.88 और शहानुर बांध में 64.55 प्रतिशत पानी होने से स्थिति बेहतर कही जा सकती है. किंतु पंढरी, बोर्डीनाला प्रकल्पों में पानी तेजी से कम हो रहा है. गाडगा प्रकल्प तो सुख गया है. जिले की बात करें, तो 56 प्रकल्पों में औसतन 58.73 प्रतिशत पानी उपलब्ध है.





