किसान आंदोलन प्रकरण में विधायक प्रवीण तायडे को कोर्ट का नोटिस

6 अप्रैल को न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश

चांदूर बाजार/दि.9- किसान आंदोलन के दौरान कथित तौर पर आंदोलनकारियों को अपशब्द कहने के मामले में न्यायालय ने विधायक प्रवीण तायडे को नोटिस जारी किया है. यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता और शेतकरी आंदोलन के नेतृत्वकर्ता गोपाल भालेराव द्वारा दायर निजी शिकायत पर की गई है.
मामले के अनुसार, चांदूर बाजार तहसील के लगभग 11 हजार किसानों को अतिवृष्टि का लाभ दिलाने की मांग को लेकर गोपाल भालेराव के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने विधायक कार्यालय के सामने डफली बजाओ आंदोलन किया था. आरोप है कि इस आंदोलन से नाराज होकर विधायक प्रवीण तायडे ने एक सभा में आंदोलनकारी किसानों और गोपाल भालेराव के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. इस घटना की शिकायत भालेराव ने पुलिस स्टेशन में की थी, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण मामला दर्ज नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.
यह शिकायत ओएमसीए क्रमांक 39/2026 (गोपाल भालेराव बनाम प्रवीण तायडे) के तहत दायर की गई है. शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 296, 352, 356 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है. एम. एम. राऊत, न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम वर्ग) न्यायालय क्रमांक 1, चांदूर बाजार ने 2 मार्च 2026 को आदेश देते हुए तक्रारदार और साक्षीदार रमण लंगोटे के बयान बीएनएसएस धारा 223(1) के तहत दर्ज किए. इसके बाद न्यायालय ने प्राथमिक रूप से शिकायत को स्वीकार करते हुए विधायक तायडे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. न्यायालय ने विधायक प्रवीण तायडे को 6 अप्रैल 2026 को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं. शिकायतकर्ता गोपाल भालेराव ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के कारण हमें न्याय मिलेगा और किसानों का अपमान करने वालों को कानून सबक सिखाएगा. मामले में आंदोलनकारियों की ओर से एड. सचिन पलसपगार न्यायालय में पैरवी कर रहे हैं. अब सभी की नजर 6 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है.

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