गोवंश की तस्करी के दौरान बाघ के हमले में एक की मौत

दूसरे ने आग लगाकर बचाई अपनी जान

* मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प के बारूखेडा जंगल की घटना
धारणी/दि.18 – मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प में बाघ के हमलों की घटनाएं लगातार बढती जा रही हैं. गत सप्ताह जंगल से निकलकर बाघ ने खेत में बंधे 6 पालतू पशुओं का शिकार कर लिया था. इसके बाद भी वन विभाग द्बारा कोई कार्रवाई नहीं की गई. आखिरकार एक गोवंश तस्कर को अपनी जान गंवानी पडी. बारूखेडा जंगल परिसर में अवैध रूप से गोवंश ले जाते समय झरी बाजार निवासी गुलजार फत्तू महल्ले (60) पर हमला कर बाघ ने उसे मौत के घाट उतार दिया. जबकि अकोला जिले के तेल्हारा तहसील में आनेवाले दिवान झरी निवासी अर्जुन मोरे ने आग लगाकर अपनी जान बचा ली.
जानकारी के मुताबिक अर्जुन मोरे और गुलजार महल्ले जंगल से अवैध रूप से गोवंश की तस्करी कर रहे थे. तब बोरूखेडा जंगल में अचानक बाघ ने गुलजार पर हमला कर दिया. इस हमले में गुलजार की मृत्यु हो गई. अपनी आंखो के सामने गुलजार की मृत्यु हो जाने के बाद भयभीत अर्जुन ने अपनी जान बचाने के लिए वहां पत्तो में आग लगा दी और जान बचाकर भाग पडा. यह घटना वनपरिक्षेत्र अधिकारी एस.ए. आंडेकर अपने दल के साथ वनखंड क्रमांक 1104 और 1105 में लगी आग को काबू में करने गए तब प्रकाश में आई. वनखंड 1105 में उन्हें एक व्यक्ति का जला हुआ शत-विक्षत शव मिला. इस घटना से हडकंप मच गया हैं. वन अधिकारी और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की हैं. इस घटना से क्षेत्र के आदिवासियों में दहशत का वातावरण निर्माण हो गया हैं.

Back to top button