कपास खरीदी बंद होने से अमरावती विभाग के 40 हजार किसान संकट में
विधानसभा में विधायक सुलभा खोडके ने उठाया मुद्दा

मुंबई /दि.18- कपास खरीदी बंद होने से अमरावती विभाग के लगभग 40 हजार किसान गंभीर संकट में फंस गए हैं. इस मुद्दे को उठाते हुए अमरावती की विधायक सुलभा खोडके ने विधानसभा में औचित्य के मुद्दे के तहत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. उन्होंने कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के माध्यम से सरकारी कपास खरीदी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाने की मांग की है.
विधायक सुलभा खोडके ने सदन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीसीआई के माध्यम से कपास खरीदी की घोषणा की गई थी, लेकिन राज्य स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक अड़चनों के कारण हजारों किसानों का कपास अब तक नहीं खरीदा जा सका. पहले 27 फरवरी तक की अवधि दी गई थी, जिसे बाद में 15 मार्च तक बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद स्लॉट बुकिंग शुरू नहीं की गई और खरीदी अचानक बंद कर दी गई. उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्रों की कमी, पंजीकरण प्रक्रिया में देरी, मनुष्यबल की कमी और गोदामों के अभाव के कारण किसान अपना माल बेच नहीं पाए. अब स्थिति यह है कि किसानों के घरों में कपास का बड़ा स्टॉक पड़ा हुआ है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
विधायक सुलभा खोडके ने यह भी कहा कि गोदामों की कमी और मौसम के प्रभाव के चलते कपास खराब होने का खतरा बढ़ गया है. मजबूरी में किसान निजी व्यापारियों को 500 से 700 रुपये कम दर पर कपास बेचने को विवश हैं, जिससे उनकी आर्थिक लूट हो रही है. उन्होंने सरकार से मांग की कि तत्काल अतिरिक्त खरीदी केंद्र शुरू किए जाएं, आवश्यक पायाभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और सीसीआई के माध्यम से कपास खरीदी की अवधि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके.
इसके साथ ही विधायक सुलभा खोडके ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते इस पर निर्णय नहीं लिया गया, तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. अब सभी की नजरें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं, जिससे हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है.





