अमरावती मनपा के आदेश पर नागपुर हाईकोर्ट ने दिया ‘स्टे’

फिलहाल स्वीकृत पार्षद पद पर बने रहेंगे सैय्यद मुनज्जर अली

* मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा ने जारी किया था निलंबन आदेश
* मनपा में ठेकेदार रहने के चलते मुनज्जर अली को ठहराया गया था अपात्र
* आदेश को मुनज्जर अली ने गत रोज ही नागपुर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
* न्या. कुबलकर की अदालत ने मुनज्जर अली को ‘स्टे ऑर्डर’ के जरिए दी बडी राहत
* एड. अक्षय नाईक, एड. श्रेयस वैष्णव व एड. संजय रावटे ने रखा मुनज्जर अली का पक्ष
* अब सभी की निगाहें मामले की अगली सुनवाई पर, राजनीतिक कयासों का दौर तेज
अमरावती/दि.18 – इस समय अमरावती शहर, विशेषकर मनपा की राजनीति में एक बडी उथल-पुथल मची हुई है. क्योंकि दो दिन पूर्व मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक ने एमआईएम के स्वीकृत पार्षद सैय्यद मुनज्जर अली के खिलाफ अपात्रता की कार्रवाई करते हुए उनकी सदस्यता को एक पत्र जारी कर निलंबित कर दिया था. जिसे सैय्यद मुनज्जर अली द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए नागपुर खंडपीठ ने अमरावती महानगर पालिका की ओर से जारी निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. इसके चलते एमआईएम के स्वीकृत पार्षद सैय्यद मुनज्जर अली फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे.
गौरतलब है कि मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा ने मुनज्जर अली को ठेकेदार होने के कारण अपात्र ठहराते हुए उनका निलंबन आदेश जारी किया था. इस कार्रवाई को मुनज्जर अली ने तुरंत हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कुबलकर की अदालत ने मुनज्जर अली को अंतरिम राहत देते हुए निलंबन आदेश पर ‘स्टे’ प्रदान किया. अदालत में मुनज्जर अली की ओर से अधिवक्ता अक्षय नाईक, श्रेयस वैष्णव और संजय रावटे ने पक्ष रखा. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल मुनज्जर अली पार्षद पद पर बने रहेंगे. वहीं, इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी.
बता दें कि, दो दिन पूर्व ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानि एआईएमआईएम के स्वीकृत पार्षद सैय्यद मुनज्जर अली की सदस्यता निलंबित करते हुए मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक द्वारा एक पत्र जारी किया गया था. जिसमें कहा गया था कि, सैय्यद मुनज्जर अली के मनपा पार्षद पद हेतु अपात्र रहने के चलते यह कार्रवाई की गई है और यह कार्रवाई सैय्यद मुनज्जर अली के ठेकेदार होने के कारण एवं आधार पर की गई है. मनपा प्रशासन की ओर से यह निर्णय लेते हुए मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा द्वारा जारी निलंबन व अपात्रता संबंधी आदेश में कहा गया कि, महानगर पालिका अधिनियम के अनुसार, किसी पार्षद का निगम से जुड़े ठेके में प्रत्यक्ष हित होना हितों के टकराव यानि कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट की श्रेणी में आता है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई. जिसके बाद एमआईएम के स्वीकृत पार्षद सैय्यद मुनज्जर अली ने निगमायुक्त सौम्या शर्मा की ओर से जारी आदेश के खिलाफ याचिका दायर करते हुए निगमायुक्त के आदेश को नागपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. जहां पर आज हुई सुनवाई के बाद नागपुर हाईकोर्ट ने मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा द्वारा जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. जिसके चलते अब सभी की निगाहें इस मामले में होनेवाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है.
ज्ञात रहे कि, 20 फरवरी 2026 को एमआईएम ने स्वीकृत पार्षद पद हेतु अपने कोटे के तहत सैय्यद मुनज्जर अली सैय्यद मुदस्सर अली का नाम आमसभा में प्रस्तावित किया था. जिसे आमसभा सहित मनपा प्रशासन द्वारा मान्यता दी गई थी. परंतु महज 7 दिन के भीतर यह जानकारी सामने आई कि, स्वीकृत पार्षद नामित किए जाते समय सैय्यद मुनज्जर अली ठेकेदार के तौर पर मनपा के साथ जुडे हुए थे. जिसके चलते वे महाराष्ट्र मनपा अधिनियम की धारा 10 (फ) व 1 (ग) के तहत मनपा में पार्षद बनने हेतु अपात्र है. इस बात के मद्देनजर मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक ने सभी तथ्यों की जांच-पडताल की और फिर मनपा के विधि अधिकारी श्रीकांतसिंह चौहान ने सैय्यद मुनज्जर अली के नाम स्वीकृत पार्षद पद हेतु अपात्र रहने से संबंधित शोकॉज नोटिस भी जारी की. जिसका सैय्यद मुनज्जर अली द्वारा अपने स्तर पर मनपा को जवाब दिया गया था. परंतु इस जवाब को असंतोषजनक व असमाधानकारक बताते हुए मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा चांडक ने गत रोज सैय्यद मुनज्जर अली को स्वीकृत पार्षद पद हेतु अपात्र ठहराते हुए निलंबन पत्र जारी किया.
* ईटकॉन के ठेके से सीधा संबंध रहने को लेकर थी आपत्ति
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक अमरावती महानगर पालिका के विभिन्न विभागों में मनुष्यबल की आपूर्ति करने हेतु अमल में लाए गए आऊटसोर्सिंग का ठेका ईटकॉन ई-सोल्यूशन्स प्रा. लि. (नोएडा) व ईटकॉन गो सोल्यूशन्स प्रा. लि. (अमरावती) नामक कंपनी द्वारा सहभाग लिया गया था. जिसमें सैय्यद मुनज्जर अली सैय्यद मुदस्सर अली का सीधा संबंध था और सैय्यद मुनज्जर अली का नाम मनपा के रिकॉर्ड में ठेकेदार के तौर पर दर्ज है. इस बात को ध्यान में रखते हुए सैय्यद मुनज्जर अली की स्वीकृत सदस्यता को लेकर शिकायत मिलने के बाद गठित जांच समिति ने अमरावती महानगर पालिका के रिकॉर्ड को खंगाला तथा 9 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट दी. जिसमें कहा गया है कि, ईटकॉन कंपनी द्वारा मनुष्यबल आपूर्ति के ठेका करार हेतु 25 मार्च 2022 को खरीदे गए मुद्रांक दस्तावेज पर 8 अप्रैल 2022 को मनपा के साथ करारनामा करते समय ईटकॉन कंपनी की ओर से सैय्यद मुनज्जर अली द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे. हालांकि उक्त करारनामा 7 अप्रैल 2025 को समाप्त भी हो गया था.
* मनमाने ढंग से की गई निलंबन की कार्रवाई – सैय्यद मुनज्जर अली
वहीं दूसरी ओर खुद को स्वीकृत पार्षद पद के लिए अपात्र ठहराए जाने के संबंधित फैसले को एकतरफा कार्रवाई बताते हुए सैय्यद मुनज्जर अली ने निगमायुक्त सौम्या शर्मा-चांडक के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी. साथ ही बताया कि, वे ईटकॉन कंपनी के कभी मालिक नहीं रहे, बल्कि उस कंपनी में मैनेजर के तौर पर कर्मचारी हुआ करते थे. इसके साथ ही ईटकॉन कंपनी का अमरावती मनपा के साथ ठेका करार काफी पहले ही खत्म हो चुका है. साथ ही साथ खुद उन्होंने जनवरी 2026 में ही ईटकॉन कंपनी में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. ऐसे में अब उनका ईटकॉन कंपनी एवं आऊटसोर्सिंग ठेके के साथ कोई लेना-देना नहीं है. जिसके चलते वे अमरावती महानगर पालिका में पार्षद अथवा स्वीकृत पार्षद पद पर बने रहने के लिए पूरी तरह से पात्र है. साथ ही मनपा द्वारा पुराने रिकॉर्ड के आधार पर उनके खिलाफ मनमाने व गलत ढंग से अपात्रता की कार्रवाई की गई है. जिसके खिलाफ उन्होंने नागपुर हाईकोर्ट की शरण ली थी. जहां पर हाईकोर्ट ने उनके पक्ष को सही पाते हुए मनपा आयुक्त द्वारा जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. साथ ही स्वीकृत पार्षद मुनज्जर अली ने यह विश्वास भी जताया कि, हाईकोर्ट में पूरे मामले की सुनवाई के बाद सच की जीत होगी.

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