जिले में लगातार दूसरे दिन ओलावृष्टि के साथ बेमौसम बारिश

लखमाजी महाराज की यात्रा में जमकर बरसे ओले

* मेलघाट में गेहूं भीग जाने से किसानों का नुकसान
* तरबूज के खेत और संतरा बागान भी प्रभावित
अमरावती /दि.20 – मौसम विभाग द्वारा जताए गए पूर्व अनुमान के अनुसार कल गुरुवार 19 मार्च को दोपहर 3 बजे के बाद मेलघाट की धारणी व चिखलदरा तहसीलों में जबरदस्त ओलावृष्टि के साथ बेमौसम बारिश हुई. जिसके तहत जहां सेमाडोह परिसर में जमकर ओले बरसे, वहीं कोलखास, माखला व रायपुर परिसर में जोरदार बारिश ने हाजिरी लगाई. इस असमय संकट के चलते कटाई के लिए तैयार गेहूं पूरी तरह से भीगकर खराब हो गया. जिससे क्षेत्र के आदिवासी किसानों का काफी नुकसान हुआ है. इसी तरह अंजनगांव सुर्जी तहसील के संत लखमाजी महाराज संस्थान में 400 वर्षों की परंपरा रहनेवाले गुढीपाडवा के उत्सव पर भी इस बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि का जबरदस्त असर हुआ तथा दोपहर 4 बजे के आसपास अचानक हुई तुफान बारिश और बडे आकार वाली ओलावृष्टि के चलते पूरी यात्रा अस्तव्यस्त हो गई.
उल्लेखनीय है कि, विगत कई दिनों से मेलघाट में धूप की तीव्रता काफी अधिक बढ गई थी. लेकिन गुरुवार की दोपहर के समय वातावरण में अचानक बदलाव होना शुरु हुआ तथा बादलों की गडगडाहट के साथ पानी बरसने लगा. इस दौरान सेमाडोह में बारिश के साथ ही ओलावृष्टि भी हुई. वहीं इससे पहले बुधवार की रात 12 बजे के आसपास चाकर्दा परिसर में बिजली की तेज गडगडाहट के साथ जमकर बारिश हुई. साथ ही साथ अचलपुर व परतवाडा शहर में कल दोपहर से सूरज के दर्शन नहीं हुए और कुछ इलाकों में बारिश की हलकी-फुलकी फुहारे बरसी. इसके अलावा वडनेर गंगाई के कुछ क्षेत्रों में बिजली की तेज गडगडाहट के साथ पानी बरसा. साथ ही साथ कल देर रात बेमौसम बारिश ने अमरावती में भी दस्तक दी तथा शहर के लगभग सभी इलाके बेमौसम बरसात के चलते सराबोर हो गए. कुल मिलाकर जिले में मेलघाट सहित कई क्षेत्रों में विगत दो दिनों से लगातार ओलावृष्टि सहित बेमौसम बारिश का सिलसिला चल रहा है. जिसके चलते किसानों में जबरदस्त चिंता वाला माहौल है.

* अंजनगांव सुर्जी में बारिश व ओलावृष्टि ने ढाया कहर
अंजनगांव सुर्जी क्षेत्र में गत रोज बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने जबरदस्त कहर ढाया, जिसका असर वनोजाबाग परिसर में काफी अधिक दिखाई दिया. जहां पर लखमाजी महाराज संस्थान में गुढीपाडवा के मुहूर्त पर प्रतिवर्षानुसार आयोजित यात्रा पूरी तरह से अस्तव्यस्त हो गई और लगातार डेढ घंटे तक तेज आंधी-तूफान के साथ हुई ओलावृष्टि व बारिश की वजह से यात्रा में शामिल छोटे-बडे व्यापारियों का काफी नुकसान हुआ. साथ ही साथ मंदिर में दर्शन हेतु आए श्रद्धालुओं को पूरे परिसर में पानी व कीचड हो जाने के चलते काफी तकलिफों का सामना भी करना पडा.
बता दें कि, प्रतिवर्ष वनोजाबाग परिसर स्थित लखमाजी महाराज संस्थान में गुढीपाडवा पर्व पर मन्नत मांगने एवं मन्नत पूरी करने के लिए हजारों की संख्या में भाविक-श्रद्धालु पहुंचते है. जहां पर रोडगे के महाप्रसाद का भी आयोजन होता है तथा भाविक-श्रद्धालुओं की जबरदस्त उपस्थिति को देखते हुए मंदिर संस्थान परिसर में कई छोटे-बडे दुकानदारों द्वारा अपनी दुकाने सजाई जाती है. जिसके चलते पूरे परिसर में यात्रा व मेले का स्वरुप दिखाई देता है. गत रोज ही गुढीपाडवा का पर्व रहने के चलते लखमाजी महाराज की यात्रा में कुछ इसी तरह का दृष्य दिखाई दे रहा था, लेकिन दोपहर बाद मौसम में अचानक ही करवट बदल ली और देखते ही देखते तेज आंधी-तूफान के साथ बेमौसम बारिश शुरु हो गई. जिसके चलते यात्रा में दुकानदारों द्वारा लगाए गए तंबू पूरी तरह से उखड गए तथा विक्री हेतु लाया गया माल पूरी तरह से भीग गया. इस समय ओलो की मार से बचने के लिए दुकानदारों सहित भाविक-श्रद्धालुओं ने आसपास में स्थित पक्की दुकानों के शेड और मंदिर संस्थान के हॉल में जाकर आसरा लिया. यहां पर दर्शन हेतु आए भाविक-श्रद्धालुओं ने अपने दुपहिया व चारपहिया वाहनों को मंदिर परिसर स्थित खेत में खडा किया था, जहां पर बारिश के चलते जबरदस्त कीचड हो जाने की वजह से सभी वाहन फंसे रह गए. ऐसे में इस बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के चलते वनोजाबाग परिसर में लोगों को कई घंटों तक दिक्कतों का सामना करना पडा.

* मेलघाट में भी जमकर बरसे ओले, खेती-किसानी का जबरदस्त नुकसान
मेलघाट परिसर के कई क्षेत्रों में गत रोज वातावरण में अचानक बदलाव होने के साथ ही मूसलाधार बारिश सहित जबरदस्त ओलावृष्टि भी हुई. जिसके चलते चिखलदरा तहसील में सेमाडोह गांव सहित आसपास के कई क्षेत्रों में गेहूं व चने की फसलों का बडे पैमाने पर नुकसान हुआ है. मिली जानकारी के मुताबिक कल दोपहर बाद चिखलदरा तहसील क्षेत्र में वातावरण अचानक ही बदरीला हो गया तथा तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरु हुई. जिसके उपरांत कुछ ही समय में ओले बरसने लगे. जिसके चलते खेतों में खडी पूरी फसल जमींदोज हो गई और हाथ में आई फसल के नष्ट हो जाने से किसानों की कई माह की मेहनत बर्बाद हो गई. इसके साथ ही खेतों में पानी जमा हो जाने के चलते अब बची हुई फसल के सडने का खतरा भी पैदा हो गया है. इसकी वजह क्षेत्र के किसान जबरदस्त चिंता में फंसे दिखाई दे रहे है.

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