अप्परवर्धा बांध में जलसंग्रह घटा

अमरावती / दि.25 – पश्चिम विदर्भ क्षेत्र के सबसे बडे बांध के तौर पर पहचाने जानेवाले तथा अमरावती जिले के लिए वरदान साबित रहनेवाले अप्परवर्धा बांध में इन दिनों जल संग्रह तेजी के साथ कम हो रहा है. जिसके चलते भविष्य में पानी को लेकर जबर्दस्त किल्लत पैदा होने की संभावना बन रही है. जिससे किसानों को आगे चलकर काफी बडी समस्याओं व चुनौतियों का सामना भी करना पड सकता है.
उल्लेखनीय है कि विगत कुछ दिनों से भीषण गर्मी पडने के साथ ही तेज धूप भी पड रही है. जिसके चलते मोर्शी शहर सहित परिसर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास जा पहुंचा है. वहीं मोर्शी शहर से महज 8 किमी की दूरी पर स्थित अप्परवर्धा बांध के पानी का वाष्पीकरण बडी तेजी के साथ हो रहा है. विगत 22 मार्च को अप्परवर्धा बांध में 54.62 फीसद जल संग्रह था. जबकि गत वर्ष जल संग्रह की स्थिति 52.66 फीसद थी. इस वर्ष बांध में जल संग्रह का स्तर 332 मीटर हैं.
गत वर्ष अप्परवर्धा बांध में 4 जुलाई को 338.13 मीटर जलस्तर था. जबकि अप्रैल और मई माह के दौरान 338. 60 मीटर जल स्तर के साथ बांध में 47.64 फीसद जल संग्रह था. अप्परवर्धा बांध के जलाशय में अधिकतम जलस्तर 342.50 मीटर निर्धारित किया गया है. गत वर्ष बारिश का मौसम शुरू होने के बाद दो दिन की बारिश से ही मध्यप्रदेश से बहकर आनेवाली माडू नदी के जरिए अप्परवर्धा बांध में पहुंचे पानी की वजह से बांध के जलस्तर में 2 सेंटीमीटर की वृध्दि हुई थी. वही गत वर्ष जुलाई और अगस्त माह के दौरान अप्परवर्धा बांध के जल ग्रहण क्षेत्र में बडे पैमाने पर बारिश होन के चलते बांध 90 फीसदी तक भर गया था. परिणामस्वरूप अप्परवर्धा बांध के दरवाजों को अलग- अलग समय पर खोलकर वर्धा नदी में पानी छोडने की नौबत आयी थी. लेकिन अब बांध में जल संग्रहण काफी हद तक कम हो गया है.
बांध से होती है जलापूर्ति
अप्परवर्धा बांध के जलाशय से अमरावती महानगरपालिका, रतन इंडिया कंपनी, नांदगांव पेठ की पंच तारांकित एमआयडीसी के साथ ही मोर्शी नगर परिषद, वरूड नगर परिषद सहित हिवरखेड, लोणी व राजुरा गांवों को जलापूर्ति की जाती है. इस वर्ष गर्मी के मौसम का प्रारंभ होते ही अप्परवर्धा बांध के जलाशय में जलस्तर तेजी से घटना दिखाई दे रहा है. जिससे पानी को लेकर चिंतापूर्ण हालात बने हुए हैं.





