अब ‘रेल रोको’ के मूड में चांगापुरवासी
अजिबोगरीब व असुविधापूर्ण रेलवे अंडरपास के खिलाफ फूट रहा गुस्सा

* घुमावदार और संकरे रेलवे अंडरपास से हो रही जबरदस्त तकलीफें
* वाहन चलाने में दिक्कतों के साथ ही अंडरपास में हादसे घटित होने की संभावना
* मध्य रेलवे की मनमानी के खिलाफ मुखर हो रही आवाज, जल्द तीव्र आंदोलन
अमरावती/दि.26 – समीपस्थ चांगापुर फाटे से चांगापुर नरेश हनुमान मंदिर की ओर जानेवाली सडक पर मध्य रेलवे द्वारा बनाए गए रेलवे अंडरपास के खिलाफ चांगापुर परिसरवासियों का गुस्सा अब फूटने में ही है. क्योंकि परिसरवासियों को असुविधाओं और जबरदस्त दिक्कतों में डालनेवाले इस रेलवे अंडरपास के खिलाफ अब चांगापुर क्षेत्र के नागरिकों सहित यहां पर हमेशा ही चांगापुर नरेश के दर्शन हेतु आनेवाले भाविक श्रद्धालु अब तीव्र जनआंदोलन खडा करने के साथ ही रेल रोको आंदोलन करने के मूड में दिखाई दे रहे है.
बता दें कि, चांगापुर फाटे से चांगापुर मंदिर की ओर जानेवाले सडक से होकर अमरावती-नरखेड रेल लाइन गुजरती है. इसके चलते इस सडक पर रेलवे क्रॉसिंग बनाने के साथ ही रेलवे गेट क्रमांक एलसी-8 बनाया गया है. जहां पर अब तक रेलवे फाटक की व्यवस्था थी, जो ट्रेन के आने व जानेवाले समय पर खुलता व बंद होता था. चूंकि रेलवे प्रशासन ने देशभर में अपनी रेलवे पटरियों को क्रॉसिंगमुक्त बनाने का अभियान छेड रखा है. जिसके चलते जिन स्थानों पर रेलवे क्रॉसिंग है, वहां रेलवे ओवरब्रिज अथवा रेलवे अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है. इसी नीति के चलते अमरावती में इससे पहले राजापेठ, निंभोरा व रेवसा में रेलवे ओवरब्रिज बनाने के साथ-साथ राजापेठ, नवाथे व गोपाल नगर परिसर में रेलवे अंडरपास भी बनाए गए. साथ ही साथ चांगापुर परिसर में भी रेलवे अंडरपास बनाया गया है, परंतु रेलवे द्वारा बनाए गए रेवसा ओवरब्रिज सहित गोपाल नगर एवं चांगापुर परिसर के रेलवे अंडरपास लगातार विवादों के घेरे बने हुए है. क्योंकि रेलवे द्वारा गोपाल नगर एवं चांगापुर परिसर में रेलवे पटरी के नीचे से होकर सीधा अंडरपास बनाने की बजाए अंग्रेजी वर्णमाला के ‘कैपिटल यू’ आकार में रेलवे अंडरपास का निर्माण किया गया है. गोपाल नगर परिसर वाले अंडरपास में फिर भी वाहनों की आवाजाही के लिए काफी हद तक पर्याप्त जगह छोडी गई है, लेकिन चांगापुर परिसर में बनाया गया रेलवे अंडरपास रेल विभाग की अदूरदृष्टि व नियोजनशून्यता का सबसे सटीक व बेहतर उदाहरण कहा जा सकता है. क्योंकि इस रेलवे अंडरपास में भीतर घुसने व बाहर निकलने वाले दोनों ओर के पल्लो में मात्र 6-6 मीटर की जगह छोडी गई है. वहीं जिस भूमिगत मार्ग से इन दोनों पल्लों को जोडा गया है, उसकी चौडाई मात्र 5 मीटर रखी गई है. जबकि उसी भूमिगत मार्ग पर वाहन दो बार घुमावदार रास्ता लेकर आगे की ओर बढते है.
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, इस रेलवे अंडरपास में घुसते समय जहां सीधी ढलान से होकर गुजरना पडता है, वहीं वापिस मुख्य मार्ग पर आने हेतु दूसरी ओर से सीधी चढाई भी चढनी होती है. हैरानी वाली बात यह है कि, मुख्य मार्ग से कनेक्ट किए गए दोनों ओर के रास्ते भी समतल नहीं है, बल्कि बुरी तरह से उबडखाबड है. जिसके चलते सभी वाहनों विशेषकर दुपहिया व तिपहिया वाहनों के चालकों को इस रेलवे अंडरपास में घुसते और बाहर निकलते समय अपना संतुलन बनाए रखने के लिए काफी सर्कस व मशक्कत करनी पडती है. साथ ही साथ इस रेलवे अंडरपास में रेती, सीमेंट व धूल के जगह-जगह ढेर लगे हुए है और हर वाहन के आते-जाते समय यहां पर रेती व धूल के कण हवा में उडने लगते है. जिसके चलते पीछे से आ रहे वाहन चालकों को सामने का दृश्य दिखाई ही नहीं देता. इस वजह से भी इस रेलवे अंडरपास में सडक हादसे घटित होने की संभावना बनी रहती है.
ज्ञात रहे कि, विगत कुछ दिनो से दैनिक ‘अमरावती मंडल’ को इस रेलवे अंडरपास के संदर्भ में चांगापुर परिसरवासियों की ओर से लगातार शिकायते प्राप्त हो रही थी. जिसके चलते ‘अमरावती मंडल’ की टीम ने इस रेलवे अंडरपास का मुआयना करने के साथ ही परिसर में रहनेवाले कई लोगों से इस बारे में बातचित करते हुए विगत दो दिनों के दौरान प्रमुखता के साथ खबरे प्रकाशित की. ताकि रेल विभाग सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों एव प्रशासन को चांगापुर परिसरवासियों के साथ पेश आ रही समस्याओं व दिक्कतों से अवगत कराया जा सके. दैनिक अमरावती मंडल का साथ और सहयोग मिलते ही अब इस रेलवे अंडरपास का विरोध कर रहे लोगों के हौसले काफी बुलंद हो गए है और अब वे अपने लिए जिंदगी भर का सिरदर्द साबित हो सकनेवाले रेलवे अंडरपास को लेकर आर-पार की लडाई लडने के मूड में भी है.
दैनिक ‘अमरावती मंडल’ की टीम ने विगत दो दिनों के दौरान चांगापुर परिसर का दौरान करते हुए विस्तृत समाचार प्रकाशित करने के बाद आज लगातार तीसरे दिन भी चांगापुर परिसर का दौरा किया तथा परिसर में रहनेवाले कई लोगों से इस बारे में बातचीत की. इस समय चांगापुर परिसर में रहनेवाले गुड्डू गवई, ऋषिकेश राठी, रमण व्यास, राज सगणे, श्याम वानखेडे, नागेश घोरमाडे, संतोष व्यास, राधेश्याम राठी, निलेश गवई, नितेश गवई, मंगेश इंगोले, अशोक कुकडे, खानंदे, विजय गावंडे, मस्के, मगरदे, सुनील गोहत्रे, विजय भास्कर, धुर्वे, धनराज शर्मा, आकाश अग्रवाल, ऋषिकेश शर्मा, अनुप वर्हाडे, मनिषा बाबरे, राहुल कांदलकर, अनिमेश कथे, धनश्री व्यास, अंकित पवार, श्रीकृष्ण बोचे, माया गवई, ठाकरे, भूषण कांदलकर, हिवराले, काशिनाथ पांढरे, किर्ती राठी, राहुल दुधे, रितेश राठी, पद्माकर वर्हाडे, संजय पांडे व गेडाम आदि नागरिकों ने बताया कि, वे अब तक कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों सहित रेल अधिकारियों से इस अजिबोगरीब और पूरी तरह गलत बने हुए रेलवे अंडरपास के बारे में बात कर चुके है. लेकिन कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस समस्या की ओर ध्यान देने के लिए तैयार ही नहीं है तथा मनमाने ढंग से इस निरुपयोगी व असुविधापूर्ण रेलवे अंडरपास को चांगापुर परिसरवासियों के सिर पर थोप दिया गया है. जिसकी वजह से इस परिसर में रहनेवाले नागरिकों सहित यहां पर चांगापुर नरेश के दर्शन हेतु आनेवाले भाविक-श्रद्धालुओं को चांगापुर फाटे से चांगापुर मंदिर की ओर आने-जाने में काफी समस्या व दिक्कतों का सामना करना पड रहा है. ऐसे में अब परिसरवासियों द्वारा इस रेलवे अंडरपास के खिलाफ पूरजोर तरीके से आवाज उठाने की तैयारी की जा रही है. जिसके तहत बहुत जल्द इस परिसर में रेल रोको आंदोलन भी किया जा सकता है.
* तेजी से विकसित हो रहा चांगापुर परिसर
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, अमरावती शहर से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित चांगापुर परिसर मनपा क्षेत्र से बाहर कुंड सर्जापुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित है. परंतु शहर से इस क्षेत्र की नजदिकी को देखते हुह इस परिसर में बडी तेजी के साथ लेआऊट बन रहे है. साथ ही साथ रिहायशी बस्तियों का भी विकास हो रहा है. विगत कुछ वर्षों के दौरान लगभग सुनसान पडे चांगापुर मंदिर के आसपास देखते ही देखते कई कॉलोनिया विकसित हो गई है. जिसके चलते चांगापुर फाटे से चांगापुर मंदिर की ओर जानेवाली सडक पर नागरिकों एवं वाहनों की आवाजाही में अच्छा-खासा इजाफा हो गया है. साथ ही साथ प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को इस परिसर में चांगापुर नरेश के दर्शनों हेतु भाविक-श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड उमडती है और इस परिसर में दुपहिया व चारपहिया वाहनों की जबरदस्त आवाजाही भी रहती है. जिसके चलते इस परिसर में चाय-नाश्ते की दुकानों सहित डेली निड्स की दुकाने भी स्थापित होने लगी है.
* 2 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव पर होगी काफी दिक्कते
बता दें कि, प्रतिवर्ष ही हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर चांगापुर नरेश हनुमान मंदिर में 5 से 7 लाख भाविक श्रद्धालुओं की भीड महाबलि हनुमान के दर्शनों हेतु उमडती है तथा इस पूरे परिसर में दुपहिया व चारपहिया वाहनों की जबरदस्त आवाजाही होती है. लेकिन अब इन सभी भाविक श्रद्धालुओं को इस परिसर में हनुमान जन्मोत्सव पर आने के लिए काफी समस्याओं एवं दिक्कतों का सामना करना पडेगा. क्योंकि चांगापुर फाटे से चांगापुर मंदिर के बीच रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे अंडरपास बनाया गया है. जिसका निर्माण पूरी तरह से गलत हुआ है. ऐसे में अदूरदृष्टि व नियोजनशून्यता के साथ बनाए गए इस रेलवे अंडरपास में जबरदस्त ट्रैफिक जाम होने और सडक हादसे घटित होने की भी पूरी संभावना रहेगी.
* 5 मीटर का रास्ता किस नियम से सही
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, सरकार एवं प्रशासन द्वारा किसी समतल जमीन पर लेआऊट को मंजूरी देते समय कम से कम 7.5 मीटर की चौडाई वाले सर्विस लेन यानि अंतर्गत रास्ते के लिए जगह छोडने का नियम बनाया गया है. परंतु चांगापुर रेलवे अंडरपास के लिए 6-6 मीटर वाले दो पल्ले के साथ दोनों पल्लों को जोडने हेतु मात्र 5 मीटर का भूमिगत जोड रास्ता बनाया गया है. इतना छोटा रास्ता एक बार के लिए वनवे के हिसाब से भी ठीक कहा जा सकता है. परंतु चांगापुर रेलवे अंडरपास में दो तरफा यातायात के लिए महज 5 मीटर की चौडाई वाला जोड रास्ता बनाया गया है. जिसकी कुल लंबाई 12 मीटर है. ऐसे में यदि 7-8 मीटर की लंबाई वाली कोई यात्री बस या मालवाहक वाहन यहां से गुजरना भी चाहे, तो नहीं गुजर सकते. साथ ही साथ एक समय पर दोनों ओर से वाहनों की जबरदस्त आवाजाही होने पर इस रेलवे अंडरपास के भीतर घुमावदार रास्ते पर ट्रैफिक जाम होने या फिर वाहनों के बीच आमने-सामने की भिडंत होने की भी पूरी संभावना रहेगी. ऐसे में सवाल उपस्थित होता है कि, आखिर किस सोच के तहत और किस तरह का नियोजन करते हुए इस अजिबोगरीब रेलवे अंडरपास का निर्माण किया गया है.

* हनुमान जन्मोत्सव से पहले ध्यान दे रेल प्रशासन, अन्यथा परिणाम गंभीर
– स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने दी चेतावनी
चांगापुर रेलवे अंडरपास की वजह से चांगापुर परिसरवासियों को हो रही समस्याओं से अवगत होते ही मनपा के स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने इसे लेकर अपनी संतप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, चांगापुर परिसर में बेहद पुरातन व जागृत हनुमान मंदिर है. जहां पर प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हजारों भाविक श्रद्धालु चांगापुर नरेश के दर्शन हेतु पहुंचते है. साथ ही हनुमान जन्मोत्सव पर यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड उमडती है. ऐसे में रेलवे प्रशासन ने इस परिसर में रेलवे अंडरपास का निर्माण करते समय इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए था. साथ ही स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने इस बात को लेकर भी चिंता जताई कि, आगामी 2 अप्रैल को ही हनुमान जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाना है और उस दिन चांगापुर में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहने के साथ ही हजारों वाहनों की आवाजाही भी रहेगी. ऐसे में रेलवे अंडरपास की वजह से कानून व व्यवस्था के लिए दिक्कत पैदा हो सकती है, इस बात को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन ने हनुमान जन्मोत्सव के पहले कोई समुचित व्यवस्था करनी चाहिए अन्यथा वे स्वयं इस विषय को लेकर जिले के सांसद बलवंत वानखडे तथा राज्यसभा सदस्य डॉ. अनिल बोंडे से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात करते हुए उन्हें इस समस्या के बारे में लिखित ज्ञापन देंगे. साथ ही साथ जरुरत पडने पर चांगापुर परिसरवासियों के पक्ष में खडे रहकर जनआंदोलन में भी शामिल होंगे.





