किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं थी अशोक खरात की गिरफ्तारी

चोरी की घटना का माहौल बनाकर खरात के घर में घुसी थी पुलिस

* गुप्त योजना के तहत चला ऑपरेशन, 15 मिनट में पकडा गया था खरात
* नाशिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने मिशन की सुनाई पूरी कहानी
नाशिक/दि. 28 – तंत्र-मंत्र और ज्योतिष्य के नाम पर कई महिलाओं के साथ यौन शोषण करनेवाले बहुचर्चित अशोक खरात मामले में पुलिस ने जिस तरह से कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया, उसका पूरा घटनाक्रम अपने-आप में किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. नाशिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय और रणनीतिक तरीके से अंजाम दी गई. पुलिस को पहले से ही आरोपी के खिलाफ गंभीर शिकायतों की जानकारी थी. उसके प्रभाव और संपर्कों को देखते हुए पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया. इस ऑपरेशन की जानकारी केवल चुनिंदा अधिकारियों तक ही सीमित थी, ताकि किसी भी तरह की लीक से बचा जा सके.
नाशिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के मुताबिक अशोक खरात के घर पर सीधे छापा मारने के बजाय पुलिस ने एक अलग रणनीति अपनाई. जिसके तहत इलाके में चोरी की घटना का माहौल बनाकर पुलिस टीम आरोपी के घर पहुंची. जांच के बहाने घर में प्रवेश किया गया, जिससे किसी को शक न हो. घर में प्रवेश के बाद पुलिस ने तलाशी शुरू की और महज 15 मिनट के भीतर अशोक खरात को एक कमरे में छिपा हुआ पाया गया. टीम ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और पूरी कार्रवाई बिना किसी विरोध के पूरी कर ली.
पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार यह पूरा ऑपरेशन बेहद तेजी और सटीकता से किया गया. रात 11:59 बजे तक कार्रवाई पूरी कर आरोपी को थाने लाया गया. इस दौरान आरोपी को भागने या बचने का कोई मौका नहीं मिला. सीपी कर्णिक ने बताया कि यदि इस ऑपरेशन की भनक पहले लग जाती, तो आरोपी फरार हो सकता था या कानूनी बचाव के रास्ते अपना सकता था. इसलिए इसे पूरी तरह सप्राइज ऑपरेशन की तरह अंजाम दिया गया.
* राजनीतिक एंगल पर सतर्कता, किसी को बेवजह नहीं बनाया जाएगा आरोपी
पुलिस के अनुसार शुरुआती शिकायत में किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम नहीं था. हालांकि बाद में कुछ बातें सामने आई हैं, जिनकी जांच जारी है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. ज्ञात रहे कि, खरात पर महिलाओं के शोषण, धोखाधड़ी और अंधविश्वास के नाम पर अपराध करने जैसे गंभीर आरोप हैं. मामले की जांच उच्च स्तर पर जारी है और पुलिस हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है.
पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह सबूतों के आधार पर होगी और किसी को भी बिना आधार के आरोपी नहीं बनाया जाएगा. पुलिस आयुक्त ने कहा कि कई नेताओं की अशोक खरात के साथ तस्वीरें सामने आई हैं, लेकिन केवल फोटो होने से किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने यह भी दोहराया कि जैसा कि देवेंद्र फडणवीस ने कहा है, जांच में तथ्य और सबूत सबसे महत्वपूर्ण हैं, न कि सिर्फ सार्वजनिक संपर्क या तस्वीरें. संदीप कर्णिक ने साफ कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी नेता या व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो एसआईटी बिना किसी दबाव के कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं और गृह विभाग व पुलिस नेतृत्व की भी यही स्पष्ट निर्देश हैं कि दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा.
* वीडियो सामने आने का भी खुलासा
पुलिस आयुक्त ने यह भी बताया कि मामले में वायरल वीडियो पुलिस ने जारी नहीं किए हैं. ये वीडियो आरोपी के ऑफिस से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड किए गए थे. उस व्यक्ति को कथित तौर पर धमकियां दी गई थीं. अपनी सुरक्षा के लिए उसने वीडियो अलग-अलग जगह सुरक्षित रखे. बाद में इन्हीं स्रोतों से वीडियो बाहर आए. पुलिस ने स्पष्ट किया कि उसने खुद कोई वीडियो सार्वजनिक नहीं किया है.
कुल मिलाकर अशोक खरात मामला अब केवल आपराधिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बनता जा रहा है. हालांकि पुलिस ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस सबूत किसी भी नेता पर कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन जांच में यदि कोई कड़ी सामने आती है तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.

* अशोक खरात का चौंकाने वाला दुबई कनेक्शन
– हवाला के जरिए विदेश भेजा जा रहा था काला धन
स्वयंघोषित ‘कॅप्टन’ और कथित भोंदू बाबा अशोक खरात के खिलाफ जांच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती नजर आ रही है. विशेष जांच दल की पड़ताल में सामने आया है कि खरात कथित रूप से हवाला नेटवर्क के जरिए काला धन विदेश, खासकर दुबई तक भेज रहा था.
जांच सूत्रों के अनुसार, भारत से दुबई और फिर वहां से भारत में बड़े पैमाने पर पैसों की आवाजाही हो रही थी. इसके लिए अवैध चैनल और निजी एजेंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था. एसआईटी को मिले शुरुआती सबूत इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित अवैध नेटवर्क को चलाने में कुछ प्रभावशाली ‘भक्तों’, बड़े राजनीतिक संपर्कों और कुछ भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ था. इसी वजह से यह पूरा तंत्र लंबे समय तक बिना रोक-टोक चलता रहा.
एसआईटी के हाथ डायरी, डिजिटल डेटा और बैंक लेन-देन से जुड़े अहम दस्तावेज लगे हैं. इनसे संकेत मिलता है कि मामला केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध का रूप ले चुका है. इसमें विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन की भी आशंका जताई जा रही है.
* अब ईडी की एंट्री संभव
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी की एंट्री भी संभावित मानी जा रही है. यदि वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो मनी लॉन्ड्रिंग के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है.
* शिकायतों की बाढ़, महिलाओं की संख्या अधिक
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद एसआईटी हेल्पलाइन पर शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी है. अब तक 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो चुकी है. जिसमें से करीब 70 फीसद शिकायतकर्ता महिलाएं है. हालांकि, कई पीड़ित सामाजिक बदनामी और डर के कारण लिखित शिकायत देने से हिचक रहे हैं. ऐसे में जांच अधिकारी अब शिकायतकर्ताओं से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दे रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग सामने आकर बयान दे सकें और मजबूत साक्ष्य जुटाए जा सकें.


कोकाटे को मंत्रीपद नहीं देने खरात ने डाला था तटकरे पर दबाव
– शरद पवार गुट के प्रवक्ता लवांडे ने किया सनसनीखेज दावा
कथित भोंदू बाबा अशोक खरात मामले में अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. इस प्रकरण में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े कई नेताओं पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है. शरद पवार गुट वाली राकांपा के प्रवक्ता विकास लवांडे ने आरोप लगाया है कि अशोक खरात ने सुनील तटकरे पर दबाव बनाया था कि माणिकराव कोकाटे को मंत्रिपद न दिया जाए. लवांडे ने कहा कि इस पूरे मामले पर तटकरे को खुलकर सफाई देनी चाहिए. लवांडे ने यह भी आरोप लगाया कि रुपाली चाकणकर और सुनील तटकरे का अशोक खरात से संपर्क था. उन्होंने मांग की कि इन दोनों को मामले में सह-आरोपी बनाया जाए. इस बीच, खरात प्रकरण के चलते रुपाली चाकणकर को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है.
बताया जा रहा है कि सिन्नर क्षेत्र के विधायक माणिकराव कोकाटे अशोक खरात का विरोध करते थे. इसी वजह से आरोप लगाया गया है कि खरात ने उनके खिलाफ राजनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई.
* अंनिस का भी गंभीर आरोप
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) ने भी इस मामले में एक स्थानीय जनप्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि वह नेता खरात के संपर्क में था. चुनाव के दौरान कथित रूप से अंधविश्वास और जादूटोना जैसी गतिविधियों का सहारा लिया गया. अंनिस ने पूरे मामले की जांच की मांग की है. अंनिस के अनुसार, अशोक खरात 1999 से ही कुछ राजनीतिक नेताओं के संपर्क में था और चुनावी अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है.


‘वे’ 40 विधायक कौन?
* सेना सांसद संजय राउत ने दागा सवाल
इसी बीच बहुचर्चित भोंदू बाबा अशोक खरात मामले में तेज हो चुकी सियासत को और भी अधिक गरम करते हुए शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता और सांसद संजय राउत ने चौंकाने वाले सवाल उठाते हुए दावा किया है कि खरात के संपर्क में 40 विधायक थे और उनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए. सांसद संजय राउत के मुताबिक यह दावा खुद दीपक केसरकर ने किया है कि कई विधायक खरात के संपर्क में थे. राउत ने मांग की कि उन 40 विधायकों की पहचान उजागर की जाए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके.
इसके अलावा सांसद राउत ने यह भी सवाल उठाया कि अशोक खरात दिल्ली जाकर किन लोगों से मुलाकात करता था. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस जांच में यह सामने आया है, तो इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए. राउत ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि खरात के लिए विमान की व्यवस्था किसने की. उनके अनुसार, यह संभव नहीं है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई व्यक्ति इतनी सुविधाएं हासिल कर सके. राउत ने आरोप लगाया कि अशोक खरात को सत्ता में बैठे कुछ लोगों का संरक्षण प्राप्त था. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उसे संरक्षण दिया, वे आज भी सत्ता में मौजूद हैं और इस पर देवेंद्र फडणवीस को जवाब देना चाहिए.
सेना सांसद संजय राउत ने पूरे मामले में पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष को भी विश्वास में लेना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर सभी दलों की बैठक बुलाकर सच्चाई सामने लाई जाए.

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