रोजंदारी कर्मचारी से लेकर कुओं की सफाई, स्ट्रीट लाइट तक सभी में भारी भ्रष्टाचार के आरोप

पूर्व आयुक्त आष्टीकर सभी के निशाने पर

* जांच हेतु समिति की घोषणा, सदस्यों ने कहा-सीधे आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज कराये केस
* इंगोले, शेखावत, अग्रवाल, चिमोटे, हिवसे, ढोके, गावंडे, देशपांडे चर्चा में सहभागी
* सदन में सुनाया गया नगरसेवक से तत्कालीन कमिश्नर की बातचीत का ऑडियो
अमरावती /दि.30- महापालिका की बजट आमसभा में प्रशासक राज दौरान हुए कई बडे खर्चो को लेकर सदस्यों ने न केवल सवाल उपस्थित किये, बल्कि पूर्व कमिश्नर प्रवीण आष्टीकर की कार्यशैली को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप किये. कुछ सदस्यों ने जांच करवाने की मांग रखी तो भ्रष्टाचार की सीधे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत करने की मांग भी सदन में उठाई गई. नेता सदन चेतन गावंडे ने सदस्यों की भावनाओं और अनेक विषयों पर रखे गये मुद्दों के आधार पर जांच समिति गठित करने की तैयारी और घोषणा की. तत्कालीन कमिश्नर आष्टीकर के प्रशासक के रुप में कार्यकाल दौरान रोजंदारी कर्मचारी से लेकर स्ट्रीट लाइट, कुआ सफाई और अनेक विषयों में नाहक खर्च बताकर घपला किये जाने का आरोप किया गया. कोणार्क को सफाई ठेका दिये जाने के निर्णय की भी समीक्षा की मांग की गई.
* दैनंदिन सफाई कामगार का पूरा फंड हडपा?
कांग्रेस के बबलू शेखावत ने मनपा के प्रशासक काल दौरान दैनंदीन सफाई कामगार के नाम से फंड मंजूर किया गया. किंतु कोई खर्च प्रत्यक्ष रुप से नहीं होने का दावा कर सवालों की बौछार कर दी तो स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय जाधव निरुत्तर हो गये थे. उसी प्रकार विपक्ष के नेता विलास इंगोले ने भी इस विषय पर आक्रमक होते हुए जांच समिति गठित करने की मांग कर डाली. नेता सदन चेतन गावंडे ने मान्य किया कि, कुछ हेड पर खर्च बताया गया. प्रत्यक्ष में खर्च न होकर सीधे गडप किये जाने की शिकायतें हैं. ऐसे में जांच समिति बनेगी. उसकी रिपोर्ट के आधार पर एक्शन होगा. धीरज हिवसे ने तुरंत कहा कि, यह भ्रष्टाचार का बडा गंभीर मामला है. इसकी तो सीधे पुलिस के आर्थिक अपराध विभाग में शिकायत की जा सकती है. करनी चाहिए.
* कुओं की कथित मरम्मत, सफाई
विलास इंगोले, मिलिंद चिमोटे, धीरज हिवसे और अन्य सदस्यों ने मनपा के प्रशासक काल दौरान कुओं की सफाई, मरम्मत के विषय में भी करोडों रुपए डकारे जाने का आरोप किया. विशेषकर यह कार्यकाल भी तत्कालीन कमिश्नर प्रशांत आष्टीकर का रहने का दावा कर कहा गया कि, कही किसी कुएं की सफाई या मरम्मत नहीं हुई, केवल पैसा निकाला गया. धीरज हिवसे ने मुद्दा उठाया कि, मनपा ने 2 करोड का मल्टीयूटीलिटी वाहन खरीद रखा था. फिर उसी के उपयोग से कुओं की भी गाद निकालने सहित सफाई और काम हो सकते थे. सुमति ढोके ने भी चर्चा में भाग लेते हुए आरोप किया कि, प्रशासक दौर में हुए कई निर्णय की जांच होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि, 10 लाख के खर्च प्रावधान को बढाकर 25 लाख किया गया और आरोप किया कि, पूरा निधी गडप किया गया.
* कैसा था कामकाज, सदन में ऑडियो क्लीप
अनिल अग्रवाल ने सदन में तत्कालीन कमिश्नर और नगरसेवक के बीच हुई बातचीत का ऑडियो माइक से सभी को सुनाकर प्रवीण आष्टीकर के कार्यकाल का कच्चा चिट्ठा सदन में रख दिया. उन्होंने यह भी कहा कि, स्वच्छता को लेकर हुई विशेष सभा में कई निर्णय किये गये थे. निगरानी समिति स्थापित हुई. अब तक उसकी एक भी बैठक नहीं हुई है. अनिल अग्रवाल ने आमसभा के निर्णयों के क्रियान्वयन पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि, पब्लिक में नगरसेवकों की छवि पर असर हो रहा है. ‘सेटींग’ हो जाने के आरोप खुल्लमखुल्ला लगाये जा रहे हैं. अत: आमसभा में कार्रवाई के निर्णय क्रियान्वित होने चाहिए.
* कोणार्क के ठेके पर 4 को विशेष सभा
नेता सदन चेतन गावंडे ने कहा कि, आमसभा की कार्यवाही के सभी प्रोसेडिंक्स लेकर अधिकारियों को सदन में बुलाया जाएंगा. पिछली सभा के सभी विषय के क्रियान्वयन पर जोर रहेगा. भ्रष्टाचार के भयंकर आरोप हो रहे हैं. दलगत भावना से परे होकर इस विषय पर चर्चा और निर्णय की अपेक्षा उन्होंने व्यक्त की. चेतन गावंडे ने सफाई ठेके को कोणार्क इन्फ्रा को देने संबंधी निर्णय की भी आगामी 4 अप्रैल की विशेष सभा में चर्चा कराने की घोषणा कर दी. यह सभा दोपहर 2 बजे शुरु होगा. जिसमें पिछली सभा के प्रोसेडिंक्स लेकर अफसरान तलब किये गये है. इस सभा में करारनामें में बदलाव और अन्य विषयों पर चर्चा किये जाने का दावा गावंडे ने किया. उल्लेखनीय है कि, एड. प्रशांत देशपांडे और अन्य सदस्यों ने प्रशासक काल में हुए सफाई ठेके सहित अनेक निर्णयों की दोबारा समीक्षा की मांग रखी थी.
* स्ट्रीट लाइट बंद पडी है, लाखों फूंके गये
मिलिंद चिमोटे ने सदन का ध्यान राजकमल चौक से लेकर कैम्प रोड के सडकों पर डिवाइडर पर लगाई गई लाइट और स्ट्रीट लाइट के विषय में भ्रष्टाचार का आरोप किया. उन्होंने कहा कि, सारी स्ट्रीट लाइट 15 दिनों में ही टैं बोल गई. जबकि लाखों रुपए का खर्च तत्कालीन आयुक्त और प्रशासक ने कर डाला था. उन्होंने अनाप-शनाप और मनमाने तरीके से खर्च तथा बिल निकालने का आरोप किया. सभी के निशाने पर पुन: तत्कालीन कमिश्नर आष्टीकर रहे.
* कैसे आता आयोग का फंड
प्रशासक राज मेें वित्त आयोग का फंड नहीं आने का प्रावधान रहने पर भी तत्कालीन आयुक्त, प्रशासक के दौर में 2023-24 में फंड आने का दावा कर नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने सवाल उठाये. उन्होंने आरोप किया कि, कुछ ठेकेदार मंत्रालय गये. काम बताकर निधि मंजूर करवाई गई. इसमें भी काफी घोटाले हुए हैं. कमिशन देने वाले ठेकेदारों को काम दिये गये. परभारे बिल जारी किये गये. ऐसे लगभग 36 करोड की निधि खर्च किये जाने का आरोप आमसभा में किया गया. वहीं मिलिंद चिमोटे ने कहा कि, स्थायी समिति द्वारा बिल पास किये जाने का प्रावधान रहने के बावजूद परस्पर बिल पास किये गये. ऐसे में चेतन गावंडे ने घोषणा कर दी कि, स्थायी समिति की अनुमति और स्वीकृति के बिना अब कोई भी बिल का भुगतान नहीं होगा. समाचार लिखे जाने तक सदन में गर्मागर्म चर्चा शुरु थी. फाइबर टायलेट, अस्पीरेशनल टायलेट, हाईड्रोलिक ऑटो रिक्शा और अन्य विषयों पर तत्कालीन आयुक्त के निर्णयों पर सदस्यों ने उंगली उठायी.

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