एससी-एसटी अत्याचार में मौत पर वारिस को सरकारी नौकरी

महाराष्ट्र सरकार की नई नीति लागू, जीआर जारी

मुंबई/दि.30 – महाराष्ट्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अत्याचार के मामलों में पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला लिया है. अब ऐसे मामलों में मृतक के एक पात्र वारिस को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान लागू कर दिया गया है. इस संबंध में राज्य सरकार ने विस्तृत कार्यप्रणाली (जीआर) जारी कर दी है. इस निर्णय को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है.
सरकार के अनुसार एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत दर्ज हत्या या अत्याचार से हुई मृत्यु के मामलों में मृतक के परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी. एफआईआर दर्ज होने के 90 दिनों के भीतर या आरोपपत्र दाखिल होने के बाद (जो पहले हो), नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि, अदालत में मामले का अंतिम निर्णय चाहे किसी भी पक्ष में आए दी गई नौकरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
* किन पदों पर होगी नियुक्ति
गट ‘क’ और गट ‘ड’ श्रेणी के सरकारी/अर्ध-सरकारी पद, महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के दायरे से बाहर के पद व आयोग के अंतर्गत केवल लिपिक वर्गीय पद.
कौन होगा पात्र वारिस
पात्रता का क्रम इस प्रकार रहेगा, पत्नी या पति, पुत्र या पुत्री, विधिवत दत्तक संतान. यदि उपरोक्त उपलब्ध न हों, तो बहू अथवा विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा बेटी व बहन. अविवाहित स्थिति में भाई या बहन.
* अन्य महत्वपूर्ण शर्तें
निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा लागू होगी. परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति आवश्यक रहेगी. साथ ही पालन-पोषण का प्रतिज्ञापत्र देना होगा. इस योजना पर सामान्य भर्ती प्रतिबंध और आरक्षण सीमा लागू नहीं होगी.
* सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि इस नीति से अत्याचार पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहारा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा. कुल मिलाकर, यह फैसला सामाजिक न्याय को मजबूत करने और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में महाराष्ट्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है.

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