तीन माह का बकाया मानधन मिलने सेे अंगणवाडी सेविकाओं को मिली राहत
‘स्पर्श’ प्रणाली से पैदा हुई थी दिक्कत

अमरावती/दि.2– अंगणवाडी सेविकाओं को 13 हजार रुपए व अंगणवाडी सहायिकाओं को 7 हजार 500 रुपए का मासिक मानधन मिलता है. जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी क्रमश: 4 हजार 500 रुपए व 3 हजार 500 रुपए रहती है. वहीं शेष रकम राज्य सरकार द्वारा अदा की जाती है. राज्य सरकार की ओर से अदा की जानेवाली रकम का भुगतान तो नियमित होता है, परंतु राज्य के डेढ लाख अंगणवाडी कर्मियों को विगत तीन माह से केंद्र सरकार के हिस्सेवाली रकम का भुगतान नहीं हुआ था. जिसके चलते अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड रहा था. ऐसे में ही कुछ दिन पूर्व केंद्र सरकार द्वारा निधि उपलब्ध कराने के साथ ही बचत खातों में जमा कराए जाने के चलते अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं को काफी बडी राहत मिली है.
जानकारी के मुताबिक करीब डेढ से दो लाख अंगणवाडी सेविकाओं का लगभग आधा मानधन विगत तीन माह से केंद्र सरकार के पास प्रलंबित था. साथ ही अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं के मानधन को लेकर कुछ अन्य समस्या भी थी. अंगणवाडी सेविकाओं को 13 हजार रुपए व सहायिकाओं को 7 हजार 500 रुपए का प्रतिमाह मानधन मिलता है. राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा दिया जानेवाला यह मानधन महिला व एकात्मिक बाल विकास आयुक्त कार्यालय के जरिए सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में जमा होता है. परंतु विगत तीन माह से अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं के मानधन हेतु केंद्र सरकार द्वारा निधि उपलब्ध नहीं कराई गई थी और अब निधि के उपलब्ध होते ही मानधन की रकम को संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा कराना शुरु किया गया है.
ज्ञात रहे कि, अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं को मिलनेवाले मानधन में राज्य सरकार की हिस्सेदारी केवल 40 फीसद है और शेष रकम केंद्र सरकार की ओर से प्राप्त होती है. ऐसे में विगत तीन माह से केंद्र सरकार द्वारा अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं के मानधन हेतु अपना हिस्सा अदा नहीं किए जाने के चलते अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड रहा था. उल्लेखनीय यह भी है कि, लगातार बढती महंगाई और सिर पर बढते काम के बोझ की तुलना में मिलनेवाला मानधन पहले ही काफी अत्यल्प कहा जा सकता है और इसमें भी तीन-तीन माह तक मानधन का भुगतान प्रलंबित रहने के चलते अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं को काफी आर्थिक दिक्कते होती है. जिसके परिणामस्वरुप अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं द्वारा समय-समय पर अपने बकाया भुगतान सहित अपनी विभिन्न प्रलंबित मांगों को लेकर आंदोलन की राह पकडी जाती है.
* पहले ही काम का बोझ और उसमें भी मानधन नहीं
अंगणवाडी सेविकाओं को 6 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों सहित गर्भवती व नवप्रसूता महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य संरक्षण का काम करना होता है. साथ ही पूर्व प्राथमिक शिक्षा, पोषाहार, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच व कुपोषण कम करने हेतु काम करनेवाले महकमों की सहायता करनी पडती है. पहले ही भरपूर काम रहने के बावजूद मानधन भी समय पर नहीं मिलता और इन सभी कामों की ऐवज में मिलनेवाला मानधन भी बेहद अत्यल्प होता है. जिसके चलते मानधन वृद्धि सहित नियमित मानधन मिलने की मांग अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं द्वारा की जा रही है.
‘स्पर्श’ प्रणाली के चलते कई तकनीकी दिक्कते पैदा हुई थी. हालांकि अब पिछले कुछ दिनों से मानधन जमा होने की शुरुआत हो गई है. विगत 8 दिनों के दौरान सभी अंगणवाडी सेविकाओं व सहायिकाओं के बचत खाते में रकम जमा हुई है.
– महेश जाधव
अध्यक्ष, अंगणवाडी-बालवाडी कर्मचारी युनियन (आयटक)
* 2592 अंगणवाडी केंद्र
जिले में 2 हजार 592 अंगणवाडी केंद्र है. जिनमें 2 हजार 579 अंगणवाडी सेविकाएं एवं 2 हजार 557 सहायिकाएं कार्यरत है. एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना अंतर्गत कार्यरत इन महिलाओं द्वारा पूर्व प्राथमिक शिक्षा एवं पोषाहार का काम किया जाता है.





