जिले में डिजिटल जनगणना का पहला चरण शुरु
फिलहाल चल रहा प्रशिक्षण का सत्र

* 16 मई से 14 जून के दौरान प्रगणक करेंगे घरों की गणना
अमरावती/दि.2– जिले में 16 वीं जनगणना का काम जारी अप्रैल माह से शुरु हो रहा है. जिसके तहत 6 से 11 अप्रैल के दौरान ‘फिल्ड ट्रेनर’ का प्रशिक्षण सत्र शुरु होगा. जिसके बाद प्रगणकों का तहसीलनिहाय प्रशिक्षण होगा. इस जनगणना हेतु करीब 4 हजार के आसपास प्रगणक काम पर लगाए जाएंगे. जिसके चलते सरकारी व अर्धसरकारी कर्मचारियों की सूची तैयार करने का काम तहसील स्तर पर कराया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि, पहली बार जनगणना की प्रक्रिया डिजिटल स्वरुप में होनेवाली है तथा नागरिकों के लिए पहली बार ‘स्व-गणना’ का पर्याय उपलब्ध कराया गया है. ऐसे में जिन लोगों के पास इंटरनेट व स्मार्ट फोन है, वे नागरिक पोर्टल अथवा मोबाइल एप के जरिए अपनी खुद की जानकारी को घर बैठे भर सकते है और जिनके लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा, उनके घरों पर प्रगणकों द्वारा भेंट देकर जानकारी को संकलित किया जाएगा.
इस संदर्भ में दी गई जानकारी के मुताबिक जनगणना के पहले चरण हेतु मुख्य तौर पर घर एवं परिवार से संबंधित 33 प्रश्नों की सूची तैयार की गई है. जिसमें घर की छत (कच्चा या पक्का मकान), घर की मालकी, निवास योग्य कमरे, विवाहित जोडों की संख्या, पानी एवं विद्युत आपूर्ति, शौचालय व मल-जल निकासी, रसोई घर, रसोई हेतु इंधन व्यवस्था, रेडिओ, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, टेलिफोन, मोबाइल फोन एवं वाहन संख्या जैसे प्रश्नों का समावेश रहेगा.
* फरवरी 2027 में दूसरा चरण
जनगणना के पहले चरण के तहत प्रगणकों द्वारा घरों की गणना करते हुए घरों की सूची तैयार करने के बाद फरवरी 2027 में प्रत्यक्ष जनसंख्या की गिनती की जाएगी. जिसमें जाति, शिक्षा, स्थलांतर व आर्थिक स्थिति पर आधारित जानकारी को प्रगणकों द्वारा संकलित किया जाएगा. आगे चलकर जनगणना के यही आंकडे देश में नीति निर्माण हेतु काफी महत्वपूर्ण साबित होगी.
* 16 वर्षों के बाद हो रही जनगणना
उल्लेखनीय है कि, प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पश्चात देशभर में जनगणना की जाती है. परंतु वर्ष 2021 के दौरान कोविड संक्रमण की लहर रहने के चलते नियोजित समय-सारणी के अनुरुप जनगणना नहीं हो पाई थी और अब करीब 16 वर्षों के अंतराल पश्चात जनगणना काम शुरु किया जा रहा है. ज्ञात रहे कि, देश में पहली जनगणना सन 1872 में हुई थी. जिसके बाद सन 1881 में पूरे देश में एक ही समय पर जनगणना की गई थी. तब से लेकर सन 2011 तक प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना का काम अखंड तरीके से किया गया. वहीं इसके बाद कोविड संक्रमण के चलते 16 वर्ष के अंतराल पश्चात जनगणना की जा रही है.
* 16 मई से होगा पहला चरण शुरु
राज्य में जनगणना का पहला चरण 16 मई से 14 जून के दौरान पूरा किया जाएगा. 1 मई से 15 मई के दौरान नागरिक खुद होकर अपना ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे. वहीं पहले चरण के दौरान प्रगणक के तौर पर नियुक्त सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर प्रत्येक घर की गिनती पूरी करेंगे. इसके तहत जनगणना का पूरा डेटा गोपनीय स्वरुप में रखा जाएगा.
* शिक्षकों की गर्मियों की छुट्टीयां पडी खतरे में
– छुट्टीयों के दौरान करना होगा जनगणना का काम
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि, राज्य की शालाओं में 2 मई से 14 जून तक ग्रीष्मावकाश के तहत गर्मी की छुट्टीयां रहेंगी, परंतु इन छुट्टीयों के दौरान ही 16 मई से 14 जून तक जिला परिषद, मनपा व नगर पालिका की शालाओं सहित निजी अनुदानित शालाओं के शिक्षकों को सरकारी आदेशानुसार जनगणना का काम करना पडेगा. जिसके चलते शिक्षकों द्वारा गर्मी की छुट्टीयों को लेकर किया गया नियोजन पूरी तरह से धरा का धरा रह जाएगा. ज्ञात रहे कि, इससे पहले भी शिक्षकों की छुट्टीयां लगातार दो साल तक चुनाव संबंधी कामों की भेंट चढ गई. वहीं इस बार उन्हें अपनी छुट्टीयों के समय जनगणना का काम करना है.
ज्ञात रहे कि, अशैक्षणिक कामों के चलते शिक्षकों के मुख्य काम पर असर पडता है. वहीं अब तेज धूप व भीषण गर्मी वाले इस मौसम के दौरान शिक्षकों को घर-घर घुमकर घरों की गिनती का काम करना पडेगा. जिसे लेकर शिक्षकों में अभी से ही काफी हद तक नाराजगी देखी जा रही है. क्योंकि शिक्षकों को गर्मी के मौसम दौरान ही पूरे सालभर में केवल एक बार लंबी छुट्टीयां मिलती है. जिसमें अधिकांश शिक्षकों द्वारा घूमने-फिरने अथवा अपने रिश्तेदारों के यहां जाने का नियोजन किया जाता है. लेकिन विगत दो वर्षों से ऐसी छुट्टीयों के समय ही चुनाव एवं मतदाता सूची से संबंधित काम शिक्षकों को करने पडे थे. वहीं अब उन्हें इस वर्ष की गर्मियों की छुट्टीयों के दौरान जनगणना संबंधी काम करने होंगे. इसके चलते उनकी गर्मी की छुट्टीयों का नियोजन पूरी तरह से गडबडा गया है. हालांकि सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि, जनगणना का काम करनेवाले शिक्षकोंको उतने ही दिनों का विशेष अवकाश भी दिया जाएगा. लेकिन इसकी वजह से भी आगामी शैक्षणिक सत्र के कामकाज पर परिणाम पड सकता है.





