सिंधी समुदाय को भाषाई अल्पसंख्यक दर्जे के प्रभावी अमल की मांग

मनपा के पूर्व पार्षद भूषण बनसोड ने मुख्यमंत्री फडणवीस को भेजा पत्र

अमरावती/दि.2– महाराष्ट्र में सिंधी समुदाय को ‘भाषाई अल्पसंख्यक’ दर्जा देने संबंधी सरकारी निर्णय (जीआर) के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही खामियों को दूर करने की मांग उठाई गई है. इस संबंध में अमरावती मनपा के शहर सुधार समिति के पूर्व सभापति भूषण बाजीरावजी बनसोड़ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को निवेदन भेजकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है.
निवेदन में कहा गया है कि सिंधी समुदाय का राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. संविधान की आठवीं अनुसूची में सिंधी भाषा को स्थान मिलने के बावजूद, महाराष्ट्र में इस समुदाय को भाषाई अल्पसंख्यक के रूप में मिलने वाले लाभों को प्राप्त करने में तकनीकी अड़चनें आ रही हैं.पत्र में उल्लेख किया गया है कि सरकार द्वारा जारी मौजूदा जीआर अपूर्ण है, जिसमें कई तकनीकी पहलू स्पष्ट नहीं हैं. इसके कारण समुदाय के नागरिकों और शैक्षणिक संस्थानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. साथ ही, स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग स्तर पर भी निर्णय का प्रभावी अमल नहीं हो रहा है और अनावश्यक दस्तावेजों की मांग के कारण अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है.
निवेदन में यह भी मांग की गई है कि सिंधी समाज द्वारा संचालित स्कूलों और कॉलेजों को लाभ देने के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ शुरू किया जाए, जिससे प्रशासनिक देरी कम हो सके. इसके अलावा, छात्रवृत्ति और ऋण जैसी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर विशेष अभियान चलाने की भी मांग की गई है. भूषण बनसोड ने सरकार से अपील की है कि इस निर्णय को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे प्रभावी रूप से लागू कर सिंधी समाज को न्याय दिलाया जाए.

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