जैन आचार्य पीयूष सागर सूरीश्वरजी, सम्यक रत्न सागर सूरीश्वर पधारे अमरावती

श्रावकों ने गाजे-बाजे से की अगवानी

* भाजी बाजार बडा मंदिर में विश्राम कर रायपुर हेतु रवाना हुए
अमरावती /दि.6- खरतरगच्छ सहस्त्राब्दी महामहोत्सव के प्रेरक अजमेर दादावाडी जीर्णोद्धारक, मृदु भाषी, सौम्य मूर्ति, पूज्य आचार्य श्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वर एवं नूतन आचार्य श्री जिन सम्यक रत्न सागर सूरीश्वर जी का रविवार प्रात: बडनेरा से अंबानगरी शुभागमन हुआ तो यहां के श्रावक-श्राविकाओं ने बडे उत्साह से जयकार करते हुए अगवानी की. गाजे-बाजे से जैन आचार्यों को भाजी बाजार स्थित बडा जैन श्वेतांबर मंदिर में विश्राम हेतु ले गये.
शोभायात्रा श्याम चौक स्थित जेएनडी मॉल से निकाली गई. आचार्य भगवंत का यह विहार श्याम चौक से बापट, सरोज, जवाहर गेट, सक्करसाथ, सराफा, बर्तन बाजार होते हुए भाजी बाजार रोड के जैन श्वेतांबर मंदिर पहुंचा. उनके आगमन उपलक्ष्य मार्ग को फूलों और रंगोली से सजाया गया था. अनेक स्थानों पर जैन आचार्यों के आदर पूर्वक स्वागत के होर्डिंग लगाये गये थे. जैन ध्वजा भी लहराई गई.
बडा मंदिर में नूतन आचार्य श्री जिन सम्यक रत्न सागर सूरिश्वरजी के प्रवचन हुए. आपने कहा कि, जीवन में गुरु का महत्व अनन्य होता है. गुरुकृपा से ही ईश्वर दर्शन का लाभ मिलता है. गुरु के बगैर कोई भी कार्य सुसंपन्न नहीं हो सकता. अत: सदैव गुरुवंदना की जानी चाहिए. जीवन में आने वाली दिक्कतों को गुरु दूर कर देते हैं अथवा इतनी शक्ति अवश्य देते है कि, आप प्रत्येक कठिनाई का दृढता से मुकाबला करें. सागर के रुप में निरंतर गुरु भक्ति में लीन होने का आवाहन भी नूतन आचार्य ने किया. आपने जैन धर्म की महान परंपराओं के विषय में भी बतलाया. बडी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं इस समय उपस्थित रहे. उनमें सुगनचंद बोथरा, नगीनचंद बुच्चा, कोमल बोथरा, भरतप्रकाश खजांची, राजेंद्र बुच्चा, सुशील गोलछा, एड. विजय बोथरा, जसवंत राज लुनिया, जीतेंद्र गोलछा, नवीन चोरडिया, प्रवीण चोरडिया, राजेश चोरडिया, अजय बुच्चा, मनीष सकलेचा, परेश शाह, सिद्धार्थ बोथरा, सीए श्रेणिक बोथरा, विकास लुनिया, अंकित लुनिया, हरीश गांधी, शीतल कोठारी, शीतल भंसाली, अजय भंसाली, सुदर्शन भंसाली, सौरभ गोलछा, हेमंत बोथरा, महावीर चोपडा, विजय बुच्चा, हर्ष चोपडा, पर्व गोलछा, प्रथम भंसाली, श्रेयांश बुच्चा, परेश बुच्चा, किरण सामरा, हरीश खिवसरा, महेंद्र भंसाली, आशीष कोठारी, धू्रव बोकरिया, राकेश दरडा, कवरीलाल ओसवाल, रमेश गोलछा, लता बोथरा, अनीता चोरडिया, सुशीला खजांची, ममता कर्णावत, मीता बुच्चा, ममता चोरडिया, संगीता चोरडिया, मंजू बोथरा, गरिमा बोथरा, उज्वला बोथरा, रुपा भंसाली, नीतू गोलछा, सरला गोलछा, छाया शाह, नीकीता बुच्चा, संगीता बुच्चा, रश्मी लुनिया, विमला लुनिया, सरोज गोलछा, सरला लुनिया आदि अनेक की उपस्थिति रही.
जैन श्वेतांबर बडा मंदिर और दादावाडी संस्थान ने आचार्य श्री का स्वागत रखा था. बडा मंदिर में विश्राम उपरान्त पूज्य जैन आचार्य ने रायपुर के लिए प्रस्थान किया. आपका अगला पडाव नांदगांव पेठ रहा. आचार्य भगवंत ने नांदगांव पेठ स्थित कोमल बोथरा के फार्म हाउस पर विश्राम किया. उपरान्त वे रायपुर हेतु रवाना हुए. आचार्य भगवंत रोज 30 किमी का उग्र विहार करते हैं. जहां भी जैन धर्मावलंबियों ने आचार्य श्री के स्वागत कर विश्राम का प्रबंध किया.
दादावाडी संस्थान द्वारा आचार्य श्री का अभिनंदन और कामली बहराकर वंदन किया गया. सकल जैन समाज द्वारा पूज्य जैन आचार्यो का गुणगान किया गया. आसपास के नगरों-गांवों नागपुर, धामणगांव,परतवाडा, बडनेरा, शिराला से भी सैकडों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहें. अमरावती विश्राम दौरान आचार्य भगवंत ने जैन कोकिला विचक्षण श्री जी अस्पताल को भेंट देकर वहां की गतिविधियों और उपक्रमों की जानकारी ली. उन्हें बडा भला लगा. उन्होंने सेवाकार्यों को सराहा.

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