जमाते इस्लामी हिंद का ईद मिलन रहा बेहद शानदार

‘भारतीय धर्मग्रंथ व मानवीय मूल्य’ विषय पर हुई विचार संगोष्ठी

अमरावती /दि.6 – जमात ए इस्लामी हिंद, अमरावती की ओर से शनिवार को ईद मिलन कार्यक्रम बड़े उत्साह एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया. कार्यक्रम का विषय भारतीय धर्मग्रंथों में मानवीय मूल्यों की शिक्षा रखा गया था. कार्यक्रम का आयोजन वहदत नगर स्थित मस्जिद तौहीद में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष नागरिक उपस्थित रहे. कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र कुरआन के पाठ से हुई.
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए जमाते इस्लामी हिंद की अमरावती शाखा के अध्यक्ष हाफिज अब्दुल कादिर ने कहा कि ईद की खुशियां हम सभी देशवासियों के साथ साझा करना चाहते हैं. मानवता के आधार पर सभी वर्गों से प्रेम करना ही हमारी मूल भावना है और यही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है. इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रुप में साईं राजेशजी कंवर (कंवर धाम) ने कहा कि अमरावती में इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने संत कंवर राम जी को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उन्होंने सदैव फूट डालो और राज करो की मानसिकता का विरोध किया.
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि रहनेवाले अमरावती विद्यापीठ के सेवानिवृत्त मराठी विभाग प्रमुख मनोज तायडे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ सदाचार है. उन्होंने अपने बचपन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनका पहला मित्र अब्दुल था, जिसने उन्हें साइकिल चलाना सिखाया. वहीं प्रभात एज्युकेशन सोसायटी के अध्यक्ष वी. डी. पवार ने कहा कि मानवता ही सच्चा धर्म है और यही सभी धर्मग्रंथों का सार है. अंधश्रद्धा से बाहर निकलकर सत्य धर्म का पालन करना आज की आवश्यकता है. इस अवसर पर गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी भाई मुकेश सिंह ने कहा कि उत्तम धर्म परमात्मा की भक्ति है. कोई भी धर्म बुराई नहीं सिखाता, बल्कि बुराई उन लोगों में होती है जो धर्म का पालन नहीं करते. उन्होंने माता-पिता के सम्मान को सर्वोच्च बताया. साथ ही बौद्ध विहार के भंते बुद्धप्रिय ने कहा कि शांति की स्थापना का एकमात्र मार्ग प्रेम है और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए समाज में सक्रिय होना आवश्यक है. इसके अलावा शिक्षण अधिकारी डॉ. एच. बी. मंकेश्वर ने कहा कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना और सभी आयोजकों को इस कार्यक्रम के लिए बधाई दी.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रा. सैय्यद सलमान ने अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा कि ईद मिलन रमज़ान के बाद रोजे पूर्ण होने पर मनाया जाता है. रोजा मनुष्य को संयम, अनुशासन और मानवता का व्यवहार सिखाता है. उन्होंने बताया कि रमज़ान वह महीना है, जिसमें कुरआन अवतरित हुआ, जो संपूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में समानता का विशेष महत्व है-मस्जिद में पहले आने वाले व्यक्ति को आगे स्थान मिलता है, चाहे वह गरीब हो या अमीर. माता-पिता का सम्मान इस्लाम में सर्वोच्च माना गया है. उन्होंने महिलाओं के सम्मान और कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डाला.
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित अतिथियों को शीर खुरमा वितरित किया गया. कार्यक्रम में संचालन अज़मत उल्लाह साहब तथा आभार प्रदर्शन खालिद जमील ने किया.

 

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