कमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में चार हजार पार
आधे होटल अब लकडी पर

* तीन-चार दिनों में एक सिलेंडर की सप्लाई
* होटल के मेनू कम, कीमतें बढी
* 50 प्रतिशत स्टॉल बंद
* व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति सुचारु करने की मांग
अमरावती/दि.7- खाडी युद्ध की वजह से जिले में लागू एलपीजी गैस सिलेंडर राशनिंग के कारण होटल व्यवसाय इंधन की कमी से कठिन दौर से गुजर रहा है. व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई होटल और रेस्तरां को देने में कडी राशनिंग के कारण पहले ही लकडी भट्टियों का उपयोग शुरु किया गया है. वहीं अमरावती शहर के सैकडों स्टॉल बंद करने पडे हैं. इतना ही नहीं तो इधर होटल्स के मेनू प्रभावित हुए हैं. कई पकवान, व्यंजन मेनू से हटा लिये गये. उसी प्रकार प्रचलित व्यंजनों के रेट 20 प्रतिशत तक बढा दिये जाने की जानकारी है. होटल संचालकों ने जल्द से जल्द कमर्शियल सिलेंडर की पूर्ववत सप्लाई शुरु करने की मांग रखी है. उधर डीएसओ से चर्चा की तो शासन से इस संबंध में अतिशीघ्र आदेश तीनों प्रमुख गैस कंपनियों को आने की उम्मीद उन्होंने व्यक्त की. अभी एक या दो सिलेंडर सप्ताह में दिये जा रहे हैं. बता दें कि, एक माह से अधिक समय हो गया है. कमर्शियल सिलेंडर का रेट बढाने के बावजूद होटल संचालकों को नहीं दिया जा रहा. ऐसे में गैर सरकारी कंपनियों के कमर्शियल सिलेंडर के ब्लैक मार्केट के मामले बढ गये है. 4 हजार या उससे अधिक के रेट पर सिलेंडर की कालाबाजारी की जा रही है.
* अधिकारियों को नहीं दिखती
अमरावती में पखवाडे भर से अवैध गैस सिलेंडर संबंधी कोई कार्रवाई नहीं की गई. जबकि आपूर्ति विभाग का दावा था कि, 14 टीमें इस काम पर लगाई गई है. सरकार ने गैस सिलेंडर के घरेलू उपयोग हेतु उपलब्ध रहने के उद्देश्य से राशनिंग शुरु की थी. एस्मा कानून भी लागू किया गया था. व्यावसायिक सिलेंडर के रेट दोबार में 400 से अधिक रुपए प्रति नग बढाये गये हैं. अब सिलेंडर का दाम 2235 रुपए हो गया है. किंतु अमरावती में 4 हजार-साढे 4 हजार में कमर्शियल सिलेंडर खरीदने के लिए होटल व्यवसायी मजबूर है. किंतु अमरावती में धडल्ले से कमर्शियल सिलेंडर का ब्लैक होने के बाद भी अधिकारियों को वह दिखाई नहीं पडता. एक भी एक्शन नहीं लिया गया है. जबकि डीएसओ कहते हैं कि, हमारे अधिकारी काम पर लगे हुए हैं. जहां से शिकायत आयी है. तुरंत पहुंचते हैं.
* आम लोगों की जेब पर असर
इन दिनों आउटींग का टे्ंरड रहता है. विशेषकर रविवार को सहपरिवार आउटींग सभी करते हैं. ऐसे में होटल संचालक इंधन के बढते दाम के कारण जहां एक ओर मेनू सीमित करने लगे. वहीं कई प्रचलित व्यंजनों के दाम 20 से 30 प्रतिशत बढा दिये गये हैं. 120 रुपए की दालफ्राय अब 160 रुपए में ली जा रही है. इसके कारण लोगों को जेब ढीली करनी पड रही. यहीं हाल नाश्ता, अल्पोहार को लेकर है. रेस्टारेंट में जाने पर पहले जहां ढेर सारे आप्शन रहते थे. अब सीमित नाश्ते तैयार रहते हैं. उस पर भी रेट की मार पडी है. 30-40 रुपए प्लेट कचोरी, समोसा, सांभारवडी, पालकवडा हो गया है. महंगाई के कारण लोग बाहर खाने से बच रहे हैं.
* लकडी और कोयले का सहारा
बडे होटल में लकडी भट्टी पर्यायी इंधन के रुप में अपनाई गई है. कुछ जगह इंडक्शन लगाये गये हैं. वहीं लकडी और कोयले का उपयोग भोजन, व्यंजन, नाश्ता बनाने के लिए किये जाने की जानकारी होटल व रेस्तरां एसो. के पदाधिकारी ने दी. उन्होंने बताया कि, महीनाभर बीत गया है. अभी ओर कितना समय खाडी युद्ध चलेगा, उसका नतीजा भुगतना पडेगा, कह नहीं सकते. हमारे व्यवसाय पर काफी बुरा परिणाम होने की बात पदाधिकारी ने कही.
* अध्यक्ष सलूजा का कहना
होटल संचालक एसो. के अध्यक्ष रवींद्र सिंह सलूजा उर्फ बिट्टू सलूजा का कहना रहा कि, सिलेंडर की सप्लाई तीन-चार दिनों में एक बार शुरु हुई है. सिलेंडर की कमी के कारण लकडी और इंडक्शन पर काम चलाना पड रहा हैं. सरकार को सिलेंडर सप्लाई बढानी चाहिए. हजारों लोगों का रोजगार होटल, ढाबा, रेस्तरां पर निर्भर हैं. कई छोटे व्यवसायी अपना धंधा बंद करने की कगार पर है. उनके लिए खर्च निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है.





