बीएससी स्नातकों को न दिया जाए होलसेल मेडिकल स्टोर का लाइसेंस

आईपीए के रोहित गुप्ता व रणरागिणी फाउंडेशन की भारती मोहोकार ने विरोध किया दर्ज

अमरावती/दि.7- केंद्र सरकार के अधीन ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की विगत दिनों बैठक में लिए गए एक अहम फैसले के बाद अब बीएससी ग्रेजुएट को भी होलसेल मेडिकल स्टोर का लाइसेंस देने का रास्ता साफ हो गया है. इस निर्णय का देशभर में विरोध शुरू हो गया है. जिसके तहत इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (आईपीए) के रोहित गुप्ता तथा रणरागिणी फाउंडेशन की भारती मोहोकार द्वारा इस फैसले का जबरदस्त विरोध करते हुए कहा गया है कि, इस फैसले के चलते पहले ही बेरोजगारी का सामना कर रहे फार्मासिस्टों के समक्ष रोजगार को लेकर और भी अधिक दिक्कते पैदा होंगी.
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया गया कि, केंद्र सरकार के अधीन ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल 1945 के नियम 64 में संशोधन पर सहमति दी गई, जिसके तहत अब होलसेल दवा लाइसेंस के लिए शैक्षणिक योग्यता में बदलाव किया गया है. इसके अनुसार बीएससी डिग्रीधारी भी लाइसेंस के पात्र होंगे. इस फैसले का इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कड़ा विरोध किया जा रहा है तथा एसोसिएशन ने इसे अव्यवहारिक और खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे दवा वितरण प्रणाली की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा.
आईपीए के रोहित गुप्ता व रणरागिणी फाउंडेशन की भारती मोहोकार का कहना है कि पहले से ही रिटेल ड्रग लाइसेंस के लिए पंजीकृत फार्मासिस्ट अनिवार्य हैं, जिसे ड्रग रूल 1945 के नियम 65(2) में परिभाषित किया गया है. ऐसे में होलसेल लाइसेंस में भी केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट को ही अनिवार्य किया जाना चाहिए. वर्तमान में कई स्थानों पर अपात्र लोगों द्वारा फर्जी अनुभव के आधार पर दवा व्यवसाय संचालित किया जा रहा है, जिससे मरीजों की सुरक्षा को खतरा है. उन्होंने आशंका जताई कि इस नए नियम से यह समस्या और बढ़ सकती है.
आईपीए के रोहित गुप्ता व रणरागिणी फाउंडेशन की भारती मोहोकार ने औषधि महानियंत्रक को पत्र लिखकर नियम 64 में बीएससी योग्यता को हटाने और केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट को ही लाइसेंस के लिए पात्र बनाने की मांग की है. इसके साथ ही अमरावती शहर व जिले सहित समूचे विदर्भ क्षेत्र एवं महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में इस निर्णय के विरोध में अभियान भी शुरू कर दिया गया है.

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