ठेकेदार का लाइसेंस रद्द कर अपराध दर्ज करें

तुषार पडोले सहित गांववासियों की मांग

नांदगांव पेठ/दि.8 – रहाटगांव में मुख्य सडक के घटिया और अव्यवस्थित निर्माण के कारण नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड रहा है. लगातार हो रहे हादसों, बीमारियों और मौत की घटनाओं को लेकर संबंधित ठेकेदार का लाइसेंस रद्द कर उसके खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग तुषार पडोले व ग्रामवासियों द्बारा की गई है.
रहाटगांव बस्ती की मुख्य सडक के कांक्रीटीकरण के लिए 9 अगस्त 2024 को विधायक सुलभा खोडके और विधान परिषद सदस्य संजय खोडके की उपस्थिति में भूमिपूजन किया गया था. लेकिन 20 महीने बीत जाने के बाद भी सडक का काम अधूरा है. जिससे नागरिकों को समस्याओं का सामना करना पड रहा है. सडक के दोनों ओर नालियों का घटिया निर्माण कार्य होने से गंदे पानी की निकासी बाधित हो गई है. साथ ही सडक निर्माण में आवश्यक पत्थर- मुरूम के बजाय लाल मिट्टी का उपयोग किए जाने से सडक खतरनाक बन गई है. जिससे बार- बार यातायात बाधित हो रहा है और नागरिकों को परेशानी हो रही है.
इस लापरवाही के गंभीर परिणाम भी सामने आए है. नाली निर्माण के दौरान लोहे की रॉड लगने से स्थानीय निवासी लोहांडे गंभीर रूप से घायल हो गये, उनके इलाज में करीब 12 लाख रूपए खर्च हुए. वही सडक की धूल के कारण पूर्व सरपंच दादासाहेब पडोले को श्वसन संबंधी परेशानी हुई और उनकी मौत हो गई, ऐसा आरोप ग्रामवासियों ने लगाया है. 18 फरवरी 2026 को सडक निर्माण में लगे वाहन की चपेट में आने से एक वृध्द की मौत होने की जानकारी सामने आयी है. इसके अलावा समाजसेवक अरूण रामेकर को भी गर्दन की सर्जरी करानी पडी.
हाल ही में बारिश के कारण सडक पर डाली गई मिट्टी से कई मोटर साइकिल चालक फिसलकर गिर चुके है. खासकर महिलाएं, छात्राएं और बुजुर्ग भी प्रभावित हो रहे है. इन सभी घटनाओं के मद्देनजर ग्रामवासियों ने संबंधित ठेकेदार, पर्यवेक्षक और अभियंताओं की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इससे नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया है. पीडितों को चिकित्सा खर्च की भरपाई और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के साथ- साथ सडक का काम तत्काल पूरा करने की मांग की गई है. अन्यथा ठेेकेदार का लाइसेंस रद्द कर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (ए), 336, 337 और 338 के तहत मामला दर्ज करने की मांग रहाटगांव सेवा समिति के तुषार पडोले व ग्रामवासियों ने लोक निर्माण विभाग और पुलिस प्रशासन को सौंपे गये निवेदन के माध्यम से की है.

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