अस्पताल खोलने की परमिशन की एक खिडकी रहें
नये आयएमए अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे की मांग

* गांवों में प्रत्येक माह स्वास्थ्य शिविर जारी रहेंगे
* गंभीर बीमारियोें से बचाव की जागरूकता भी करेगा असोसिएशन
अमरावती/ दि.10 – अस्पताल खोलकर गरीब मरीजों की सेवा का मानस चिकित्सकों का होता है. अत: डॉक्टर्स को अस्पताल के लिए सभी प्रकार की अनुमति और एनओसी हेतु शासन को एकमात्र विंडो रखनी चाहिए. आयएमए की ओर से राज्य स्तर पर इस बारे में कोशिश होगी ही. अमरावती आयएमए अध्यक्ष के तौर पर हम सभी मिलकर प्रयास करेंगे. यह बात इंडियन मेडिकल असो. के नये अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे ने कही. वे अध्यक्ष पद सूत्र ग्रहण करने उपरांत अमरावती मंडल से खास चर्चा कर रहे थे. उन्होंने इस बातचीत में दावा किया कि आयएमए द्बारा गांवों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की दृष्टि से कैम्प लगाए जाते हैं. यह उपक्रम जारी रहेगा. उसी प्रकार गंभीर बीमारियों को लेकर जनजागृति कार्यक्रम अधिक संख्या में लिए जायेंगे.
काफी मापदंड, एक खिडकी से सुविधा
डॉ. दिनेश वाघाडे ने बताया कि नया अस्पताल खोलने के लिए कई कडे मापदंड सरकार ने रखे हैं. निश्चित ही लोगों के प्राणों की रक्षा से जुडा विषय है. मापदंड कडे, बंधनकारक होने ही चाहिए. किंतु फायर एनओसी सहित विभिन्न विभागों की एनओसी एकत्र करनी पडती है. यहां- वहां जाकर अनुमति लानी पडती है. काफी कागजी काम होता है. सभी डॉक्युमेंट्स को सेंट्रलाइज किया जाना चाहिए. डॉक्टर्स को उसमें एतराज नहीं. किंतु शासन में अनेक विभागों में एक खिडकी योजना लागू की है. ऐसे में नया अस्पताल खोलने के वास्ते भी एक ही विंडो रहने से सुविधा होगी. अत: आयएमए के लेबल पर इसके लिए अमरावती और राज्यस्तर पर प्रयत्न होंगे. डॉ. वाघाडे ने विश्वास जताया कि शासन इस प्रकार की व्यवस्था करेगा.
चिकित्सक पर कोई कैसे हाथ उठा सकता है
आयएमए अध्यक्ष डॉ. वाघाडे ने सवाल उठाया कि डॉक्टर्स पर कोई कैसे हाथ उठा सकता है ? उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स के विरूध्द हो रही हिंसा से ही डॉक्टर का अपने ड्यूटी के प्रति ध्यान भंग होता है. वे सरकार से मांग करेंगे कि इस प्रकार की चिकित्सक विरोधी हिंसा से कडाई से निपटा जाए. कडे एक्शन लिए जाए. आरोपियों पर तत्पर और कडी कार्रवाई होनी चाहिए. आयएमए की यह डिमांड पुरानी है. किंतु अमरावती मेें ऐसे किसी इंसीडेंट की दशा में वे अध्यक्ष के रूप में निश्चित ही कडा रूख अपनायेंगे. डॉ. वाघाडे ने मान्य किया कि कहीं कुछ चूक हो जाती है. किंतु यह भी पूरी तरह सच है कि कोई भी चिकित्सक अपने किसी रूग्ण की जान जाए, ऐसा विचार भी नहीं करता. अपनी ओर से वह रूग्ण को बचाने की पूरे प्रयत्न और कोशिश करता है.
आओ गांव चलें
डॉ. दिनेश वाघाडे ने बताया कि आईएमए का एक अभियान ‘आओ गांव चलें ’ हैं. इसे अमरावती में भी चलाया जा रहा है. इसके अंतर्गत जनवरी में नांदगांव पेठ, फरवरी में पाला और मार्च में भानखेडा के वृध्दाश्रम में स्वास्थ्य शिविर आयएमए ने लिए. विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांवों मेें जाकर ग्रामीणों का चेकअप किया. उचित परामर्श दिया. लगभग 300 लोगों का चेकअप और उपचार किया. अप्रैल माह का शिविर शीघ्र लिया जायेगा. कुछ देहातों से बातचीत चल रही है. शीघ्र तय हो जायेगा. उन्होंने दावा किया कि देहातों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा से रूग्णों में भी आत्मविश्वास बढा है. आयएमए अपनी यह गतिविधियों जारी रखेगा.
जागरूकता के कार्यक्रम
बढती गंभीर बीमारियां और उनकी चपेट में आते लोगों की बढती तादाद को देखते हुए आइएमए ने जनजागृति के कार्यक्रम बढाने की सोची है. अनेक सामाजिक संस्थाओं, संगठनों से विचार विमर्श शुरू है. आनेवाले दिनों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित होंगे. अध्यक्ष दिनेश वाघाडे ने कहा कि लोगों से अधिकाधिक संख्या में इन आयोजनों में सहभागी होने की उनकी अपील रहेगी. जितने अधिक लोग जागरूक होंगे. उतने अधिक वे अपने करीबियों को बतायेंगे. वे निश्चित ही बीमारियों से बचाव होगा. बचाव ही सबसे बडा उपचार होता है.
मिक्स पैथी नहीं रहनी चाहिए
डॉ. दिनेश वाघाडे ने कहा कि अलग- अलग पैथी के अनेकानेक चिकित्सक है. अब तो गांवों में भी एमबीबीएस और एमडी डॉक्टर्स उपलब्ध है. ऐसे में उनका वहीं स्टैंड है जो आईएमए का है. मिक्स पैथी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में भी अब काफी भर्ती डॉक्टर्स की हो गई है. काफी संख्या में बडी सर्जरी और ऑपरेशन, चिकित्सा हो रही है. उपकरण बढ रहे हैं. डॉ. वाघाडे ने दृढ मत व्यक्त किया कि मिक्स पैथी नहीं होनी चाहिए. आयुर्वेदिक के चिकित्सक आयुर्वेद में उपचार करें. होमियोपैथी के होमियोपैथ में. उन्होंने बताया कि अमरावती आयएमए शाखा में लगभग 1150 सदस्य पंजीकृत है. मुख्य कार्यकारिणी 31 सदस्यीय है. समिति, उप समिति मिलाकर 57 सदस्यीय कार्यकारिणी है.
पत्नी मेघा वाघाडे गृहिणी, दो पुत्र
डॉ. दिनेश वाघाडे के पिता मारोतीराव वाघाडे कृषि विभाग के सेवा निवृत्त अधिकारी है. माता जी छाया वाघाडे गृहिणी है. डॉ. दिनेश की पत्नी मेघा वाघाडे भी सुघड गृहिणी है. उनके दो पुत्र नीलय और मयंक है. नीलय ने कक्षा 12 वीं की परीक्षा देने के साथ नीट की तैयारी प्रारंभ की है. मयंक कक्षा 9 वीं के छात्र हैं.





