पुण्य तिथि पर विशेष लेख

हुजनों के कैवारी : शिक्षा महर्षि डॉ. पंजाबराव उपाख्य भाऊसाहेब देशमुख                                                                                अगर विदर्भ के एक छोटे से गांव पापल में किसान परिवार में जन्मे डॉ. भाऊसाहेब देशमुख का जन्म न हुआ होता, तो विदर्भ के गरीब छात्रों की पढ़ाई-लिखाई की हालत क्या होती? यह सोचने वाली बात है. आज लाखों छात्र भाऊसाहेब पंजाबराव देशमुख द्वारा स्थापित श्री शिवाजी शिक्षण संस्था के तहत अलग-अलग शिक्षा संस्थानों में पढ़कर अपना जीवन बना रहे है. अगर भाऊसाहेब न होते, तो आज भी ग्रामीण इलाकों के गरीब छात्रों को शिक्षा नहीं मिल पाती. आज ही के दिन, 10 अप्रैल, 1965 को भाऊसाहेब का निधन हो गया, जिससे पूरा देश दुख के सागर में डूब गया. भाऊसाहेब का जीवन छोटा हो गया और शिक्षा की व्यवस्था करने वाले बहुजन समाज के नेता का निधन हो गया. किसानों और बहुजन लोगों से बेहद प्यार.करने वाले महान व्यक्ति आज ही के दिन गुज़र गए. भले ही भाऊसाहेब आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने बहुजन समाज के गरीब छात्रों और किसानों के लिए जो काम किए, उनके ज़रिए वे आज भी हमारे साथ हैं. अपने काम और विचारों के रूप में वे आज भी हमारे साथ हैं. डॉ. भाऊसाहेब देशमुख के पास हायर एजुकेशन की कीमती डिग्रियां थीं. भाऊसाहेब ने कुछ समय तक वकालत भी की.उन्होंने कई गरीब लोगों को मुफ़्त न्याय दिलाया. उनकी वकालत ज़ोरों पर चल रही थी, लेकिन गरीब बहुजन समाज के छात्रों की शिक्षा की उनकी चाहत ने उन्हें शांत नहीं बैठने दिया. इसी चाहत से उन्होंने 1 जुलाई 1932 को श्री शिवाजी शिक्षण संस्था की स्थापना की और शिवाजी शिक्षण संस्था के रूप में विदर्भ में ज्ञान की नदी बह निकली। श्री शिवाजी शिक्षण संस्था नाम का यह छोटा सा पौधा शुरुआत में ही स्थापित हो गया, कुछ ही समय में इस पौधे ने बरगद का पेड़ बन गया। डॉ. भाऊसाहेब देशमुख की बनाई इस श्री शिवाजी शिक्षण संस्था ने पूरे विदर्भ में अपनी पहचान बनाई. भाऊसाहेब की काबिलियत से गरीब स्टूडेंट्स को पढ़ाई करने का मौका मिला. भाऊसाहेब की काबिलियत ने ज़मीनी स्तर के अनगिनत स्टूडेंट्स की ज़िंदगी में एक नई सुबह लाई. आज श्री शिवाजी शिक्षण संस्था के ज़रिए किंडरगार्टन से लेकर एमबीबीएस तक की सारी पढ़ाई संस्था के अलग-अलग स्कूल और कॉलेजों में दी जाती है. आज विदर्भ के गांवों के लाखों स्टूडेंट्स भाऊसाहेब की संस्था से पढ़ाई कर रहे हैं. भाऊसाहेब ने स़िर्फ पढ़ाई का काम ही नहीं किया, बल्कि पढ़ाई के काम के साथ-साथ उन्होंने किसानों के लिए जो काम किया, वह भी बहुत कीमती है. किसानों के लिए लड़ते हुए भाऊसाहेब ने भारत कृषक संगठन बनाकर किसानों के लिए बहुत बड़ा काम किया. आज भाऊसाहेब के स्मृति दिवस पर, मैं भाऊसाहेब की पवित्र याद को विनम्रता से नमन करता हूं.
– राजेश एच मुंगसे
सहायक अध्यापक शिवाजी हायर सेकेंडरी स्कूल मोर्शी.

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