अमरावती में बनेगा सुरेश भट स्मारक व गजल गुरुकुल
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की घोषणा

* गजल नवाज भीमराव पांचाले के अमृत महोत्सवी जन्मदिवस पर व्यक्त किया संकल्प
अमरावती/दि.11– अमरावती को ग़ज़ल का समृद्ध विरासत प्राप्त है. कविवर्य सुरेश भट द्वारा शुरू किया गया यह सफर अब गजल नवाज भीमराव पांचाले द्वारा संजोया गया है. इन महान व्यक्तियों के कार्यों की विरासत आगे बढ़े, इसके लिए सुरेश भट का स्मारक और ग़ज़ल के लिए गुरुकुल स्थापित करने की महत्वपूर्ण घोषणा पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की.
ग़ज़लनवाज़ भीमराव पांचाले के अमृत महोत्सव जन्मदिन के अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एसोसिएशन की ओर से सांस्कृतिक भवन में नागरिक सत्कार समारोह आयोजित किया गया. इस अवसर पर सांसद बलवंत वानखेडे, विधायक संजय खोडके, केवलराम काले, सुलभा खोडके, राजेश वानखडे, प्रविण तायडे, महापौर श्रीचंद तेजवाणी, पूर्व मंत्री प्रविण पोटे, शिवाजी शिक्षा संस्था के कार्यकारी सदस्य हेमंत कालमेघ, जिलाधिकारी आशिष येरेकर, पुलिस आयुक्त राकेश ओला, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश राऊत, गीता पांचाले, भाग्यश्री पांचाले सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे.
इस अवसर पर पालकमंत्री बावनकुले ने कहा कि स्मारक और गुरुकुल के लिए स्थान तथा निधि की व्यवस्था शासन द्वारा की जाएगी. इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए. साथ ही ़उन्होंने गज़ल के लिए जीवन समर्पित करने वाले भीमराव पांचाले से गजल गुरुकुल की जिम्मेदारी स्वीकार करने का आग्रह किया. इससे ग़ज़ल के संरक्षण और संवर्धन में सहायता मिलेगी. जल्द ही इन दोनों का भूमिपूजन करने का भी उनका मानस है और उस अवसर पर भी भीमराव पांचाले का नागरिक सत्कार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ग़ज़ल में जीवन को समृद्ध करने की क्षमता होती है. ग़ज़ल के शब्द और स्वर जीवन को समृद्ध बनाते हैं. पांचाले के कारण मराठी ग़ज़ल को सांस्कृतिक परंपरा में स्थान मिला है. ग़ज़ल जीवन जीने की प्रेरणा देती है, इसलिए आज की युवा पीढ़ी ग़ज़ल की ओर आकर्षित हो रही है. मराठी ग़ज़ल के कारण इस क्षेत्र की पहचान अन्य देशों में भी बनी है. ग़ज़ल के माध्यम से एक संपूर्ण संसार खड़ा होता है, इसलिए इसके संवर्धन के लिए राज्य शासन हमेशा आगे रहेगा, ऐसा आश्वासन उन्होंने दिया.
इस समय गजल नवाज भीमराव पांचाले ने कहा कि अमरावती के कारण उनका जीवन सुगम हुआ. नागरिकों के प्रेम और ग़ज़ल ने उन्हें बड़ा बनाया है. सुरेश भट को आदर्श मानकर शुरू किए गए इस सफर को पचास वर्ष से अधिक समय हो गया है. उन्होंने बताया कि सभी के जीवन में कठिनाइयाँ होती हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन न करते हुए लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने से ही वे इस मुकाम तक पहुँचे हैं.
कार्यक्रम की शुरुआत में भीमराव पांचाले की पुस्तक-तुला कर पालकमंत्री बावनकुले के हाथों उन्हें मानपत्र देकर सम्मानित किया गया. संजय शेंडे ने प्रास्ताविक प्रस्तुत किया तथा क्षिप्रा मानकर ने कार्यक्रम का संचालन किया.





