अमरावती से जुडी है सत्यशोधक आंदोलन की विरासत
महात्मा फुले का अमरावती व करजगांव से रहा गहरा नाता

* करजगांव की मिट्टी से ही सत्यशोधक के विचार का हुआ था बिजारोपण
* सन 1903 से अमरावती जिला ही था सत्यशोधक आंदोलन का मुख्य केंद्र
अमरावती /दि,11– क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिराव फुले द्वारा असमानता व विषमता के खिलाफ फुंका गया क्रांति का बिगुल केवल पुणे अथवा पश्चिम महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इस आंदोलन की बुलंद आवाज अमरावती जिले के वातावरण में भी घूम रही थी तथा वर्ष 1903 से अमरावती जिला ही सत्यशोधक समाज का महत्वपूर्ण केंद्र था. वहीं सतपुडा पर्वत की तलहठी में बसा चांदुर बाजार तहसील का करजगांव इस आंदोलन का ‘पॉवर हाउस’ साबित हुआ था. जिसके चलते कहा जा सकता है कि, क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले का अमरावती जिले से गहरा नाता रहा तथा कहीं न कहीं करजगांव की मिट्टी से ही सत्यशोधक समाज व आंदोलन का विचार अंकुरित हुआ था.
आज 11 अप्रैल को महात्मा फुले के जयंती अवसर पर उनके साथ जुडे ऐतिहासिक ऋणानुबंध की यादों को ताजा करना क्रमप्राप्त भी है. करजगांव वैसे भी एक प्रगतिशील गांव है. जहां पर सन 1900 के आसपास मोतीरामजी वानखडे ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की. जिसके बाद मोतीराम वानखडे सहित कृष्णाजी चौधरी, भगवंतराव कांडलकर जैसे क्रियाशील सदस्यों ने सत्यशोधक विचारों को कुछ इस तरह प्रचार किया कि, सत्यशोधक विचारों से पूरा विदर्भ गुंजायमान हो गया था. सभा, अधिवेशन व प्रबोधन के जरिए इन सभी महानुभावों ने अज्ञान व अंधश्रद्धा के खिलाफ मानों बिगूल ही फुंक दिया था.
* अमरावती अधिवेशन में आने से चूक गए थे महात्मा फुले
27 दिसंबर 1925 को अमरावती स्थित मोहम्मदन हाईस्कूल के मैदान पर सत्यशोधक समाज का भव्य अधिवेशन आयोजित किया गया था. जिसमें खुद महात्मा ज्योतिबा फुले भी उपस्थित रहनेवाले थे. परंतु कुछ अपरिहार्य कारणों के चलते उन्हें नागपुर से ही वापिस लौटना पडा था. लेकिन उनके विचार करजगांव सहित अमरावती जिले के प्रत्येक घर तक पहुंच चुके थे, ऐसी जानकारी दलित मित्र प्रा. श्रीकृष्ण बनसोड द्वारा दी गई.
* वैचारिक ऋणानुबंध आज भी कायम
महात्मा फुले का अमरावती जिले से ऋणानुबंध केवल मेल-मुलाकात तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह वैचारिक ऋणानुबंध था. करजगांव के कार्यकर्ताओं द्वारा शुरु किया गया सत्यशोधक आंदोलन आज भी इस क्षेत्र के सामाजिक सौहार्द का आधार है. किसानों की समस्याओं से लेकर शिक्षा की गंगा के लिए महात्मा फुले द्वारा दिए गए मंत्र आज भी अमरावतीवासियों के लिए प्रेरणादायी साबित होते है.
* ऐसा रहा संघर्ष का सफर
– ऐतिहासिकता – सन 1900 के दौरान करजगांव में सत्यशोधक समाज की स्थापना
– प्रमुख शिलेदार – मोतीराम वानखडे, कृष्णाजी चौधरी व भगवंतराव कांडलकर.
– अमरावती अधिवेशन – 27 दिसंबर 1925.
– विशेष – नागपुर तक आकर भी महात्मा फुले अमरावती नहीं आ पाए थे. लेकिन इसके बावजूद यह वैचारिक आंदोलन जबरदस्त तरीके से आगे बढा.