मुमुक्षु चंदन ने ली जैन भगवती दीक्षा

अब कहलाएंगी साध्वी चंदनप्रभाजी

आर्णी/दि.1– क्षेत्र की मुमुक्षु चंदन ने राजस्थान के लाडनूं में तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के पावन सानिध्य में जैन भगवती दीक्षा ग्रहण कर ली. सांसारिक जीवन का त्याग करने के पश्चात अब वे ‘साध्वी चंदनप्रभाजी’ के नाम से अपने नए आध्यात्मिक सफर की शुरुआत करेगी.
साध्वी चंदनप्रभाजी का संबंध मूल रुप से एक बेहद सुसंस्कृत और संस्कारी परिवार से है. उनके जीवन पर दादा दिवंगत भंवरलालजी छल्लानी और दादी तानाबाई भंवरलालजी छल्लानी के संस्कारों की गहरी छाप है. साथ ही उन्हें अपने पिता अशोक छल्लानी और माता सुनंदा छल्लानी का भरपूर मार्गदर्शन और स्नेह मिला है. जिसका उनके वैराग्य जीवन पर गहरा प्रभाव पडा है.

* दो सगी बहनें बनी साध्वी
इस दीक्षा की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि, साध्वी चंदनप्रभाजी की बडी बहन साध्वी शताब्दीप्रभाजी ने भी आज से ठीक 12 वर्ष पूर्व आचार्यश्री महाश्रमणजी के कर-कमलों से ही दीक्षा ग्रहण की थी. एक ही परिवार की दो सगी बहनों का भौतिक संसार को त्यागकर संयम और आध्यात्म के इस कठिन पथ को अपनाना पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन गया है.

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