अमरावती विधानसभा में एसआईआर मैपिंग डेटा डिलीट होने पर उठे सवाल
स्वतंत्र एसआईटी जांच की पत्रकार परिषद में अलीम पटेल की मांग

अमरावती/दि.25 – अमरावती विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 38 में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मैपिंग डेटा बार-बार डिलीट होने के मामले ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अलीम पटेल ने पत्रकार परिषद आयोजित कर स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग की.
पत्रकार परिषद में अलीम पटेल ने आरोप लगाया कि एसआईआर मैपिंग डेटा तीन अलग-अलग अवसरों पर डिलीट हुआ, जिससे मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया प्रभावित हुई. उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी त्रुटि का मामला नहीं माना जा सकता, क्योंकि डेटा डिलीट होने का असर मुख्य रूप से विधानसभा क्षेत्र के एक ही हिस्से में दिखाई दिया है.
* एक ही क्षेत्र बार-बार क्यों प्रभावित?
अलीम पटेल के अनुसार अमरावती विधानसभा क्षेत्र में कुल 322 मतदान सूची भाग (पार्ट) हैं, जिनमें से लगभग 133 भाग अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में आते हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 105 मतदान सूची भाग डेटा डिलीट होने से प्रभावित हुए. उन्होंने दावा किया कि, लगभग 10 मतदान सूची भागों में 40 से 50 प्रतिशत तक मैपिंग डेटा डिलीट हुआ. लगभग 10 भागों में 15 से 25 प्रतिशत तक डेटा प्रभावित हुआ. लगभग 5 भागों में 5 से 10 प्रतिशत तक डेटा डिलीट होने की जानकारी सामने आई. पटेल ने सवाल उठाया कि यदि यह केवल तकनीकी समस्या थी तो उसका असर पूरे विधानसभा क्षेत्र में समान रूप से दिखाई देना चाहिए था, लेकिन बार-बार एक ही क्षेत्र के प्रभावित होने से संदेह पैदा हो रहा है.
* तीन बार डिलीट हुआ डेटा
पत्रकार परिषद में बताया गया कि, 2 अप्रैल को पहली बार एसआईआर मैपिंग डेटा डिलीट हुआ, 29 अप्रैल को दूसरी बार डेटा प्रभावित हुआ, 22 जून को तीसरी बार दोपहर करीब 12 बजे फिर मैपिंग डेटा डिलीट हो गया. उन्होंने दावा किया कि जिन बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) का मैपिंग प्रतिशत 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच चुका था, वह घटकर 45 से 55 प्रतिशत रह गया.
* बीएलओ और मतदाताओं को नुकसान
अलीम पटेल ने कहा कि बार-बार डेटा डिलीट होने से बीएलओ को एक ही कार्य कई बार दोहराना पड़ा. मतदाताओं को भी बार-बार जानकारी देने के लिए शिविरों में आना पड़ा, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी हुई. उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों के भरोसे और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है.
* एसआईटी जांच की मांग
पत्रकार परिषद के माध्यम से अलीम पटेल ने निम्नलिखित मांगें रखीं. पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए. सर्वर लॉग, ऑडिट ट्रेल, बैकअप, एक्सेस लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं. निर्वाचन प्रशासन द्वारा सार्वजनिक रूप से विस्तृत और लिखित स्पष्टीकरण जारी किया जाए. प्रभावित मतदान सूची भागों की स्वतंत्र तकनीकी और फोरेंसिक जांच कराई जाए. किसी भी प्रकार की लापरवाही, छेड़छाड़ या पक्षपात पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 30 जून से शुरू होने वाली एसआईआर प्रक्रिया से पहले जवाबदेही तय की जाए.
* पारदर्शिता बनाए रखने की अपील
अलीम पटेल ने कहा कि वे किसी पूर्व निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहे हैं, लेकिन एक ही क्षेत्र में तीन बार डेटा डिलीट होने की घटनाओं को सामान्य नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वतंत्र जांच आवश्यक है. उन्होंने कहा, अगर यह तकनीकी गलती है तो इसका असर पूरे क्षेत्र में दिखाई देना चाहिए था, लेकिन जब एक ही क्षेत्र बार-बार प्रभावित हो रहा है तो जनता को जवाब मिलना चाहिए. पत्रकार परिषद के माध्यम से उन्होंने चुनाव प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है. पत्रकार परिषद में डॉ. अलीम पटेल के अलावा किरण गुरडे, एड. शमशेर, रहीम राही, अरशद पठान समेत अन्य लोग उपस्थित थे.





