कर्जमाफी के लिए बाप, अत्याचार के खिलाफ मां, पेपर लीक के विरोध में बच्चे सडक पर उतरने मजबूर

विद्रोही कवि गोविंद पोलाड ने कहा

* शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन
चांदुर रेलवे /दि.17– महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने पहले कर्जमाफी के लिए हमारे बापों को आंदोलन करने पर मजबूर किया. उसके बाद महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ हमारी माताओं को न्याय के लिए सडक पर उतरना पडा. अब पेपर लीक के विरोध में बच्चे सडक पर उतरने मजबूर है. पेपर लीक घोटाले के कारण विद्यार्थियों को भी आंदोलन करना पड रहा है, ऐसा प्रसिद्ध विद्रोही कवि एवं वक्ता गोविंद पोलाड ने कहा.
नीट, सीबीएसई, टीईटी सहित विभिन्न परिक्षाओं में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और विद्यार्थियों के साथ हो रहे अन्याय के विरोध में बुधवार 15 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी एवं विद्यार्थी कृति समिति के संयुक्त तत्वावधान में तहसील कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण आंदोलन किया गया. इस अवसर पर वे मुख्य प्रवक्ता के तौर पर बोल रहे थे. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दादा भुसे इस्तीफा दो… इस्तीफा दो…, पेपर लीक बंद करो, विद्यार्थियों को न्याय दो जैसे नारों से पूरा तहसील परिसर गूंज उठा. इस आंदोलन की विशेष बात यह रही कि, शहर में पहली बार इतनी बडी संख्या में युवक-युवतियां शैक्षणिक मुद्दों को लेकर सडकों पर उतरे. विद्रोही ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, पहले पार्टियां तोडी गई, फिर विधायक तोडे गए. उसके बाद सांसद तोडे गए, अब विद्यार्थियों के भविष्य से खिलावाड करते हुए पेपर ही तोडे (लीक) किए जा रहे. यह स्थिति बेहद गंभीर है और विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है.
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि, सरकार के पास बडे-बडे धार्मिक आयोजनों के लिए करोडों रुपए है. लेकिन सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. विद्यार्थियों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि, प्रतियोगिता परिक्षाओं की तैयारी करनेवाले विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करते है. कई छात्र सैकडों किलोमीटर की यात्रा करके परीक्षा केंद्र तक पहुंचते है. आर्थिक तंगी के कारण कई विद्यार्थियों को रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रात गुजारनी पडती है. लेकिन परीक्षा केंद्र पहुंचने से पहले ही पेपर लीक हो जाने की खबर मिल जाती है और उनकी महिनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है.
विद्यार्थियों के सपनों के साथ ऐसा खिलवाड किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उनके आक्रमक भाषण का उपस्थित युवाओं ने तालियों की गडगडाहट से स्वागत किया. आंदोलन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल (सेक्युलर), पूर्व विधायक स्व. डॉ. पांडुरंग ढोले विचार मंच, स्वाभिमानी शेतकरी संगठना तथा शिवसेना उबाठा ने सार्वजनिक समर्थन दिया. आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि, नीट, सीबीएसई, टीईटी सहित सभी प्रतियोगिता परिक्षाओं में कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाए. एमपीएससी सहित सभी परिक्षाएं पारदर्शी और ऑफलाइन पद्धति से आयोजित की जाए, परीक्षा शुल्क किया जाए.
सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारा जाए, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगे, भर्ती एवं प्रतियोगी परिक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए, समय पर परिणाम घोषित किए जाए, पेपर लीक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए तथा संबंधित मंत्री नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करें, छात्रवृत्ति योजनाओं में भेदभाव न हो, पेपर लीक के कारण आत्महत्या करनेवाले विद्यार्थियों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए, भविष्य में पेपर लीक होने पर विद्यार्थियों को मुआवजा दिया जाए, 72 घंटे के भीतर पुन: परीक्षा आयोजित की जाए तथा पुलिस भर्ती 2026 तत्काल घोषित कर आयु सीमा में वृद्धि की जाए.
इस अवसर पर प्रफुल इंगले, प्रतीक्षा ढोके, नितिन गवली, मंगेश डाफ, सागर गावंडे, प्रो. प्रसेनजित तेलंग, सागर दुर्योधन, भूषण नाचवणकर, एड. शिवाजी देशमुख, विनोद जोशी, गणेश होले, नीलकंठ दिघडे, भीमराव बेराड, प्रभाकर भगत, संजय डगवार, बंडू यादव, गजानन यादव, प्रशांत शिरभाते, दिनेश आमले, रवि मलवार, अंकुश घोडे, शीतल मासोदकर, तन्मय पुनसे तथा पंकज घोरफडे सहित विभिन्न संगठनाओं के पदाधिकारी उपस्थित थे. सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों के मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए आंदोलन का समर्थन किया. आंदोलन की प्रस्तावना स्वप्निल डोलस ने रखी तथा संचालन हार्दिक सोनोने ने किया व आभार लौकिक डोंगरे ने माना. आंदोलन को सफल बनाने सागर तंबाखे, मयूर सवाई, आशीष सोनोने, राम जोशी, अनिकेत मोखले, आर्यन मोटघरे, अक्षय स्थुल, जीवन दुर्योधन, अनिकेत हरणे, सुबोध रामटेके, रोहण गजभिये ने अथक प्रयास किए. आंदोलन के पश्चात प्रतिनिधि मंडल ने उपविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा. आंदोलनकारियों ने पुलिस विभाग, पत्रकार बंधुओं तथा आंदोलन में शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त किया.

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