विवाहित बेटी को नहीं कर सकते अनुकंपा से वंचित
हाईकोर्ट का वेकोलि को पुनर्विचार करने के निर्देश

नागपुर/दि.9 – बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि मृत कर्मचारी की विवाहित बेटी को केवल विवाह के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति अदालत ने वेकोली को याचिकाकर्ता के आवेदन पर छह सप्ताह के भीतर पुनर्विचार करने के निर्देश दिया हैं. यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने पूजा खडसे की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया. याचिका के अनुसार चंद्रकुमार वोकोलि में ड्राईवर के पद पर कार्यरत कर्मचारी सुरेश खडसे का सेवा के दौरान निधन हो गया. इसके बाद उनकी बेटी पूजा खडसे ने अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया. वोकोलि प्रशासन ने 17 मार्च 2022 को जारी पत्र के माध्यम से यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि कंपनी के नियमों में विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान नहीं है. इस निर्णय के खिलाफ याचिकाकर्ता मृतक कर्मचारी की पत्नी और विवाहित बेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिकाकर्ताओं की ओर से उनके वकिल ने अदालत को बताया कि यह मुद्दा पहले ही हाईकोर्ट द्बारा तय किया जा चुका हैं. उन्होंने 1 मार्च 2023 को दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मृत कर्मचारी की बेटी या विवाहित बहन होने के आधार पर अनुकंपा नियक्ति का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता.





