साइंस्कोर शाला के साहित्य गोदाम को भीषण आग

लाखों का सामान जलकर खाक

* देर रात 2 बजे की घटना, आग को काबू करने लगी अग्निशमन की दो गाडियां
* अथक प्रयासों के बाद दमकल कर्मियों ने आग को किया काबू में
अमरावती/दि.31- अमरावती शहर के मालटेकडी के पास साइंस्कोर मैदान से सटकर स्थित जिला परिषद विश्रामगृह परिसर केे क्वॉर्टर के पास साइंस्कोर शाला के साहित्य गोदाम को शुक्रवार 30 जनवरी की देर रात 2 बजे के दौरान अचानक आग लग गई. देखते ही देखते इस आग ने भीषण रूप धारण कर लिया. इस आग से गोदाम में रखे शाला के बेच, फर्निचर तथा अन्य शैक्षणिक साहित्य जलकर राख हो गया. आग से लाखों रुपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है. आग लगने का कारण पता नहीं चल पाया हैं.
जानकारी के मुताबिक जिला परिषद विश्रामगृह परिसर के क्वॉर्टर के पास साइंस्कोर शाला का साहित्य गोदाम हैं. इस गोदाम में शाला के बेंच, शैक्षणिक साहित्य व लकडे का फर्निचर भारी मात्रा में रखा हुआ हैं. शुक्रवार देर रात 2 बजे के दौरान इस गोदाम को अचानक आग लग गई. रात का समय रहने से इस तरफ किसी का ध्यान नहीं गया. तेज हवाओं के कारण कुछ ही समय में आग ने भीषण रूप धारण कर लिया. आग की बढती लपटों के कारण घटना प्रकाश में आयी और किसी ने इस घटना की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी. पुलिस उपनिरीक्षक उमाले ने तत्काल दमकल विभाग को जानकारी दी और अपने दल के साथ घटनास्थल पहुंच गए. दूसरी तरफ अग्निशमन विभाग का दल जानकारी मिलते ही घटनास्थल पहुंच गया. तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था. एक के बाद एक अग्निशमन की गाडिया बुलाई गई. अथक प्रयासों के बाद सुबह 5.30 बजे इस आग को काबू में किया गया. लेकिन तब तक गोदाम में रखा शैक्षणिक साहित्य, डेस्क-बेंच व अन्य साहित्य जकर राख हो गया. इस आग से लाखों रुपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा हैं. घटनास्थल पर फ्रेजरपुरा और खोलापुरी गेट पुलिस स्टेशन के अधिकारी और कर्मचारी भी पहुंच गए थे. सुरक्षा की दृष्टि से घटनास्थल के आसपास पुलिस का तगडा बंदोबस्त तैनात किया गया था. दमकल गाडियां एक के बाद एक आने से क्षेत्र के नागरिक भी बडी संख्या में घटनास्थल जमा हो गए थे. दमकल कर्मी की सतर्कता से आग उसी परिसर के क्वॉर्टर परिसर तक नहीं पहुंची, इस कारण भारी अनर्थ टल गया. आग लगने का कारण पता नहीं चल पाया है. मामले की जांच पुलिस और संबंधित यंत्रणा द्बारा की जा रही है. आग को काबू करने के लिए दमकल विभाग के वीएच इंगोले, शेंडे, टपके, गजबे, काटपेलवार, सालुंके, राठोड, कपले, शिरभाते तथा वी.एच. फुके ने अथ प्रयास किए.

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