अमरावती में बहुकोणीय मुकाबला तय, खुब बंट रहा पैसा!
वोटों का जमकर बंटवारा होना पक्का, हर कोई अपना पलडा भारी करने की फिराक में

* मनपा प्रशासन व निर्वाचन विभाग के पास ‘गडबडी’ को लेकर कोई शिकायत नहीं, अब तक एक भी कार्रवाई भी नहीं
* ‘ईमानदारी’ के साथ लडे जा रहे चुनाव पर उठ रहे सवाल, आज रात ‘ईमानदारी’ और भी रहेगी जोरो पर
अमरावती/दि.14 – लगभग आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहे अमरावती महानगरपालिका चुनाव इस बार पूरी तरह राजनीतिक उलटफेर और तीखे संघर्ष के केंद्र में हैं. भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना (शिंदे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस और अन्य दलों के बीच सीधा मुकाबला दिखाई दे रहा है. जिसके चलते अमरावती में इस समय साफ तौर पर बहुकोणीय मुकाबले वाली स्थिति दिखाई दे रही है और वोटों का जमकर बंटवारा होना भी लगभग तय है. ऐसे में हर राजनीतिक पार्टी और प्रत्याशी अधिक से अधिक वोटों को अपने पाले में करते हुए अपना पलडा भारी करने की फिराक में है. जिसके लिए जमकर पैसा बांटे जाने और मतदाताओं को अलग-अलग तरह से प्रलोभन दिए जाने की भी जबरदस्त चर्चाएं चल रही है. हालांकि मनपा प्रशासन एवं निर्वाचन विभाग के पास अब तक ऐसी किसी बात को लेकर अधिकारिक तौर पर कोई शिकायत नहीं पहुंची है. जिसके चलते मनपा के निर्वाचन विभाग ने ऐसे किसी भी मामले को लेकर अनभिज्ञता दर्शायी है और आदर्श आचारसंहिता के अमल पर नजर रखने हेतु गठित किए गए उडनदस्तों ने भी अब तक ऐसे मामलों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है. जिसके चलते यह मान लेने में कोई गुरेज या हर्जा नहीं है कि, सभी प्रत्याशियों द्वारा बडी ही ‘ईमानदारी’ के साथ मना का चुनाव लडा जा रहा है और चुनाव की धामधूम के बीच कहीं पर भी किसी भी तरह की कोई गडबडी नहीं हो रही.
बता दें कि, अमरावती मनपा के चुनाव में महायुति और महाविकास आघाड़ी में शामिल घटक दलों द्वारा अलग-अलग चुनाव लडा जा रहा है तथा इन दलों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों सहित चुनावी मैदान में निर्दलिय प्रत्याशियों की भी अच्छी-खासी संख्या है. जिसके चलते लगभग सभी प्रभागों की प्रत्येक सीट पर बहुकोणीय मुकाबले वाली स्थिति है. जिसके चलते सभी राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों द्वारा अपने-अपने स्तर पर पूरी ताकत झोंकी जा चुकी हैं. लेकिन इसके बावजूद अब तक शहरी मतदाताओं द्वारा अपना रुख स्पष्ट नहीं किया गया है. जिसके चलते चुनावी मैदान में रहनेवाले सभी प्रत्याशियों में मतदाताओं की भूमिका को लेकर काफी हद तक संभ्रम एवं असमंजस वाली स्थिति है. चूंकि बहुकोणीय मुकाबले वाली स्थिति में वोटो का बंटवारा होना लगभग तय रहता है. जिसके चलते वोटों में पडनेवाली फूट का फायदा उठाते हुए अधिक से अधिक वोट खुद के लिए हासिल करने की जद्दोजहद सभी प्रत्याशियों द्वारा की जा रही है. जिसके परिणामस्वरुप इस समय सभी प्रभागों में जमकर ‘मखाने’ बांटे जाने की जबरदस्त चर्चा चल रही है. हालांकि इसकी अधिकारिक तौर पर कहीं से कोई पुष्टि नहीं हुई है. क्योंकि ऐसे किसी कृत्य या गतिविधि को लेकर मनपा के निर्वाचन विभाग के पास कहीं से कोई शिकायत या जानकारी नहीं पहुंची है. साथ ही किसी भी तरह की गडबडी या अनियमितता को पकडने हेतु मनपा द्वारा गठित किए गए उडनदस्तो ने भी ऐसे किसी मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है. जिसके चलते यह मान लेने में कोई हरकत नहीं कि, सभी राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों द्वारा आदर्श आचारसंहिता का ‘आदर्श’ तरीके से पालन करते हुए बडी ही ‘ईमानदारी’ के साथ मनपा का चुनाव लडा जा रहा है.
* बिना राजनीतिक बैनर के मनाई जा रही संक्रांत, जमकर हो रही ‘वाण’ की ‘लूट’
किसी भी धार्मिक पर्व अथवा उत्सव के समय चुनाव रहने के चलते उस धार्मिक पर्व एवं उत्सव पर भी राजनीतिक रंग चढ जाता है, यह अब तक का अनुभव रहा है. चूंकि आज 14 जनवरी व कल 15 जनवरी को मकर संक्रांती का पर्व है. जिसका विशेष तौर पर महिलाओं के लिए काफी अधिक महत्व रहता है और महिलाएं इस पर्व के निमित्त हलदी-कुमकुम जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर एक-दूसरे को ‘वाण’ के तौर पर भेंट वस्तुएं भी प्रदान करती है. इस बात को ध्यान में रखते हुए इस बार सभी राजनीतिक दलों ने मकर संक्रांती के पर्व से पहले ही महिलाओं के लिए संक्रांती मिलन का आयोजन कर उन्हें ‘वाण’ के तौर पर भेंट वस्तुएं वितरित करने का सिलसिला शुरु कर दिया था, जिसके तहत महिलाओं को टिफिन बॉक्स व डस्टबिन से लेकर सिलाई मशीन जैसी अलग-अलग वस्तुएं भेंट स्वरुप प्रदान की गई.
उल्लेखनीय है कि निर्वाचनकाल के दौरान ऐसे किसी भी आयोजन और भेंट वस्तुओं के वितरण को प्रत्याशियों के चुनावी खर्च में पकडा जाता है. साथ ही साथ मतदाताओं को भेंट वस्तुएं प्रदान करना एक तरह से मतदाताओं को लालच अथवा प्रलोभन देने की श्रेणी में आता है, तो इस बात के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों द्वारा काफी होशियारी व चालाकी से काम लिया गया. जिसके तहत ऐसे आयोजनों में राजनीतिक दलों ने अपने बैनर-पोस्टर अथवा चुनावी चिन्हों का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं किया, बल्कि ऐसे आयोजनों को नागरिक समूहों की ओर से आयोजित कार्यक्रम दर्शाया और फिर ऐसे आयोजनों के मंचों का उपयोग करते हुए अपने प्रत्याशियों का प्रचार करने के साथ ही ऐसे आयोजनों में उपस्थित मतदाताओं विशेषकर महिला मतदाताओं को भेंट वस्तुएं भी वितरित की गई. हैरत और कमाल की बात यह है कि, इस तरह के आयोजनों के तमाम फोटो व वीडियो संबंधित प्रत्याशियों के सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर व पोस्ट किए गए है. लेकिन इसके बावजूद मनपा के उडनदस्तो अथवा विजीलेंस कमिटी द्वारा ऐसे किसी मामले को लेकर कोई एक्शन नहीं ली गई.
* प्रत्याशियों का ‘परिचय’ अब तक नागरिकों के सामने नहीं
– हलफनामे व संपत्ति के ब्यौरे नहीं हुए अपलोड
– अपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी वेबसाइट पर नहीं
बता दें कि, निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रत्याशियों द्वारा अपना नामांकन प्रस्तुत करते समय पेश किए गए हलफनामे, चल व अचल संपत्ति के ब्यौरे तथा अपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर दिए गए रिकॉर्ड से संबंधित तमाम जानकारिया निर्वाचन विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्र के मतदाताओं के समक्ष रखना अनिवार्य व अपेक्षित होता है. ताकि मतदाताओं के लिए साफ-सुथरी छबि वाले सुयोग्य व सक्षम प्रत्याशी को अपना प्रतिनिधि चुनने में आसानी हो सके. इसके लिए चुनाव करवानेवाले प्राधिकरण द्वारा ऐसे ब्यौरे को अपने कार्यालय में ऑफलाइन तरीके से प्रकाशित करने के साथ ही अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन तरीके से जारी किया जाना चाहिए. लेकिन हैरत की बात है कि, मनपा की वेबसाइट पर मनपा का चुनाव लड रहे एक भी प्रत्याशी से संबंधित कोई भी ब्यौरा उपलब्ध नहीं है. जिसके चलते मतदाताओं के पास यह पता करने का कोई जरिया नहीं है कि, उनके प्रभाग से चुनावी मैदान में खडे रहनेवाले प्रत्याशी कितनी चल-अचल संपत्तियों के मालिक है अथवा उनके खिलाफ कोई अपराधिक मामले दर्ज है भी अथवा नहीं. इसे सीधे तौर पर मनपा के निर्वाचन विभाग द्वारा निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अनदेखी कहा जा सकता है.
* भाजपा ने प्रचार में जमकर झोंकी ताकत
अब चुनाव प्रचार का दौर खत्म हो चुका है. लेकिन इससे पहले चुनाव के शुरुआती चरण से लेकर प्रचार का समय समाप्त होने तक भाजपा बेहद आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंकती नजर आई. भाजपा ने शुरु से ही मनपा चुनाव के लिए बेहद स्पष्ट व सख्त रवैया अपनाए रखा. जहां तक की अपने सामने अपने मित्र दलों की भी दाल नहीं गलने दी. साथ ही साथ मनपा के चुनावी मैदान में खडे भाजपा प्रत्याशी के प्रचार हेतु पार्टी ने सीएम देवेंद्र फडणवीस को अमरावती के सडकों पर रोड-शो के लिए उतारा तथा पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले व विधायक संजय कुटे को पूरा समय अमरावती में ही बनाए रखा और इसके अलावा बाहरी जिलो से पार्टी के मंत्रियों व विधायकों को अमरावती में सक्रिय करते हुए पार्टी के स्थानीय स्तर पर सभी छोटे-बडे पदाधिकारियों को भी एक्शन मोड में रहने के लिए लगभग मजबूर किया.
* अंतिम चरण में सक्रिय हुई कांग्रेस
मनपा चुनाव में प्रचार के लिहाज से शुरुआती दौर में काफी हद तक ‘अंडरस्ट्रीम’ काम करनेवाली कांग्रेस ने प्रचार के अंतिम चरण में कुछ हद तक आक्रामक रुख अपनाया और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढी जैसे अपने एक बडे नेता को चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतारा. जिन्होंने एकेडेमिक ग्राउंड पर कांग्रेस पार्टी के लिए एकमात्र बडी प्रचार सभा की. जिसमें कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों और असंतोष को हवा देने की रणनीति अपनाई. भाजपा के भीतर बगावत और टिकट वितरण को लेकर नाराजगी को लेकर अमरावती में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने दावा किया कि स्थानीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ माहौल बन चुका है और मतदाता बदलाव के मूड में हैं. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख व एड. यशोमति ठाकुर भी अलग-अलग प्रभागों में पार्टी प्रत्याशियों का प्रचार करते नजर आए.
* हिंदुत्व का मुद्दा, कितना प्रभावी?
भाजपा ने प्रचार के अंतिम दौर में हिंदुत्व के मुद्दे को आक्रामक तरीके से सामने रखा. भाजपा नेतृत्व का कहना है कि विकास, हिंदुत्व और संगठनात्मक मजबूती के दम पर पार्टी बढ़त बनाए रखेगी. वहीं एआईएमआईएम सहित कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर मतों के ध्रुवीकरण के आरोप भी लगाए गए. विपक्ष का कहना है कि भाजपा हिंदू मतों के एकीकरण की कोशिश कर रही है, जबकि स्थानीय स्तर पर विकास, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताएं असली मुद्दे हैं. कुल मिलाकर अमरावती महानगरपालिका चुनाव विकास, ध्रुवीकरण, आंतरिक संघर्ष और मतविभाजन का मिश्रण बन चुका है. प्रचार भले ही तेज और आक्रामक रहा हो, लेकिन अंतिम फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है. किसका पलड़ा भारी रहेगा, यह चुनाव परिणाम ही तय करेंगे.
* शिंदे सेना व अजीत पवार गुट ने भी दिखाया दम-खम
– एमआईएम व वायएसपी का भी प्रचार रहा जबरदस्त
भाजपा व कांग्रेस जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी दलों के अलावा मनपा की चुनावी रेस में रहनेवाली अन्य सभी पार्टियों ने भी चुनाव प्रचार के दौरान अपना अच्छा-खासा दम-खम दिखाया. जिसके तहत शिंदे गुट वाली शिवसेना के प्रत्याशियों का प्रचार करने हेतु खुद पार्टी प्रमुख व डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे ने अमरावती में प्रचार सभा की तथा पार्टी के नेता व मंत्री संजय राठोड व उदय सामंत सहित पूर्व मंत्री जगदीश गुप्ता व पूर्व विधायक ज्ञानेश्वर धाने पाटिल एवं महिला नेत्री प्रीति बंड पूरा समय काम पर लगे रहे. इसके अलावा अजीत पवार गुट वाली राकांपा के प्रत्याशियों का प्रचार करने पार्टी प्रमुख व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने अमरावती का दौरा कर प्रचार सभा को संबोधित किया. साथ ही पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक संजय खोडके तथा विधायक सुलभा खोडके सहित युवा नेता यश खोडके ने जबरदस्त तरीके से चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाली. इसके अलावा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में एमआईएम प्रत्याशियों का प्रचार करने हेतु पार्टी प्रमुख व सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने एक ही सप्ताह के भीतर दो बार अमरावती का दौरा कर तीन प्रचार सभाओं को संबोधित किया. वहीं दूसरी ओर अपने अकेले के दम पर मनपा के चुनावी अखाडे में उतरी युवा स्वाभिमान पार्टी के मुखिया व विधायक रवि राणा भी अपने प्रत्याशियों के प्रचार हेतु विभिन्न प्रभागों का दौरा करते दिखाई दिए. इन सबके अलावा शिवसेना उबाठा एवं राकांपा (शरद पवार गुट) के प्रत्याशियों का पूरा प्रचार स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं के भरोसे रहा.
* कई प्रभागों में हुई ‘रील स्टारों’ की कॉर्नर सभाएं, जमकर बंटे चुनाव चिन्ह वाले ‘किचैन’
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, जहां एक ओर कई राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों का प्रचार करने हेतु स्टार प्रचारक रहनेवाले अपने बडे-बडे नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा, वहीं दूसरी ओर कई प्रत्याशियों ने स्थानीय स्तर पर अपने प्रचार का नियोजन करते हुए सोशल मीडिया पर टिकटॉक स्टार या रील स्टार के रुप में परिचित रहनेवाले लोगों की जगह-जगह पर कॉर्नर सभाएं आयोजित करवाई और ऐसी कॉर्नर सभाओं में प्रत्याशियों के चुनावी चिन्ह रहनेवाले ‘किचैन’ भी जमकर बांटे गए. ताकि इस जरिए ही ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं के बीच अपनी दावेदारी को पहुंचाया जा सके.
* अब सोशल मीडिया पर जमकर चल रहा ‘प्रचार वॉर’
बीती शाम 5.30 बजे प्रचार का समय समाप्त होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सोशल मीडिया पर भी सभी प्रत्याशियों का प्रचार रुक जाना अपेक्षित था. लेकिन कई उम्मीदवारों के समर्थकों ने अब भी सोशल मीडिया पर अपने-अपने प्रत्याशियों का जबरदस्त ढंग से प्रचार जारी रखा है. साथ ही प्रतिस्पर्धी प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर कमेंटबाजी की जा रही है. साथ ही साथ एक-दूसरे के खिलाफ फोटो व वीडियो भी पोस्ट किए जा रहे है. इसके अलावा मकर संक्रांत पर्व का औचित्य साधते हुए कई प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं तक अपने शुभकामना संदेश प्रेशित करते हुए अपना प्रचार करना जारी रखा है.
* वंचित बहुजन आघाडी व युनायटेड फ्रंट भी लगा रहे जोर
विधानसभा चुनाव में अमरावती निर्वाचन क्षेत्र से 54 हजार वोट प्राप्त कर राजनीतिक भूकंप लाते हुए कई प्रस्थापितों को झटका देनेवाले डॉ. अलिम पटेल ने इस बार अमरावती मनपा के चुनाव में 47 प्रत्याशी खडे किए है. जिसके लिए डॉ. अलिम पटेल ने युनायटेड फ्रंट बनाते हुए वंचित बहुजन आघाडी के साथ हाथ मिलाया है और इस बैनर तले खडे कई प्रत्याशी कुछ सीटों पर कांग्रेस, राकांपा (अजीत पवार), भाजपा, शिंदे सेना, एमआईएम व बसपा जैसे राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को सीधी टक्कर दे रहे है.