तिवसा में जल्द ही साकार होगी सूतगिरणी, निर्वाचन क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर पूरा ध्यान

विधायक राजेश वानखडे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलनेवाली आरती वानखडे का कथन

* पति के साथ निर्वाचन क्षेत्र के विकास व लोगों की भलाई पर पूरा ध्यान देती हैं आरती वानखडे
* राजनीति व समाजसेवा के क्षेत्र में रुचि रहने के चलते आरती वानखडे हैं तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में जबरदस्त लोकप्रिय
* दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के साथ पारिवारिक राजनीतिक व सार्वजनिक जीवन पर की ‘दिलखुलास’ चर्चा
अमरावती/दि.13 – अमूमन किसी पुरुष राजनीतिक की पत्नी को राजनीति के लिहाज से लगभग ‘अनाडी’ माना जाता है, या फिर पुरुष सांसद या विधायक की पत्नी केवल अपने पति के साथ ‘शो-पीस’ के तौर पर राजनीतिक व सार्वजनिक मंचों पर दिखावे के लिए खडी दिखाई देती है. वहीं अक्सर यह भी होता है कि, महिला आरक्षण के चलते यदि कोई महिला नगरसेवक या विधायक चुनकर आती है, तो वह केवल ‘रबर स्टैम्प’ या ‘मुखौटे’ की तरह रहती है तथा परदे के पीछे से ऐसी महिलाओं को पति ही जनप्रतिनिधि के तौर पर काम करने के भूमिका निभाते है. परंतु इस मान्यता से सर्वथा विपरित दृश्य तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में दिखाई देता है, जहां के भाजपा विधायक राजेश वानखडे के साथ उनकी धर्मपत्नी आरती राजेश वानखडे न केवल हर कदम पर कंधे से कंधा मिलाते हुए साथ देती दिखाई पडती है, बल्कि किसी जननिर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर पूरा समय अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करते हुए जनसमस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी भी निभाती है. जिसके चलते माना जा सकता है कि, विधायक राजेश वानखडे की जनप्रतिनिधि के तौर पर ताकत दोगुनी हो जाती है. साथ ही साथ विधायक राजेश वानखडे की तरह ही तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में उनकी धर्मपत्नी आरती वानखडे की भी जबरदस्त लोकप्रियता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने विगत दिनों विधायक राजेश वानखडे की धर्मपत्नी आरती वानखडे का विशेष तौर पर साक्षात्कार लिया, जिसमें आरती वानखडे ने बडी जिम्मेदारी एवं संजीदगी के साथ तिवसा निर्वाचन क्षेत्र के विकास सहित अपने पारिवारिक व राजनीतिक जीवन के बारे में दिलखुलास चर्चा की.
इस बातचीत के दौरान आरती वानखडे ने बताया कि, तिवसा निर्वाचन क्षेत्र के 75 हजार से अधिक मतदाताओं ने अपने अमूल्य वोट देकर भाजपा प्रत्याशी राजेश वानखडे को अपना विधायक चुना है और हमने एक-एक मतदाता के घर जाकर उनसे वोटरुपी आशीर्वाद मांगा था. जिसके चलते अब मतदाताओं का हर एक वोट हमारे उपर एक जिम्मेदारी की तरह है, जिसे पूरा करना हमारा प्रथम कर्तव्य है. करीब 100 किमी के दायरे में चार तहसीलों के 218 गांवों का समावेश रहनेवाला तिवसा निर्वाचन क्षेत्र अमरावती जिले का भौगोलिक तौर पर सबसे विस्तीर्ण निर्वाचन क्षेत्र है, जिसमें पूरी तरह से ग्रामीण इलाकों का समावेश होता है. जहां पर मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराते हुए क्षेत्र की जनता को विकास की मुख्य धारा में लाना हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है. इसके साथ ही तिवसा निर्वाचन क्षेत्र के औद्योगिक विकास की ओर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है. जिसके तहत बहुत जल्द तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में सूतगिरणी स्थापित की जाएगी. जिसके जरिए जहां एक ओर क्षेत्र के कपास उत्पादकों को सुविधा होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं के पास बडे पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. साथ ही साथ क्षेत्र में वित्तीय चक्र गतिमान होकर इस पूरे परिसर का आर्थिक विकास भी होगा.
* शुरु से ही समाजसेवा में रही रुचि, दोनों का यही ‘गुण-मिलान’ आया काम
इस बातचीत में आरती वानखडे ने यह भी बताया कि, वे मूलत: वर्धा जिले को भोयर परिवार से वास्ता रखती है और एक किसान पिता की बेटी है. उनका विवाह वर्ष 2002 में तिवसा निवासी सैनिक पुत्र राजेश वानखडे के साथ हुआ था और उन्हें वर्ष 2004 में पुत्ररत्न की प्राप्ती हुई थी. उस समय राजेश वानखडे मुंबई में रहकर सरकारी ठेकेदारी का काम किया करते थे. जो कालांतर में अपना अच्छा-खासा व्यवसाय छोडकर अमरावती आ गए और उन्होंने खुद को समाजसेवा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया. आरती वानखडे के मुताबिक चूंकि खुद उन्हें भी समाजसेवा व जनसेवा करने में अच्छी-खासी रुचि थी. जिसके चलते वे कभी भी अपने पति राह में बाधा नहीं बनी, बल्कि उन्होंने ने भी अपने पति के साथ सामाजिक कामों में सक्रियता दिखाने शुरु कर दी. दोनों के बीच हुए इस ‘गुण-मिलान’ ने उनके दाम्पत्य जीवन को और भी अधिक मजबूती प्रदान की. जिसकी बदौलत पारिवारिक जीवन के लिए बेहद कम समय मिलने के बावजूद उनके दाम्पत्य जीवन में कभी कोई खटास नहीं आई तथा दोनों ने एक-दूसरे को लेकर कभी कोई शिकायत भी नहीं की. साथ ही साथ दोनों के बीच कभी किसी बात को लेकर कोई झगडा भी नहीं हुआ.
* सामाजिक कामों की बदौलत मिला जनमानस का विश्वास
इस बातचीत में आरती वानखडे ने साफ तौर पर कहा कि, केवल समाजसेवा की बदौलत समाज में बहुत बडा बदलाव नहीं लाया जा सकता, बल्कि समाज के लिए प्रभावी ढंग से काम करने हेतु राजनीतिक क्षेत्र का साथ मिलना बेहद जरुरी है. यही वजह रही कि, राजेश वानखडे ने सामाजिक कामों के साथ-साथ राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय होना शुरु किया और तत्कालीन एकीकृत शिवसेना का झंडा थामा. उनके द्वारा किए जाते कामों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जिला प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी. जिसके बाद राजेश वानखडे ने लोकसभा चुनाव में आनंदराव अडसूल व विधानसभा चुनाव में दिनेश नाना वानखडे के चुनाव प्रचार का बखूबी जिम्मा संभाला. जिसकी बदौलत वे राजनीति में पूरी तरह से स्थापित हुए और उन्हें जनमानस का विश्वास भी मिलता चला गया. जिसे देखते हुए सन 2019 में उन्हें भाजपा-सेना युति के तहत तिवसा निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना प्रत्याशी के तौर पर टिकट मिली और राजेश वानखडे ने पहली बार विधानसभा का चुनाव लडा. इस समय पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए आरती वानखडे ने कहा कि, राजेश वानखडे का विधानसभा चुनाव लडना पहले से तय नहीं था और इसे लेकर पहले से कोई नियोजन भी नहीं किया गया था. बल्कि यह राजेश वानखडे सहित हम सभी के लिए अप्रत्याशित बात थी और राजेश वानखडे ने पार्टी का टिकट मिलने के बाद मुंबई से सबसे पहले उन्हें ही फोन करते हुए यह बात बताई थी.
* महज 10 दिनों का समय मिला था प्रचार हेतु, प्रत्येक मतदाता तक पहुंचे थे
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव को याद करते हुए आरती वानखडे ने बताया कि, उस समय उन्हें चुनाव प्रचार हेतु केवल 10 दिनों का समय मिला था और उन 10 दिनों के दौरान चार तहसीलों के 218 गांवों में रहनेवाले तिवसा निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक मतदाता तक पहुंच पाना काफी चुनौतीपूर्ण था. खास बात यह थी कि, हमारे मुख्य प्रतिद्वंदी बेहद प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से वास्ता रखते थे. जिनकी दो-तीन पीढियां राजनीति में सक्रिय है. वहीं दूसरी ओर हमारी पूर्व राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रहने के चलते हम राजनीति में पूरी तरह से नए-नवेले थे. जिसके चलते उस वक्त यह दावा किया जा रहा था कि, हमारी करीब 20 से 25 हजार वोटों से हार होनेवाली है. लेकिन ऐसी बातों पर ध्यान दिए बिना हमने अपने चुनाव प्रचार को आगे बढाया. जिसके तहत दोनों पति-पत्नी ने निर्वाचन क्षेत्र के गांवों को आपस में बांटते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र का सघन दौरा करना शुरु किया और प्रत्येक मतदाता तक अपनी पहुंच भी बनाई.
* पहली हार से निराश हुए बिना दूसरे ही दिन से लगे थे काम पर
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव को लेकर बातचीत को आगे बढाते हुए आरती वानखडे ने कहा कि, उस चुनाव में राजेश वानखडे को करीब चार-साढे चार हजार वोटों से सामना करना पडा था. लेकिन हम उस हार से बिल्कुल भी निराश नहीं हुए थे. क्योंकि हमारी हार 20 से 25 हजार वोटों से होने के दावे को हमने झुठला दिया था और हमें उम्मीद से कहीं अधिक वोट मिलते थे. साथ ही जनता ने हम पर विश्वास भी जताया था, जिसे ध्यान में रखते हुए हमने चुनावी नतीजे के दूसरे ही दिन से खुद को एक बार फिर तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय किया और पूरे निर्वाचन क्षेत्र का सघन दौरा करते हुए मतदाताओं के प्रति आभार ज्ञापित करने के साथ ही उनकी समस्याओं को हल करने का काम भी शुरु किया.
* वर्ष 2024 में हमारी मेहनत रंग लाई, जनसेवा को मिला नया आयाम
इस बातचीत के दौरान आरती वानखडे ने कहा कि, वर्ष 2019 के बाद वर्ष 2024 के आते-आते राज्य सहित अमरावती जिले में भी राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया था. जिसके चलते राजेश वानखडे ने शिवसेना छोडकर भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश कर लिया था और पार्टी नेतृत्व ने राजेश वानखडे की योग्यता पर भरोसा जताते हुए उन्हें वर्ष 2024 से विधानसभा चुनाव हेतु तिवसा निर्वाचन क्षेत्र से अपना प्रत्याशी घोषित किया था. साथ ही साथ राजेश वानखडे के प्रचार हेतु राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी तिवसा क्षेत्र के दौरे पर आए थे. साथ ही साथ पार्टी के सभी स्थानीय नेताओं व पदाधिकारियों ने भी तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी की जीत के लिए जबरदस्त मेहनत की थी. जिसकी बदौलत राजेश वानखडे विधायक निर्वाचित हुए थे और हमारी मेहनत सफल हुई. इसके साथ ही हमारे द्वारा की जाती जनसेवा को एक नया आयाम भी मिला था.
* आज भी रोजाना 10 से 20 गांवों का चलता है दौरा
राजेश वानखडे के विधायक निर्वाचित हो जाने के बाद अपने कंधों पर जिम्मेदारी बढ जाने की बात कहते हुए आरती वानखडे ने कहा कि, विधायक वानखडे और वे खुद आज भी रोजाना अपने निर्वाचन क्षेत्र के 10 से 20 गांवों का दौरा करते है. साथ ही अपने संपर्क कार्यालय में बैठकर वहां आनेवाले लोगों की समस्याएं व शिकायते सुनते हैं. आरती वानखडे के मुताबिक विधायक वानखडे अपने संपर्क कार्यालय में रोजाना सुबह 11 से 11.30 बजे के आसपास तक रहते हैं और फिर दौरे पर निकल जाते हैं. जिसके बाद वे खुद अगले करीब दो घंटे तक संपर्क कार्यालय में रहती हैं और वहां आनेवाले लोगों से मुलाकात करते हुए निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के दौरे पर निकल जाती हैं.
* सार्वजनिक जीवन के लिए पारिवारिक सुखों को देनी पडती है तिलांजलि
इस बातचीत के दौरान आरती वानखडे ने यह स्वीकार किया कि, उनके पति राजेश वानखडे जब से सार्वजनिक व सामाजिक जीवन में सक्रिय हुए, तब से उनके पास घर परिवार को देने के लिए समय ही नहीं बचता. साथ ही विधायक निर्वाचित होने के बाद राजेश वानखडे की व्यस्तता और भी अधिक बढ गई. साथ ही साथ वे खुद भी अपने पति का हर कदम पर कदम से कदम मिलाकर साथ देती है, तो अब उनके पास भी परिवार को देने के लिए समय बेहद कम रहता है. परंतु उन्हें इसका कोई मलाल नहीं है, क्योंकि उन्होंने जनसेवा को ही अपना लक्ष्य तय कर लिया है. जिसे लेकर उनकी उनके पति व परिवार के साथ जबरदस्त ‘ट्युनिंग’ भी है और वे दोनों पति-पत्नी रोजाना सुबह अपने पिछले दिन के अनुभवों की ‘शेयरिंग’ करते हुए दिनभर के दौरान किए जानेवाले कामों की ‘प्लानिंग’ भी करते हैं.
* आलोचना से नहीं घबराते और ध्यान भी नहीं देते
इस बातचीत में आरती वानखडे ने यह भी कहा कि, वे और उनके पति राजेश वानखडे कभी भी किसी के द्वारा की जानेवाली अपनी आलोचनाओं से नहीं घबराते और बिना वजह की आलोचनाओं पर ध्यान भी नहीं देते, बल्कि उनका पूरा फोकस अपना काम सही ढंग से करने की ओर रहता है.
* पारिवारिकता व रिश्तेदारी निभाना अच्छा लगता है
इसके साथ ही आरती वानखडे ने यह भी कहा कि, भले ही आज उनका पूरा दिन बेहद व्यस्त रहता है, लेकिन उन्हें अपने परिवार की ओर ध्यान देना, सासू मां की सेवा करना तथा सभी रिश्तेदारों के साथ रिश्तेदारी निभाना बेहद अच्छा लगता है. जिसके लिए वे समय में से समय निकाल ही लेती हैं. साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि, उनका इकलौता बेटा इस समय मुंबई में रहकर इंजीनियरिंग की पढाई-लिखाई कर रहा है, जिसका आगे चलकर अमरावती आकर बसने या राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय होने का कोई इरादा नहीं. ऐसे में बेटे की परवरिश और पढाई-लिखाई की तरफ भी उनका पूरा ध्यान है.
* राजनीति में रहकर भी राजनीति से अलिप्त, फिलहाल चुनाव लडने की कोई मंशा नहीं
जिस तरह से आरती वानखडे राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं, उसे देखते हुए यह माना जा रहा है कि, संभवत: वे जिला परिषद का आगामी चुनाव लड सकती हैं. इस बात को लेकर पूछे गए सवाल पर आरती वानखडे का कहना रहा कि, वे राजनीतिक क्षेत्र में रहने के बावजूद राजनीति से पूरी तरह अलिप्त हैं और उनका चुनाव लडने को लेकर भी कोई इरादा नहीं है. हालांकि उनका यह भी कहना रहा कि, यदि पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसी कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है, या पार्टी नेतृत्व द्वारा कोई आदेश दिया जाता है, तो उस समय तत्कालीन परिस्थितियों के हिसाब से निर्णय लेने के बारे में सोचा जाएगा. लेकिन तब तक ऐसी किसी संभावना पर वे और उनके पति राजेश वानखडे कोई विचार नहीं कर रहे.

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