महाराष्ट्र में यूजीसी कानून की सख्त जरुरत

राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे का कथन

* धर्म स्वातंत्र्य कानून का किया पूरी तरह से समर्थन
अमरावती/दि.27 – महाराष्ट्र में बलात धर्मांतरण जैसे कृत्यों को रोकने हेतु धर्म स्वातंत्र्य कानून को लागू करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं महाराष्ट्र विधानसभा पूरी तरह से बधाई एवं अभिनंदन के पात्र है. लेकिन अब यह भी बेहद जरुरी हो चला है कि, महाराष्ट्र में समान नागरिक कानून को भी लागू किया जाए, ताकि राज्य का हर व्यक्ति एकसमान हो और किसी के भी पास किसी भी तरह का कोई विशेषाधिकार न हो, इस आशय का प्रतिपादन भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे द्वारा किया गया. वे दैनिक ‘अमरावती मंडल’ को दिए गए विशेष साक्षात्कार में अपने विचार रख रहे थे.
अपने प्रखर हिंदुत्ववादी विचारों के लिए विख्यात रहनेवाले सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि, हर व्यक्ति के पास अपनी मर्जी के मुताबिक किसी भी धर्म का पालन करने की आजादी है और कोई भी व्यक्ति अपनी खुद की मर्जी व स्वेच्छा से यदि अपना धर्म बदलता है, तो इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं होनी चाहिए. लेकिन यदि डर, दबाव या प्रलोभन दिखाकर किसी के साथ धर्म बदलने हेतु जोर-जबरदस्ती की जाती है, या फिर किसी को अपनी धार्मिक पहचान छुपाकर अपने जाल में फांसने के बाद उसका जबरन धर्मांतरण किया जाता है, तो इसका कदापि समर्थन नहीं किया जा सकता, बल्कि ऐसा करनेवाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना अपेक्षित है. जिसके लिए धर्म स्वातंत्र्य कानून की सख्त जरुरत थी. साथ ही साथ अब महाराष्ट्र में समान नागरिक कानून को भी लागू किया जाना चाहिए.
* देश में चल रहे कई तरह के ‘जेहाद’
इस साक्षात्कार में सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने बडे बेबाक तरीके से कहा कि, इस समय देश में एक विशिष्ट मानसिकता के तहत कई स्तरों पर कई तरह के कथित ‘जेहाद’ चलाए जा रहे है. जिनमें लव-जेहाद व व लैंड जेहाद के साथ ही अब ड्रग्ज जेहाद का नाम शामिल हो गया है. जिसके तहत लव-जेहाद में जहां हिंदू समाज की भोलीभाली व मासूम बच्चियों को सुनियोजित तरीके से प्रेमजाल में फांसा जाता है और फिर उनका धर्मांतरण कराया जाता है. वहीं लैंड जेहाद के अंतर्गत किसी भी खाली पडी सार्वजनिक जमीन, टेकडी या पहाड पर अवैध कब्जा किया जाता है. वहीं इन दिनों मादक पदार्थों विशेषकर एमडी ड्रग्ज की बिक्री के जरिए स्कूलों व कॉलेजों में पढनेवाले बच्चों को नशे का शिकार बनाया जा रहा है. इसके साथ ही सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने यह आरोप भी लगाया कि, लव-जेहाद को सफल बनाने के लिए भी ड्रग्ज जेहाद का सहारा लिया जा रहा है. जिसके तहत अपने जाल में फंसनेवाली हिंदू बच्चियों को नशिलेे पदार्थ खिलाते हुए उनके साथ अश्लिल कृत्य किए जाते है और उनके अश्लिल फोटो व वीडियो बनाते हुए उन्हें ब्लैकमेल कर अन्य बच्चियों को भी फांसा जाता है. ऐसा इससे पहले कई बार उजागर हो चुका है. ऐसे सभी मामलों में एक विशिष्ट समाज के लोगों का ही समावेश रहता है, जो अपनी असल धार्मिक पहचान को छिपाकर पहले तो खुद को हिंदू दर्शाते है और फिर बाद में अपना असली रुप दिखाते है.
* डेमोग्राफी को बदलने का हो रहा प्रयास
इस बातचीत में सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने छांगूर बाबा का उदाहरण देते हुए बताया कि, जबरन धर्मांतरण करने के मामले में पकडे गए छांगूर बाबा के पास से करीब 100 करोड रुपयों की संपत्ति पाई गई थी. यह कोई छोटा-मोटा विषय नहीं है, बल्कि इसे बेहद गंभीरता के साथ देखे जाने की जरुरत है. कुछ लोग इस देश की डेमोग्राफी को बदलने के काम में लगातार जुटे हुए है. जिसके तहत जनसंख्या को बढाने के साथ-साथ अन्य लोगों, विशेषकर हिंदू बच्चियों को धर्मांतरीत करने का काम तेजगति के साथ किया जा रहा है. साथ ही साथ बाहर से आनेवाले बांग्लादेशियों व रोहिंग्याओं को भी अपने बीच में बसाने का काम कुछ लोग कर रहे है, ताकि जनसंख्या के अनुपात का संतुलन बिगाडा जा सके. जिसे ध्यान में रखते हुए अब समान नागरिक कानून की सख्त जरुरत है.
* कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण का काम किया
इस साक्षात्कार में सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने आजादी के बाद से लंबे समय तक देश की सत्ता में रही कांग्रेस पर एक समुदाय विशेष का जमकर तुष्टिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, कांग्रेस ने देश के विकास एवं आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे की अनदेखी करते हुए हमेशा ही वोट बैंक की राजनीति की और देश की आबादी में 20-25 फीसद से अधिक हिस्सेदारी रहनेवाले समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया. जबकि हकिकत में जिन समुदायों की आबादी कुल जनसंख्या के अनुपात में 5 फीसद से कम है, केवल उन्हीं समुदायों को अल्पसंख्यक माना जाना चाहिए. परंतु देश में यह स्थिति है कि, अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त एक समुदाय विशेष की जनसंख्या कुछ शहरों व जिलों में अब 50 फीसद से भी अधिक है. ऐसे में उन्हें अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता. जिसके चलते समान नागरिक संहिता कानून को लागू करना बेहद जरुरी हो गया है.
* कोल्हे हत्याकांड के आरोपियों का भी था लव-जेहाद से कनेक्शन
इस साक्षात्कार के दौरान एक के बाद एक कई सनसनीखेज बयान देते हुए सांसद डॉ. बोंडे ने यह दावा भी किया कि, उमेश कोल्हे हत्याकांड में पकडे गए आरोपियों में से कुछ मुख्य आरोपियों का लव-जेहाद जैसी घटनाओं के साथ सीधा कनेक्शन था, जो लव-जेहाद के लिए बाकायदा पैसों की फंडींग भी किया करते थे. साथ ही साथ सांसद बोंडे ने यहा आरोप भी लगाया कि, जिस समय मेडिकल व्यवसायी उमेश कोल्हे की हत्या हुई थी, तब राज्य में उद्धव ठाकरे के नेतृत्ववाली सरकार रहने के साथ ही अमरावती में कांग्रेस के जिला पालकमंत्री थे और उस वक्त उन सभी ने उमेश कोल्हे हत्याकांड को राहजनी व छीनाझपटी तथा व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते घटित हुई हत्या बताने का पूरा प्रयास किया था, ताकि मामले को दबाया जा सके. लेकिन तब खुद उन्होंने किसी भी पद पर नहीं रहते हुए उस मामले को लेकर पूरजोर तरीके से आवाज उठाई थी. जिसके चलते आगे चलकर उस मामले से जुडा असली सच सबके सामने आ पाया था और फिर एनआईए ने अमरावती पहुंचकर कोल्हे हत्याकांड के आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
* मोदी पूरी तरह से सक्षम नेता, देश को दे रहे नई दिशा
इस बातचीत में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश सहित दुनिया के स्तर पर एक बेहद प्रभावशाली व सक्षम नेता बताते हुए सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि, आज जब दुनिया के तमाम देशों में अशांति व अस्थिरता का वातावरण है, तब देश में हर ओर शांतिपूर्ण और स्थिर माहौल है. खाडी देशों में उपजे युद्धजन्य हालात के चलते जहां दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है. वहीं भारत में जीवनावश्यक वस्तुओं के दाम स्थिर है और महंगाई पूरी तरह से नियंत्रण में है. इस समय सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने यह भी कहा कि, महंगाई को नियंत्रित रखने के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज के वाजीब दाम देने के लिए पीएम मोदी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. जिसके चलते न्यूनतम गारंटी मूल्य पर किसानों से उनका पूरा माल खरीदा जा रहा है.
* एक ही परिवार के नाम पर सभी योजनाओं के नाम क्यों?
हाल ही में रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलने को लेकर जबरदस्त बवाल हुआ था. जिसे लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि, देश में इस समय गांधी-नेहरु परिवार के नाम पर 250 से अधिक योजनाएं चल रही है. ऐसे में सवाल पूछा जाना चाहिए कि, एक ही परिवार के नाम पर सभी योजनाओं के नाम क्यों होने चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, पीएम मोदी ने खुद अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई योजना शुरु नहीं की है, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जानेवाली हर योजना के साथ प्रधानमंत्री या पीएम शब्द जोडा गया है, क्योंकि प्रधानमंत्री किसी एक पार्टी का नहीं है, बल्कि पूरे देश का और देश में रहनेवाले सभी लोगों का होता है. इसके अलावा पीएम मोदी ने रोजगार गारंटी योजना के नाम को बदलने के साथ-साथ इसके मूलभूत ढांचे में भी बदलाव किया है. पहले जहां मात्र 100 दिन के रोजगार की गारंटी हुआ करती थी, वहीं अब 150 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है और मजदूरी का भुगतान भी तुरंत किया जा रहा है.
* विधान मंडल से काफी अधिक है राज्यसभा का अनुभव
सांसद डॉ. अनिल बोंडे इससे पहले विधायक रहने के साथ-साथ राज्य विधान मंडल में मंत्री भी रह चुके है और अब राज्यसभा में सदस्य है. जिसके चलते दोनों स्थानों पर कामकाज और अनुभव में रहनेवाले फर्क को लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद बोंडे का कहना रहा कि, विधानसभा में जहां निर्णयों के क्रियान्वयन पर ज्यादा जोर दिया जाता है, वहीं राज्यसभा जैसे संसद के उच्च सदन में नीतियों के निर्माण और लोकसभा के फैसलों पर मंजूरी पर पूरा फोकस रहता है. साथ ही सांसद बोंडे ने यह भी बताया कि, रक्षा, रेल एवं विदेश नीति जैसे तीन केंद्रीय मंत्रालयों को छोडकर केंद्र एवं राज्यों के सभी मंत्रालय एकसमान होते है तथा केंद्र व राज्यस्तरिय मंत्रालय एक-दूसरे के साथ जुडे भी रहते है, यही हमारे देश हेतु अमल में लाई गई फेडरल व्यवस्था की खूबसुरती है. जिसके जरिए देश में शानदार ढंग से काम होता है.
* राजनीति में आने का कभी सोचा नहीं था
पेशे से एक निष्णात चिकित्सक रहनेवाले सांसद डॉ. अनिल बोंडे विगत कई वर्षों से राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय है तथा विधायक व मंत्री रहने के साथ ही अब राज्यसभा सदस्य भी है. इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि, बतौर चिकित्सक काम करते समय वे सामाजिक गतिविधियों में भी बढ-चढकर हिस्सा लिया करते थे. जिसके चलते धीरे-धीरे उनका राजनीति से जुडाव हो गया. हालांकि खुद उन्होंने राजनीति में आने के बारे में कभी सोचा नहीं था, लेकिन अवसर बनते गए, मौके मिलते गए और वे काम करते गए, आगे बढते गए.
* नवनीत राणा को राज्यसभा की सदस्यता नहीं मिलना पार्टी की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा
अमरावती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य रही पूर्व सांसद नवनीत राणा को सन 2024 का संसदीय चुनाव हार जाने के बाद भाजपा द्वारा राज्यसभा में भेजे जाने की जबरदस्त चर्चाएं चल रही थी, लेकिन ऐन समय पर उन्हें मौका नहीं मिला. इस बारे में पूछे जाने पर सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि, यह सब पार्टी की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है. भाजपा के प्रदेश कार्यालय ने महाराष्ट्र से राज्यसभा की 7 सीटों के लिए 36 नाम भेजे थे. जिसमें से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा 7 नामों को चुना गया. जाहीर सी बात है कि, 29 लोगों के नाम कटने थे, जिसमें पूर्व सांसद नवनीत राणा का भी नाम शामिल रहा. सांसद डॉ. बोंडे के मुताबिक पार्टी ने राज्यसभा हेतु नाम तय करते समय समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने सहित अन्य कई तरह के मापदंड तय किए होंगे. इसके आधार पर ही राज्यसभा के लिए दावेदारों के नामों का चयन हुआ.
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