‘होरी खेलेंगा आपा गिरधर गोपाल से…’

राधाकृष्ण सेवा समिति द्वारा फूलों की भव्य होली

* रामप्रियाश्री जी का एकादशी पर सुंदर विवेचन
* हजारों भाविक उमडे रंगारी गली के मंदिर में, मानो ब्रज हुआ साकार
अमरावती /दि.27 राधाकृष्ण सेवा समिति द्वारा आमलकी एकादशी पर आयोजित फूलों की होली आज प्रात: यहां रंगारी गली स्थित राधाकृष्ण मंदिर में ऐसी सजी कि, भक्तों को ब्रज में होने का अहसास हुआ. फूलों के साथ-साथ गुलाल भी जमकर उछाया गया. रामकथा मर्मज्ञ रामप्रियाश्री जी के मुखारविंद से एकादशी की कथा और महात्म पश्चात फूलों की होली, गुलाल की होली, से सभी भाविक सराबोर हो गये, झूम उठे, थिरक उठे. कुछ देर के लिए लगा कि अंबानगरी न होकर हम सभी साक्षात ब्रज में तो नहीं है.
* सरल बने तो समझना उपवास फल रहा
रामप्रियाश्री जी ने अपनी संस्कृतनिष्ठ हिंदी मेें एकादशी की कथा और महात्म बताया. उन्होंने कहा कि, एकादशी का उपवास नवधा भक्ति से और सुदृढ होता है. उसी प्रकार भक्ति करना, ईश्वर को पाना सरल है. एकादशी व्रत करने से यदि हम सहज, सरल होते जा रहे हैं. तो समझना कि, हमारा व्रत, उपवास फलीभूत हो रहा है. जीवन में सरल होना यद्यपि कठिन है. किंतु एकादशी का व्रत इस कठिनाई को दूर कर देता है. आप ने कहा कि, भगवान से मांगने नहीं, मिलने मंदिर आना चाहिए. एक लोटा जल सारी समस्या का हल की प्रसिद्ध पंक्तियों की अगली कडी भी आप ने बता दी.
* आज के यजमान यह रहे
राधाकृष्ण सेवा समिति प्रत्येक एकादशी पर महाआरती का आयोजन करती है. आज के यजमानों में मनमोहन गग्गड, गौरी बालगोविंद राठी, श्री गायल माता परिवार, गोपालदास राठी सायत, अर्चना रमनकुमार झंवर रहे. आज श्रद्धा और उल्लास का उद्भूत नजारा रंगारी गली राधाकृष्ण मंदिर में दिखाई दिया. रंगबिरंगी गुब्बारों से सजावट की गई थी. उसी प्रकार भगवान की उत्सव मूर्तियां बाहर सभी के बीच रखी गई थी, ताकि भक्त श्रद्धा भाव से भगवान को रंग लगाने का चाव पूर्ण कर सके.
* दीपक उपाध्याय, रवि ओझा छा गये
अमरावती के अपने जस गायक दीपक उपाध्याय, रवि ओझा, प्रमोद राठी ने फाग गीतों, भजनों से सभी को भक्ति से सराबोर कर दिया. आज बिरज में होरी रे रसीया से प्रारंभ हुआ भजनों का क्रम सुंदरता से आगे बढा और होरी खेलेंगा आपा गिरधर गोपाल से…. तक छा गया. उपस्थित सभी स्त्री-पुरुष भाविकों ने एक-दूसरे को जमकर गुलाल लगाया. नृत्य का अवलंब किया. फूलों की बरसात की गई. हर कोई झूम-झूम गया. अद्भूत, अनूठा, मथुरा-वृंदावन जैसा वातावरण बन गया था. जिसका समस्त श्रेय सेवा समिति को है.

Back to top button