विवाहिता से छेडछाड के आरोपी को एक वर्ष का सश्रम कारावास

डीजीपी एड. परिक्षित गणोरकर की सफल पैरवी

अमरावती/दि.6 – जिले के लोणी पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत ढवलसरी गांव में रहनेवाले मयूर अरुण मानके (31) नामक आरोपी को अपने परिचय में रहनेवाली विवाहित महिला के घर में घूसकर उसके साथ छेडछाड करते हुए जोर-जबरदस्ती करने का प्रयास करने के मामले में दोषी करार देते हुए स्थानीय जिला न्यायाधीश क्र. 5 एस. पी. शिंदे की अदालत ने विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम एक वर्ष के कारवास व दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई. अलग-अलग धाराओं के तहत लगाए गए जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर आरोपी को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला सरकारी अभियोक्ता एड. परिक्षित गणोरकर द्वारा सफल युक्तिवाद किया गया.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक यह घटना 8 अप्रैल 2024 को घटित हुई थी, जब पीडित महिला गांव में ही स्थित अपने दूसरे घर में अपना राशनकार्ड लाने हेतु गई थी, यह देखते ही आरोपी मयूर मानके उसका पीछा करते हुए उसे घर में घूसा और उसका हाथ पकडकर उसके साथ जोर-जबरदस्ती करने का प्रयास किया. जिसके चलते पीडिता ने चीखपुकार मचाई. जिसे सुनकर पीडिता का पति तुरंत ही मौके पर पहुंच गया, जिसे देखकर आरोपी मयूर मानके वहां से अपने दुपहिया वाहन पर सवार होकर भाग निकला. पश्चात पीडिता ने लोणी पुलिस थाने में पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई. जिसके आधार पर लोणी पुलिस ने भादंवि की धारा 354, 354 (अ) व 452 सहित एट्रॉसीटी एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया तथा मामले की जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट पेश की. जहां पर अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 7 गवाह पेश किए गए. जिसमें से एक भी गवाह अपने बयान से नहीं पलटा. ऐसे में सभी गवाहों के बयान और मामले से जुडे सबूतों को देखते हुए न्या. एस. पी. शिंदे ने आरोपी मयूर मानके को दोषी करार दिया तथा भादंवि की धारा 354 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास व 500 रुपए के जुर्माने, भादंवि की धारा 452 के तहत 6 माह के कारावास व 500 रुपए के जुर्माने, एट्रॉसीटी एक्ट की धारा 3 (1) (डब्ल्यू) (1) (2) के तहत 6 माह के कारावास व 500 रुपए के जुर्माने तथा एट्रॉसीटी एक्ट की धारा 3 (2) (वीए) के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास व 500 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को दो-दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी.
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला सरकारी वकील एड. परिक्षित गणोरकर ने सफल युक्तिवाद किया. जिन्हें मुख्य कोर्ट पैरवी एएसआई बाबाराव मेश्राम व पोकां मिलिंद रमेश भगत ने विशेष सहयोग दिया.

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