रविवार को कार्रवाई, दूसरे ही दिन फिर सक्रिय हुए वेंडर
बडनेरा रेलवे स्टेशन पर अवैध खाद्य विक्रेताओं का कब्जा

* आरपीएफ की मौजूदगी में ट्रेन की खिडकियों तक पहुंचकर बेचा जा रहा माल
अमरावती/ दि. 26 -बडनेरा रेलवे स्टेशन पर अवैध खाद्य विक्रेताओं का बोलबाला थमने का नाम नहीं ले रहा है. रेलवे प्रशासन द्बारा स्पष्ट नियमावली बनाए जाने के बावजूद प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में खुले आम नियमों की धज्जियां उडाई जा रही हैं. अधिकृत विक्रेताओं को केवल स्टॉल या ट्रॉली के माध्यम से सीमित संख्या में बिक्री की अनुमति है, लेकिन हकीकत में ट्रेन रूकते ही दर्जनों अवैध वेंडर खिडकियों पर टूट पडते हैं.
स्थिति यह है कि कुछ विक्रेता टे्रन की रफ्तार धीमी होते ही चलती ट्रेन में चढकर खाद्य सामग्री बेचने लगते हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है. रविवार को नाशिक में आयी विशेष टीम ने नवजीवन एक्सप्रेस में अवैध रूप से खाद्य पदार्थ बेच रहे करीब 11 वेंडरों को पकडा था. लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के दूसरे ही दिन वही वेंडर फिर स्टेशन परिसर में सक्रिय दिखाई दिए. चार अधिकृत विक्रेता, लेकिन कई अवैध हाथ जानकारी के अनुसार शारदा उद्योग केन्द्र, आर. आर. फास्टफूड तोला तथा अब्दुल समद गनी को ही स्टेशन पर खाद्य पदार्थ बेचने की अधिकृत अनुमति प्राप्त है. नियमों के तहत ये विक्रेता केवल निर्धारित स्टॉल या ट्रॉली के माध्यम से बिक्री कर सकते हैं. लेकिन आरोप है कि इस अधिकृत विक्रेताओं ने अपने 8 से 10 लोगों को ट्रेन की खिडकियों तक भेज रखा है. जो प्लेटफार्म पर ट्रेन रूकते ही डिब्बों पर टूट पडते हैं. कई बार ये लोग ट्रेन के भीतर भी घुसकर भी सामान बेचते देखे गये हैं.
* यात्रियों के सेहत के साथ खिलवाड
बिना गुणववत्ता जांच और स्वच्छता मानकों के खाद्य सामग्री बेचे जाने से यात्रियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. यदि किसी यात्री की तबियत बिगडती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह बडा सवाल है.
* रविवार को 11 वेंडर पकडे गये
रविवार को रेल विभाग की नाशिक विशेष टीम भुसावल पहुंची और अहमदाबाद से चेन्नई जा रही ट्रेन में सवार होकर बडनेरा स्टेशन पहुुंची. सुबह करीब 10.30 बजे स्टेशन पर पहुंचते ही टीम ने छापामार कारवाई करते हुए 11 अवैध वेंंडरों को पकड लिया. इनमें से अकील, नागो देशभ्रतार सहित अन्य लोगों का समावेश बताया गया है. हालांकि जब इस संबंध में आरपीएफ निरीक्षक ममता यादव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि पकडे गये वेंडरों के पास लाइसेंस थे और वे अवैध नहीं थे. इस बयान के बाद पूरी कार्रवाई और आरपीएफ की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है.
* आरपीएफ के सामने चल रहा खेल ?
स्टेशन परिसर में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का कार्यालय मौजूद है. यहां निरीक्षक के रूप में ममता यादव कार्यरत है. नियमों के अनुसार ट्रेन आने से पहले आरपीएफ जवानों को प्लेटफार्म पर तैनात रहना अनिवार्य है और वे तैनात भी रहते हैं. इसके बावजूद अवैध वेंडरों की गतिविधियां खुले आम जारी है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार आरपीएफ की कथित ढिलार्ई या मिलीभगत के कारण ही यह अवैध कारोबार फल- फूल रहा है. रविवार की कार्रवाई के बाद भी यदि स्थिति जस की तस है, तो सवाल उठना लाजमी है कि निगरानी व्यवस्था आखिर किसलिए है ?





