4 साल की प्रतीक्षा के बाद शिक्षक बबेरवाल को मिला न्याय

1500 रूपए की ऑनलाईन शॉपिंग में धोखाधडी का मामला

* उपभोक्ता अदालत ने लगाई ई- कॉमर्स कंपनी मिशो को फटकार, वसूला जुर्माना
अमरावती/ दि. 13 – करीब 4 साल पहले बडनेरा के शिक्षक संजय बबेरवाल ने मिशो कंपनी की वेबसाइट से 1500 रूपए की वस्तु खरीदी थी. लेकिन उन्हें अपेक्षित वस्तु की डिलीवरी नहीं की गई. जिसके बाद उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए उस कंपनी से पैसे वापिस लौटाने कहा. लेकिन कंपनी ने उसका प्रस्ताव अस्वीकार किया. आखिरकार संजय बबेरवाल ने उपभोक्ता अधिकारों का इस्तेमाल कर उपभोक्ता अदालत में याचिका दायर की. करीब 4 साल की लंबी लगाई के बाद आखिरकार मिशो ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी को संजय बबेरवाल को 1500 रूपए के साथ मानहानि एवं क्षतिपूर्ति की अतिरिक्त रकम देने के निर्देश अदालत ने दिए है. कंपनी द्बारा शिक्षक संजय बबेरवाल को मिशो कंपनी द्बारा उनकी राशि लौटाई गई है.
मिशो कॉम से वस्तु खरीद के मामले में पहली सुनवाई के दौरान मिशो कंपनी द्बारा याचिका झूठी होने का दावा किया गया. कंपनी ने अपनी बात रखने के लिए एक महीने की अदालत से समय मांगा था. इस पर संजय बबेरवाल के वकील गजेंद्र सदार ने अत्यंत तार्किक, सटीक तथ तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत कर कंपनी के दावों की वास्तविकता अदालत के सामने रखी. कानूनी सूत्रों के अनुसार एड. गजेंद्र सदार के प्रभावी दलीलों के बाद मात्र 2 तारीखों के भीतर कंपनी को अपने झूठे दावे का आभास हो चुका था. जिसके कारण साढे तीन साल चली सुनवाई के दौरान मिशो कंपनी के अधिकारी एवं वकील किसी भी सुनवाई में उपस्थित नहीं रहे. अदालत ने निष्पक्षता के साथ कंपनी को 8 माह तक 4 बार अवसर दिए. लेकिन उनकी ओर से अदालती आदेश की बार- बार अवहेलना होने के चलते अंतत: अदालत ने उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर संजय बबेरवाल के पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राशि का नहीं, बल्कि उपभोक्ता के विश्वास सम्मान और अधिकारों के विश्वास, सम्मान ओर अधिकारों के हनन से जुडा है. अदालत के आदेशानुसार कंपनी को मूल राशि के अतिरिक्त मानहानि एवं क्षतिपूर्ति की अतिरिक्त राशि का भी भुगतान करना पडा. इस कानूनी संघर्ष में संजय बबेरवाल के लिए उनके माता-पिता सबसे बडी प्रेरणा रहे. साथ ही मित्र कुणाल मार्वे और शिक्षक मित्र अजय बेडेकर ने हर चरण में उनका साथ देते हुए संजय का धीरज बढाया. संजय बबेरवाल ने जीत का श्रेय वकील गजेंद्र सदार की कानूनी समझ, घैर्य और प्रभावी पैरवी को दिया है.
इन दिनों ई- कॉमर्स का चलन बढने लगा है. ऐसे में उपभोक्ता किस प्रकार ई- कॉमर्स को भी अदालत तक लेकर आ सकते हैंं. इस बात का संजय बबेरवाल की पैरवी से जनता को अहसास करवाया. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार उपभोक्त संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार, उपभोक्ता से धोखाधडी जैसे मामलों में कंपनियों पर आर्थिक दंड, क्षतिपूर्ति और मानहानि का आदेश दिया जा सकता है.
* हमारी जागरूकता ही सबसे बडा हथियार
संजय बबेरवाल ने कहा कि यह लडाई केवल 1500 रूपए की नहीं है, बल्कि सत्य और आत्मसम्मान की है. यदि उपभोक्ता कोर्ट के चक्कर लगाने के डर से चुप बैठ जाएगा तो कंपनियां धोखाधडी करने का साहस करती रहेगी. अक्सर बडी कंपनियां छोटी-छोटी राशियों में आम लोगों को नुकसान पहुंचाकर अपना कारोबार बढाती है. आर्थिक रूप से कमजोर या अनजान उपभोक्ता कई बार ऐसे धोखों को समझ नहीं पाते और चुप रह जाते हैं. जिससे गलत प्रवृत्तियों को बढावा मिलता है. इसलिए नुकसान चाहे 5 रूपए का क्यों न हो, उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए. यह केवल पैसे नहीं, बल्कि मेहनत की कमाई और आत्मसम्मान का प्रश्न है.

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