विकसित महाराष्ट्र की संकल्पना को साकार करने अजित दादा की थी आवश्यकता
पालकमंत्री चद्रशेखर बावनकुले का प्रतिपादन

* उपमुख्यमंत्री स्व. अजित पवार को सर्वदलीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम
* एनसीपी, भाजपा, कांग्रेस, वायएसपी, शिवसेना समेत सभी दलों के नेता रहे उपस्थित
* सभी ने पुष्प अर्पित कर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
अमरावती/दि.10 – उपमुख्यमंत्री रहे अजित दादा पवार की समाज में एक अलग छाप थी. उन्होंने हमेशा ही लोंगो को राजनीति और सामाजनीति में किस प्रकार की भुमिका अपनाना नही चाहिये इसे लेकर जीवन ज्ञान दीया था. मै भी उनका एक शिष्य रहा हूं जिसके कारण वर्ष 1994 से अब तक मेरे जीवन में उनकी अहम भूमिका रही है. वर्ष 2047 के विकसित महाराष्ट्र की संकल्पना को साकार करने के लिए अजीत दादा जैसे व्यक्ति की आवश्यकता थी, लेकिन समय में ऐसा चक्र पलटा कि आज समाज और महाराष्ट्र को समर्पित जीवन समाप्त हुआ, ऐसा महसूस होने लगा है. उक्त संवेदनाएं पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने स्थानीय संत ज्ञानेश्वर सांस्कृतिक भवन के लॉन में आयोजित सर्वदलरय श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान व्यक्त की. इस कार्यक्रम का आयोजन सोमवार, 9 फरवरी को किया गया था.
इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय महानुभाव परिषद अध्यक्ष मंदत मोहनदास कारंजेकर बाबा, समाधा आश्रम के डॉ. संतोष महाराज नवलानी, पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटील, पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख, विधायक संजय खोडके, पूर्व लेडी गवर्नर डॉ. कमलाताई गवई, विधायक सुलभा खोडके, विधायक प्रताप अडसड, विधायक रवि राणा, विधायक राजेश वानखडे, विधायक प्रवीण तायडे, विधायक गजानन लवटे, महापौर श्रीचंद तेजवानी, महापौर सचिन भेंडे, शिवसेना उबाठा के पूर्व सांसद अनंत गुढे, पराग गुडधे, शिंदे सेना पूर्व विधायक ज्ञानेश्वर धाने पाटील, नानकराम नेभनानी, प्रीती बंड, भाजपा जिलाध्यक्ष रविराज देशमुख, किरण पातुरकर, तुषार भारतीय, शिवराय कुलकर्णी, चेतन गावंडे, निवेदिता दिघडे, प्रा. दिनेश सुर्यवंशी, कांग्रेस महासचिव किशोर बोरकर, रामेश्वर अभ्यंकर, हरिभाउ मोहोड, कांचनमाला गावंडे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुरेखा ठाकरे, संतोष महात्मे, अविनाश मार्डीकर, प्रशांत डवरे, रीना नंदा, यश खोडके, सुनील वहार्डे, संगीता ठाकरे, महाराष्ट्र ओलम्पिक संगठन के एड प्रशांत देशपांडे, शिवाजी शिक्षण संस्था के हेमंत कालमेघ, दादासाहेब गवई चैरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष कीर्ती अर्जुन, रिपाई आठवले, गट प्रकाश बनसोड, पीरीपा के चरणदास इंगोले, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जिलाध्यक्ष धीरज तायडे, जिला ऑटो यूनियन अध्यक्ष नितिन मोहोड, जिजाउ बैंक अध्यक्ष अविनाश कोठोले, दिगंबर जैन महासमिति अभिनंदन पेढांरी, माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष सुरेश साबू, भारतीय विद्या मंदीर महासचिव अनंत सोमवंशी, जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सौरभ मालाणी, भाजपा के आशीष अतकरे, राधा कुरील, ललित समदुरकर, जयंत डेहनकर, सुनील वहार्डे, कौशिक अग्रवाल, पप्पू पाटील, किरणताई महल्ले, सुरेखा लुंगारे, विकी शर्मा आशीष धमार्ले, रतन डेंडुले, मिलिंद बांबल, अनिता काले, प्राध्यापक संजय तीरथकर, डॉ. संजय शिरभाते, डॉक्टर गणेश खारकर, स्मिता सूर्यवंशी, प्रवीण हरमकर, प्रशांत वानखडे, सचिन रासने, सुनिल काले, मंगेश मनोहरे, गणेश रॉय, अरविंद गावंडे, शरद तसरे, नरेश पाटील, प्राध्यापक रविंद्र खांडेकर, मोहन पावडे, अश्विन चौधरी, गजू लोखंडे, पराग गुडधे के साथ बडी संख्या में विभिन्न राजनीतिक दलों के एंव सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
* विकसित महाराष्ट्र बनाने का सपना देख रहे थे दादा
इस कार्यक्रम में पालकमंत्री चद्रशेखर बाबनकुले ने कहा कि 1994 से मैं अजित दादा के साथ में रहा हूं. उनका और मेंरा रिश्ता 32 साल पुराना हेै. महायुति की सरकार विकसित महाराष्ट्र का जो सपना देख रही थी उनमें अजितदादा एक अष्टपहलू नेता के रूप में काम कर रहे थे. उनका जीवन हमेशा ही संघर्षमय रहा है. मैंने उनके साथ दस वर्षो तक जिला परिषद और लंबे समय तक विधिमंडल में विधायक के रूप में कार्य किया, उन्होंने मुझे समाज नीति और राजनीति में अपनी भूमिका को लेकर सीख दी थी. साथ ही हस्ताक्षर का इस्तेमाल कब और कहां करना चाहिए. यह भी सीखाया था. उन्होंने हमेशा ही कार्यकर्ताओं के जीवन को बदलने का प्रयास किया. विपक्ष नेता के रुप में भी उन्होंने कभी भी किसी को नीचा दिखाने की कोशिष नहीं की. वो कितने दिन जिये, इसका महत्व नहीं है. बल्कि वह किस तरह जिवन व्यथित कर हमारे बीच से चले गये है. वह महत्वपूर्ण है. उनकी पहचान हमेशा ही जनसेवक के रुप में रही है. विभिन्न योजनाएं बनाकर समाज संस्कृति और संस्कार का जतन करते हुए लोगों को बेहतर देने की कोशिश उनमें रही है. जिस समय उनके निधन के समाचार टीवी पर झलक रहे थे. सभी की आंखे नम हो चुकी थी.
– चंदशेखर बावनकुले,
राजस्व मंत्री व पालकमंत्री.
* भविष्य के मुख्यमंत्री थे दादा
पूर्व सांसद अनंत गुढे ने कहा कि, अजितदादा भविष्य के मुख्यमंत्री थे. हर व्यक्ति को न्याय देने का प्रयास वे अपने जीवन में करते रहे. जब यह घटना हुई तो आंख व कानों को विश्वास नहीं हो रहा था. मुख्यमंत्री मनोह जोशी के पश्चात दादा एक ऐसे व्यक्ति थे जो हमेशा अनुशासन का पालन कर सभी को समान न्याय देने का प्रयास करते थे.
– अनंत गुढे, पूर्व सांसद.
* हमेशा खिलाडियों को प्रोत्साहित किया
एडवोकेट प्रशांत देशपांडे ने कहां कि, हम खिलाडी के रुप में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने आए हैं उन्होंने हमेशा ही खिलाडियों को प्रोत्साहित किया था राजनीति में खेल नहीं होना चाहिए और खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए. उनकी यह सीख आज भी हम अपना कर उस पर अमल करने का प्रयास कर रहे है. ऐसे व्यक्ति को महाराष्ट्र ओलंपिक एसोसिएशन की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
हेमंत एकेडमिक ने कहा कि, अजीत पवार के जाने से राज्य को बडा नुकसान हुआ है. जिस समय उनके अंतिम यात्रा का लाइव टेलीकास्ट हम देख रहे थे और उसमें बारामती में उपस्थित जनसमुदाय को दिखा तो सच में लगा कि उन पर कितने लोग प्रेम करते हैं और कितने लोगों के लिए आज का यह पल उन्हें अनाथ बना देने की भावना को दशार्ता है.
– एड. प्रशांतद देशपांडे.
* अधिकारी वर्ग में उनका दबदबा था
पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, जिस समय वह घटना टीवी पर दिखाई जा रही थी उसी समय मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि, अजित दादा दुर्घटना में मारे गए हैं हमें ऐसा लगा था कि, वह इस घटना के बाद सकुशल घर लौट आएंगे मैंने करीब 5 साल तक उनके साथ काम किया था. जल संधारण विभाग में जब मेरे राज्यमंत्री के रुप में नियुक्ति हुई तो उसी समय हम आपको गृह राज्यमंत्री की बजाय जल सिंचाई विभाग के राज्यमंत्री का पद सौंपे तो आपको कोई आपत्ति नहीं होगी ना यह भी उन्होंने पूछा था. उन्होंने हमेशा ही विदर्भ के सिंचाई अनुशेष को कम करने के लिए अथक प्रयास लिए कृष्ण कोरी के अधिकारियों को विदर्भ में नियुक्ति प्रदान कर उन्हों यह काम करने का मौका दिया. जिसके कारण अधिकारी वर्ग में उनका किस तरह दबदबा रहा यह देखने का मौका भी मुझे मिला. किसी नेता को समाज और अधिकारी वर्ग में वर्चस्व बनाए रखना है, तो लंबा समय लगता है. लेकिन मात्र दशक में ही अजित दादा ने प्रशासकीय सेवा में कार्यरत अधिकारियों पर अपना दबदबा कायम कर हमें भी एक सीख दी जो सिख आज हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है.
– डॉ. सुनील देशमुख, पूर्व मंत्री.
* दादा मेरे बडे भाई समान थे
विधायक रवि राणा ने कहा कि, अजित दादा के जाने से बडा नुकसान हुआ है. मेरे लिए वह बडे भाई के समान थे. यहीं कारण है कि, वर्ष 2014 में जब लोकसभा के चुनाव हुए तब नवनीत राणा को उनके माध्यम से ही टिकट मिल पाए थे और सांसद के रुप में उन्हें काम करने का मौका मिला था. हमेशा ही रोक-टोक भूमिका रखने वाले अजित दादा से लोग डरते थे. सुबह 6 बजे उठकर काम पर निकल जाना, अनुशासन और काम के प्रति ईमानदारी जमीनी स्तर के नेता के अचानक निधन से सभी को बडा दुख हुआ है. कई बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हंसी-मजाक में ही सही लेकिन कह जाते थे कि, जब अजित पवार मेरेे साथ होते हैं तो मेरा 50 फीसदी भार वे उठा लेते हैं. आज उनके निधन से यह 50 फीसदी भार उठाने वाला भी नहीं रहा. वे कार्यकर्ताओं के राजनेता थे. उनके साथ राजनीति से बढकर हमारा हमारा नजदीकी रिश्ता रहा है. ऐसे व्यक्ति के निधन से केवल राज्य नहीं बल्कि समाज का भी नुकसान हुआ है.
कार्यक्रम की शुरुआत में सभी उपस्थित मान्यवरों ने स्वर्गीय अजित दादा पवार की प्रतिमा को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि व्यक्त की. कार्यक्रम के दौरान उनका वीडियो भी दिखाया गया. कार्यक्रम के अंत में 2 मिनट मौन रखकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
– रवि राणा, विधायक.