सभी दल अपनी-अपनी विचारधारा पर कायम
गट बनाने किसी ने भी किसी के साथ हाथ नहीं मिलाया

* अब तक संभागीय आयुक्त के सामने 7 गट हो चुके पंजीकृत
* ‘वंचित’ के एकमात्र सदस्य ने भी खुद को गट के रुप में कराया रजिस्टर्ड
* भाजपा, वायएसपी, एमआईएम, शिंदे सेना, बसपा, उबाठा के बन चुके गट
* कांग्रेस व राकांपा के गटों का अब तक नहीं हुआकोई पंजीकरण
अमरावती/दि.3 – अमरावती महानगर पालिका के चुनाव का नतीजा घोषित हुए अब करीब 20 दिन हो चुके है और आगामी 6 फरवरी को महापौर व उपमहापौर पद के चुनाव होनेवाले है. जिसे ध्यान में रखते हुए मनपा में अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए बडी तेजी के साथ राजनीतिक समीकरण बन रहे है. चूंकि मनपा के चुनाव पश्चात मनपा के सदन में त्रिशंकू वाली स्थिति बन गई है. जिसके चलते पूरी उम्मीद थी कि, बहुमत के लिए जरुरी संख्या को जुटाने हेतु एक से अधिक राजनीतिक दलों द्वारा एक साथ आकर अपना गट बनाया जाएगा. परंतु अपेक्षा से विपरित अमरावती में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, बल्कि अमरावती में जिन राजनीतिक दलों के पार्षद मनपा में चुनकर आए है, उन सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने सदस्यों के नाम व संख्या के साथ अपने-अपने स्वतंत्र गट संभागीय आयुक्त के समक्ष पंजीकृत किए है. यहां तक कि, मनपा में महज एक सदस्य निर्वाचित रहनेवाली वंचित बहुजन आघाडी ने भी अपने एक सदस्य के साथ अपना स्वतंत्र गट बनाया है. साथ ही इस समय तक अमरावती मनपा के सदन में कुल 7 राजनीतिक दलों द्वारा अपने गटों का पंजीकरण कराया जा चुका है. वहीं 15 सदस्यों वाली कांग्रेस व 11 सदस्य वाली राकांपा (अजीत पवार) के गट अब तक रजिस्टर्ड नहीं हो पाए है.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक अमरावती के संभागीय राजस्व आयुक्त के समक्ष भाजपा के 25, युवा स्वाभिमान पार्टी के 15, एमआईएम के 12, शिवसेना शिंदे के 3, बहुजन समाज पार्टी के 3, शिवसेना उबाठा के 2 पार्षदों ने खुद उपस्थित रहते हुए अपने गट पंजीकृत कराए. साथ ही साथ वंचित बहुजन आघाडी के अकेले व एकमात्र सदस्य ने भी संभागीय राजस्व आयुक्त के साथ खुद पेश होकर अपने को स्वतंत्र गुट के तौर पर मान्यता देने का आवेदन किया था. जिसे संभागीय आयुक्त द्वारा स्वीकार किया गया है. जिसके चलते इन सभी राजनीतिक दलों के गटों और उनके गुट नेताओं को अब प्रशासकीय मान्यता मिल गई है. वहीं कांग्रेस के 15 तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 11 पार्षदों के गुटों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
बता दें कि, निर्वाचन विभाग के नियमानुसार मनपा चुनाव के उपरांत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अगले 30 दिन के भीतर राजनीतिक दलों को अपने नवनिर्वाचित सदस्यों के संभागीय राजस्व आयुक्त के समक्ष गुट पंजीकृत कराने होते है और गुट नेता का नाम भी देना होता है. जिसके बाद ही संबंधित गुट के सदस्यों को स्थायी समिति व विषय समिति के सदस्य एवं सभापति पद के लिए चुनाव लडने व वोट करने का अधिकार मिलता है. साथ ही पंजीकृत गट की सदस्य संख्या के आधार पर ही समितियों में गट की सदस्य संख्या का कोटा भी तय होता है. चूंकि महापौर व उपमहापौर पद का चुनाव सदन में हाथ उठाकर मतदान करते हुए किया जाता है. जिसके चलते महापौर व उपमहापौर पद के चुनाव हेतु गट की कोई जरुरत नहीं रहती. ज्ञात रहे कि, आगामी 6 फरवरी को महापौर व उपमहापौर पद के चुनाव होनेवाले है. जिसके उपरांत स्थायी समिति व विषय समिति के सदस्यों व सभापतियों का निर्वाचन होगा. इसी बीच 20 फरवरी को चुनाव की अधिसूचना पश्चात 30 दिनों मियाद भी खत्म हो जाएगी. जिससे पहले सभी दलों के लिए अपना पंजीकरण करना अनिवार्य रहेगा. चूंकि इस समय 7 दलों द्वारा पंजीकरण कराया जा चुका है और केवल दो दलों का पंजीकरण होना बाकी है. जिसके चलते कहा जा सकता है कि, प्रत्येक दल अपनी विचारधारा पर कायम है और किसी ने भी सत्ता के लिए किसी अन्य दल के साथ हाथ मिलाकर गट नहीं बनाया है. हालांकि भाजपा, युवा स्वाभिमान व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गटों द्वारा मनपा में अपना बहुमत साबित करने हेतु चुनाव पश्चात गठबंधन जरुर किया जा रहा है.





