युति व आघाडी की धामधूम में मूल मुद्दे गायब
अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने जारी नहीं किए अपने घोषणापत्र

* उठापटक वाली राजनीति में शहर के विकास व जनसमस्याओं की खुली अनदेखी
अमरावती /दि.2 – शहर के विकास का केंद्रबिंदू उस शहर के स्थानीय निकाय को कहा जाता है. इस लिहाज से अमरावती शहर में स्थानीय निकाय के तौर पर अमरावती महानगर पालिका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण कही जा सकती है. चूंकि इस समय अमरावती महानगर पालिका के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. जिसके चलते सभी राजनीतिक दलो में मनपा की सत्ता हासिल करने हेतु जबरदस्त धामधूम व गहमा-गहमी वाला माहौल है. साथ ही नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच युति व आघाडी को लेकर जबरदस्त उठापटक वाला दौर चलता रहा. जिसके चलते नामांकन दाखिल करने का समय समाप्त होने से ऐन पहले तक राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नामों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले थे और एक झटके के साथ बी-फॉर्म जारी करते हुए अधिकृत प्रत्याशियों के नामों की सूची घोषित की गई. परंतु खास बात यह रही कि, इस तमाम उठापटक के बीच मनपा की सत्ता मिलने के बाद अमरावती शहर के विकास के लिए कौन-कौनसे काम किए जाएंगे तथा विकास को लेकर क्या वीजन होगा, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं हुआ और इसे लेकर किसी भी राजनीतिक दल द्वारा कोई घोषणापत्र या वचननामा भी जारी नहीं किया गया. ऐसे में कहा जा सकता है कि, सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी गहमा-गहमी के बीच शहर की मूलभूत सुविधाओं एवं जनसमस्याओं की अनदेखी करते हुए उन्हें लगभग हासिए पर डाल दिया और जनता भी मूकदर्शक बनकर तमाम राजनीतिक उठापटक को तमाशे के तौर पर देखने के लिए मजबूर रही.
* अगले पांच वर्षों की कहीं कोई बात नहीं
इससे पहले मनपा चुनाव के समय सभी राजनीतिक दलों सहित चुनाव लडने के इच्छुकों द्वारा चुनाव की घोषणा होते ही अपने घोषणापत्रों व वचननामों को जारी किया जाता था. साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक मतदाता तक अपना घोषणापत्र पहुंचना ही चाहिए, इस बात की ओर विशेष तौर पर ध्यान भी दिया जाता था. ऐसे घोषणापत्रों एवं वचननामों के जरिए मतदाताओं को बताया जाता था कि, यदि चुनाव में जीत मिलती है और मनपा की सत्ता भी प्राप्त होती है, तो अगले पांच वर्षों के दौरान कौन-कौनसे विकास कामों को करवाया जाएगा तथा क्षेत्र सहित शहर की किन-किन समस्याओं को हल किया जाएगा. परंतु इस बार किसी भी राजनीतिक दल अथवा प्रत्याशी द्वारा अपने चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं किए गए है और किसी भी राजनीतिक दल अथवा प्रत्याशी ने शहर के विकास को लेकर अपना वीजन भी मतदाताओं के सामने नहीं रखा है. जिसके चलते मतदाताओं में भी इस बार चुनाव को लेकर काफी हद तक संभ्रम देखा जा रहा है.
* अब प्रचार के लिए मात्र 12 दिनों का समय
बता दें कि, आज 2 जनवरी को नामांकन वापसी का समय समाप्त होने के बाद कल 3 जनवरी को चुनावी अखाडे में डटे रहनेवाले प्रत्याशियों के नामों की अंतिम सूची मनपा के निर्वाचन विभाग द्वारा जारी की जाएगी तथा सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह भी आवंटित किए जाएंगे. जिसके बाद मनपा क्षेत्र में सभी पार्टियों व प्रत्याशियों का प्रचार असल रफ्तार पकडेगा. चूंकि आगामी 15 जनवरी को मनपा चुनाव हेतु मतदान कराया जाना है. जिसके चलते सभी राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों के पास प्रचार हेतु महज 11-12 दिनों का समय बचा हुआ है. इतने कम समय में शहर के करीब 6.77 लाख मतदाताओं तक अपने चुनावी घोषणापत्र व वचननामे को पहुंचाना सभी राजनीतिक दलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.
* प्रत्याशियों को लेकर मतदाता हैरत और संभ्रम में
अमरावती मनपा के आगामी चुनाव के लिए विविध राजनीतिक दलों द्वारा आघाडी व युति करने को लेकर जिस तरह से राजनीतिक उठापटक की गई और आघाडी व युति होने अथवा नहीं होने की स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही राजनीतिक दलों द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाने के उपरांत अपना टिकट कट जाने की वजह से जिस तरह कई इच्छुकों ने तुरंत ही पाला बदलकर किसी अन्य पार्टी से खुद के लिए टिकट का जुगाड किया. उसे देखते हुए आम मतदाता काफी हद तक हैरत एवं संभ्रम में है. खास बात यह है कि, ‘जनसेवा’ के लिए खुद को जबरदस्त तरीके से लालायित बताते हुए हर हाल में चुनाव लडने हेतु बेताब रहनेवाले प्रत्याशियों में से एक भी प्रत्याशी ने अब तक अपने वॉर्ड अथवा प्रभाग के विकास और जनसमस्याओं को हल करने को लेकर मतदाताओं के समक्ष कोई खाका प्रस्तुत नहीं किया है, बल्कि चुनाव लडने की मंशा को लेकर हर प्रत्याशी के पास रटा-रटाया ‘वन लाइनर’ जवाब है कि, पिछले वालों ने कोई काम नहीं किया, अब हम विकास करेंगे. लेकिन विकास कैसे होगा और किन-किन बातों का होगा, इसका कोई जवाब फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल अथवा प्रत्याशी के पास नहीं है.





